बलबीर पुंज All Article

कश्मीर: क्या ‘चीन नीति’ ही अंतिम विकल्प?

इस कॉलम में पिछले दो दशकों से अधिक समय में कश्मीर को लेकर अनेकों बार चर्चा हुई है। क्या कारण है कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु की तत्कालीन शेर-ए-कश्मीर शेख अब्दुल्ला से गहरी मित्रता, श्रीमती इंदिरा गांधी की कूटनीति, वाजपेयीजी की इंसानियत के दायरे में वार्ता की पहल, डॉ. मनमोहन सिंह के अथक प्रयासों से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और प्रदेश में भाजपा-पीडीपी गठबंधन सरकार की हरसंभव कोशिशों के बाद और पढ़ें....

विपक्ष उधेड़बुन में, इस कोशिश का भविष्य?

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार आगामी 26 मई को अपने कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे करने जा रही है। 36 माह के इस कालखंड में भारत के राजनीतिक मानचित्र में व्यापक परिवर्तन आया है। देश की राजनीति में आज भारतीय जनता पार्टी उस मोड़ पर है, जहां न केवल उसकी स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है बल्कि केंद्र के अतिरिक्त उत्तरप्रदेश सहित देश के 17 राज्यों में वह सत्तासीन भी है। वहीं किंकर्तव्यविमूढ़ विपक्ष निरंतर न और पढ़ें....

भारत और कोहिनूर की ऐतिहासिक यात्रा

हाल में सर्वोच्च न्यायालय के एक निर्णय के बाद विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा पुन: सुर्खियों में रहा। अदालत ने उस याचिका को निरस्त कर दिया, जिसमें ब्रिटेन से इस हीरे को वापस लाने के सरकारी प्रयासों की निगरानी की मांग की गई थी। इतिहास साक्षी है कि एक समय भारत, विश्व में 'सोने की चिड़िया' के नाम से विख्यात था। यही कारण है कि विदेशी आक्रांताओं ने यहां जमकर लूटपाट की। वर्तमान समय में भारत और पढ़ें....

नक्सली वीभत्सता, टूट रहा धैर्य

गत 24 अप्रैल को छत्तीसगढ़ के सुकमा में निर्माणधीन सड़क पर वामपंथी-आतंकियों ने जो बर्बरता दिखाई, उससे अधिकतर देशवासी आक्रोशित है। नक्सलियों के इस कायराना हमले में देश ने अपने 26 वीर सपूतों को खो दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वीभत्सता की सारी हदें पार करते हुए कुछ शहीदों के गुप्तांग तक नक्सली काटकर ले गए थे। आखिर स्वयंभू मानवाधिकारियों की वह मंडली कहां है, जो सुरक्षाबलों के हाथों नरपिशाच रुपी नक्सलियों के मारे जाने और पढ़ें....

अब्राहम लिंकन फॉर्मूला और कश्मीर

कश्मीर की दो सीटों पर उपचुनाव में हिंसा के बाद घाटी की स्थिति फिर बेकाबू हो गई है। इस पर सरकार से लेकर विपक्षी दल, वामपंथियों और कथित उदारवादियों के वक्तव्य व विचार सामने आए। किसी ने उप-चुनाव में स्थानीय लोगों की उदासीनता को जनमत संग्रह की संज्ञा दी। किसी ने कश्मीर के हाथ से निकलने की बात की और बाहुबल की नीति को हानिकारक बताया। इन्होने कश्मीर के लोगों का दिल जीतने पर बल और पढ़ें....

कुत्सित परंपरा को तोड़ेंगे प्रधानमंत्री मोदी!

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वर्ष जुलाई में इजराइल का दौरा करेंगे। वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री होंगे, जो न केवल इस यहूदी राष्ट्र की धरती पर कदम रखेंगे, बल्कि इस्लामी राष्ट्रों और देश के इस्लामी कट्टरपंथियों को अप्रसन्न नहीं करने की दशकों पुरानी छद्म-पंथनिरपेक्षों की कुत्सित परंपरा को भी तोड़ते हुए भारतीय इतिहास में मील का पत्थर भी स्थापित करेंगे। क्षेत्रफल की दृष्टि से इजराइल भले ही छोटा देश है, किंतु अपने प्रखर राष्ट्रवाद के और पढ़ें....

लैंगिक समानता पर कैसी बहस?

अब तो हद ही हो गई। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जनता दरबार में ट्रिपल तलाक का मामला गूंजने के बाद प्रदेश से इससे संबंधित कई मामले प्रकाश में आए है। कानपुर की आलिया को तो उसके शौहर ने निकाह के कुछ घंटे के भीतर ही स्पीड पोस्ट से तलाक भेज दिया। इससे पूर्व, 3 अप्रैल को लखनऊ में मुख्यमंत्री के जनता दरबार में शबरीन नाम की महिला अपनी 11 माह की बच्ची के और पढ़ें....

कब टूटेगी सभ्य समाज की नींद?

इस्लामी आतंकवाद और कट्टरपंथ विश्व शांति व सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुके है। हाल ही में लंदन में ब्रिटेन की संसद के पास हुए आतंकी हमले ने इस विषय पर बहस को और तेज कर दिया है। इस हमले के बाद भी उसी तरह का वातावरण बनाया जा रहा है, जैसा तथाकथित उदारवादी अबतक बनाते आए है। जब भी किसी राष्ट्र पर आतंकी हमला होता है, तब सार्वजनिक विमर्श में तथाकथित उदारवादियों द्वारा और पढ़ें....

आसाराम पर हल्ला, फादर रॉबिन पर चुप्पी!

हाल ही में केरल के कोट्टियूर में एक ईसाई पादरी द्वारा नाबालिग से बलात्कार, फिर उस पीड़िता के एक शिशु को जन्म देने का मामला सामने आया। पादरी को बचाने का प्रयास न केवल राज्य सरकार की मशीनरी की ओर से किया गया, बल्कि पीड़िता के पिता ने भी प्रारंभ में चर्च की प्रतिष्ठा की रक्षा करने हेतु आरोपी का साथ नहीं दिया। उक्त मामले पर छद्म-पंथनिरपेक्षक, उदारवादी और मानवाधिकार व स्वयंसेवी संगठन चुप रहे और पढ़ें....

राष्ट्रवाद बनाम छद्म-सेकुलरवाद

हाल में पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के जो परिणाम सामने आए है उनमें भाजपा के अभूतपूर्व प्रदर्शन, उत्तरप्रदेश में छद्म-पंथनिरपेक्ष व वामपंथियों की पराजय और मणिपुर में इरोम शर्मिला की शर्मनाक हार से क्या संदेश मिलता है? सचमुच किसी ने नहीं सोचा था, चाहे वे विरोधी दल के सदस्य हो या फिर समर्थक, कि भाजपा उत्तरप्रदेश में 300 सीटों का आंकड़ा पार कर पाएगी। वर्ष 2012 में भाजपा को 15 प्रतिशत मत और और पढ़ें....

बलबीर पुंज

बलबीर पुंज

editoralbp@nayaindia.com

Balbir Punj is a Rajya Sabha MP of BJP and a political commentator. He is a Guest Writer for NAYA INDIA, and writes a weekly column focussing on the Indian Economy. He started his journalistic career in 1971 for the publication Motherland and later moved on to work with Financial Express, for almost 25 years. He appears regularly on all mainline television channels discussing and debating on contemporary political- economic issues.

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