श्रुति व्यास All Article

चीन, पाक की कूटनीतिः क्या हो जवाब?

पाकिस्तान के साथ कूटनीति के मोर्चे पर पिछले कुछ समय से गतिरोध बना है। अब चीन के साथ भी भारत की कूटनीति इसी दिशा में बढ़ रही है। चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना वन बेल्ट, वन रोड, ओबीओआर के लिए बीजिंग में बुलाई गई बेल्ट एंड रोड फोरम की बैठक में भारत की गैरहाजिरी ने इस गतिरोध को और बढ़ा दिया है। भारत ने शनिवार को एक बयान जारी करके इस सम्मेलन में नहीं शामिल होने और पढ़ें....

बांहें पसार कर तुर्की का स्वागत क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को भारत और तुर्की के कारोबारियों के एक सम्मेलन में कहा कि वे बांहें पसार कर तुर्की के लोगों के स्वागत के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि वे भारत में आएं और निवेश करें क्योंकि भारत निवेश के लिए इतनी आकर्षक जगह पहले कभी नहीं रहा है। जब उन्होंने यह न्योता दिया उस समय तुर्की के राष्ट्रपति रज्जब तैयब एर्दोआन भी मंच पर मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी का इस न्योते और पढ़ें....

थेरेसा मे का चुनावी दांव!

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने बड़ा दांव खेला है। उन्होंने कोई ढाई साल पहले ही ब्रिटेन में आम चुनाव कराने का फैसला कर लिया है। यह बहुत साहसी लेकिन जोखिम वाला फैसला है। उनकी कोशिश है कि ब्रिटिश संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कामंस में कंजरवेटिव पार्टी के सदस्यों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के बाहर होने के लिए चल रही वार्ताओं में मुश्किल नहीं आए और उन्हें ज्यादा और पढ़ें....

चीन से सुलझना चाहिए विवाद!

तिब्बती धर्मगुुरु दलाई लामा की अरुणाचल प्रदेश यात्रा को लेकर फिर से भारत और चीन आमने सामने हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने बहुत सख्त अंदाज में कहा कि दलाई लामा की यात्रा से भारत और चीन के संबंधों को गहरा नुकसान होगा। इसके बाद भारत ने इसी अंदाज में जवाब दिया कि चीन को भारत के अंदरूनी मामले में दखल नहीं देना चाहिए। दलाई लामा जब तक अरुणाचल में रहेंगे, तब तक दोनों तरफ और पढ़ें....

ट्रंप के शपथ और भाषण पर सबकी नजर!

डो­नाल्ड ट्रंप आज अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। और इसी के साथ अमेरिका के बदलने का वक्त शुरू होगा। डोनाल्ड ट्रंप की शपथ अमेरिका के इतिहास एक नया मोड़ साबित होगी। उन्होंने आर्थिकी के कायाकल्प और रोजगार बढ़ाने को ले कर जो कुछ कहा है उससे देश में बहुत आशावाद बना है। यह दुनिया और खास कर चीन जैसे नियार्तक देशों के लिए चिंताजनक बात है। ट्रंप आर्थिकी पर ही अधिक फोकस देंगे। और पढ़ें....

गुजरे साल की विरासत की पहेली!

दुनिया के तमाम विचारवानों, बौद्विकों ने 2016 को पहेली वर्ष माना है। कई पहेलियों का वर्ष था। और किसी पहेली का सर्वमान्य हल भी नहीं खोजा जा सका। इस वर्ष वह हुआ जिसे दुनिया ने नहीं चाहा और न संभव माना। मतलब डोनाल्ड ट्रंप का अमेरिकी राष्ट्रपति बनना और योरोपीय साझा बाजार से ब्रिटेन के बाहर होने के फैसले ने विश्व जनमानस को ऐसा हैरान किया कि आज यह बहस है कि दुनिया किधर जा और पढ़ें....

पुरानी धुरी पर भारत की विदेश नीति!

भारत की विदेश नीति में पाकिस्तान और चीन स्थाई पुराने मुद्दे हैं। इसलिए 2016 में भी इन दो देशों की धुरी पर भारत की विदेश नीति का घूमना आश्चर्यजनक नहीं है। बावजूद इसके दोनों देशों को ले कर 2016 में जो कूटनीति हुई, जो उतार-चढ़ाव आए वे अजीब थे। भारत ने साल की शुरूआत दोनों देशों को पटाने, मनाने, समझाने से शुरू की। 25 दिशंबर 2015 को अपनी तह लाहौर जा कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पढ़ें....

डोनाल्ड ट्रंप की चीन नीति में भारत कहां?

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप का नया प्रशासन अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में निश्चित ही भारी फेरबदल करवाएंगा। उसका पहला फोकस आर्थिकी को दौड़ाना है और इसके लिए चीन से आयात घटाना, वहां लगी अमेरिकी कंपनियों को हटवाना है। उस नाते अमेरिका –चीन के भावी आर्थिकी रिश्तों में भारत के लिए भी बहुत कुछ कर सकने की संभावना है। जाहिर है 2017 के वर्ष में दुनिया की राजनीति में नंबर एक मसला चीन का बनता लगता है। अमेरिका और पढ़ें....

अमृतसर घोषणापत्रः अफ-पाक की हकीकत!

पाकिस्तान एक बार फिर आंतक पर घिरा है। अमृतसर में हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन की मेजबानी से भारत आंतक पर फोकस बनवाने में सफल हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी दोनों ने इस हकीकत को रेखांकित किया कि यदि क्षेत्र की चिंता करनी है तो आंतकवाद पर चर्चा करनी होगी। ध्यान रहे एशिया के दिल की चिंता के नाम से बना यह समूह अफगानिस्तान को केंद्र में रख कर है। अफगानिस्तान और पढ़ें....

नोटबंदीः ठहरा जीवन, वक्त खाती लाईने!

दो सप्ताह हुए, बिना नकदी, खाली जेब की बैचेनी और पीड़ा में जीते हुए। हां, कोई भी हो, जीवन अब वह नहीं रहा जो 8 नवंबर 2016 से पहले था। वह, बेखटके वाले रूटिन में बंधा हुआ सहज-चलायमान जीवन। उस जीवन में काम था। खेल-मनोरंजन था, खुशी-उत्सव-बेफिक्री थी। वह फिलहाल खत्म है। आज न काम है, न बेफिक्री है और मौजमस्ती तो कतई नहीं। वक्त को लाइने खा रही है। यदि लाइन में नहीं भी और पढ़ें....

श्रुति व्यास

श्रुति व्यास

svyas63@gmail.com

Shruti Vyas is the Editor(views) of NAYA INDIA and has over 3 years of experience as a writer on international affairs and on social issues. She started his journalistic career as a roving correspondent at Jain studio in 2009. She joined as director to Samvad Parikrama in 2010 and then joined NAYA INDIA. She is incharge of the opinion page as well as in charge of planning features and stories for Saturday-Sunday special feature pages. she helps oversee NAYA INDIA’s editorial content and writes on contemporary issues.

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