डा. वेद प्रताप वैदिक All Article

रियाद में ट्रंप का शीर्षासन

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कमाल के आदमी हैं। उन्होंने सिद्ध कर दिया है कि वे शीर्षासन कला के आचार्य हैं। उन्होंने राष्ट्रपति का चुनाव जीता तो इसी मुद्दे पर कि उन्होंने इस्लाम और आतंकवाद को एक ही सिक्के के दो पहलू बता दिए थे। उस समय उन्होंने अपनी छवि ऐसी चमकाई कि वे इस्लामी आतंकवाद के विरुद्ध तलवार भांजते हुए धर्मयोद्धा की तरह दिखते रहे। अमेरिका के ईसाई और हिंदू वोटरों को उन्होंने सम्मोहित—सा और पढ़ें....

रुहानी की जीत सुहानी

ईरान के राष्ट्रपति के चुनाव में हसन रुहानी की जीत बहुत सुहानी है, क्योंकि पिछले कुछ दिनों से यह छवि पेश की जा रही थी कि रुहानी हार जाएंगे। बहुत-से अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों को भी लग रहा था कि इस बार रुहानी हार जाएंगे, क्योंकि ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनई उनसे नाराज हैं और उन्होने अपने एक परम भक्त इब्राहिम रईसी को उनके खिलाफ खड़ा कर दिया है। लोग यह मानकर चल रहे थे और पढ़ें....

हिरणों को गधा क्यों बनाएं ?

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कुर्सी संभालते ही कई ऐसे कामों की झड़ी लगा दी है, जिससे सारे देश में उनकी वाहवाही हो रही है। वे टीवी चैनलों और अखबारों में छाए रहे। इतने ज्यादा छाए रहे कि उन्हें देखकर हमारे प्रचारप्रेमी प्रधानमंत्री भी बेचैन हो जाते होंगे। इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं कि योगी और मोदी के बीच आत्म-प्रचार की प्रतिस्पर्धा छिड़ गई है। योगी तो योगी हैं। धुन के धुनी हैं। उन्हें और पढ़ें....

अनिल दवे का असमय जाना

अनिल दवे के निधन की खबर ज्यों ही कल सुबह किसी भाजपा नेता ने मुझे फोन पर दी, मैं सन्न रह गया। इधर अनिलजी का स्वास्थ्य ढीला ही रहता था लेकिन वे इतनी जल्दी हम लोगों के बीच से चले जाएंगे, इसकी कभी कल्पना भी नहीं थी। अनिल से मेरा परिचय उस समय का है, जब वे इंदौर में पढ़ते थे। जब भी मैं गर्मियों की छुट्टियों में इंदौर जाता था, अनिल दवे और उनके और पढ़ें....

पाकिस्तान अब क्या करेगा ?

कुलभूषण जाधव के मामले में हेग के अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने अंतरिम फैसला यह दिया है कि अगस्त के महिने तक पाकिस्तान उसे सजा न दे। अदालत के अंतिम फैसले का वह इंतजार करे। अब प्रश्न यह है कि पाकिस्तान क्या करेगा ? पाकिस्तान के पास इसके अलावा कोई चारा नहीं है कि वह जाधव को अगस्त तक फांसी पर न चढ़ाए। इसका कारण स्वयं पाकिस्तान ही है। यदि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय अदालत का फैसला नहीं मानना और पढ़ें....

कौन है, दूध का धुला हुआ?

लालूप्रसाद यादव और पी चिदंबरम की संतानों के ठिकानों पर छापे मारने से सरकार को नया क्या मिलेगा ? जो मिलेगा या मिल रहा है, वह किसी से छिपा है, क्या ? सबको पता है कि लोग नेतागीरी के धंधे में क्यों आते हैं? इसलिए आते हैं कि हींग लगे न फिटकरी और रंग चोखा आए। आज देश में क्या एक भी नेता ऐसा है, जो दावा कर सके कि वह स्वच्छ है ? दिल्ली और पढ़ें....

राज्यपाल पर कागज के गोले

उत्तरप्रदेश विधानसभा में कल जो कुछ हुआ, उसे टीवी चैनलों और अखबारों के मुखपृष्ठों ने करोड़ों लोगों को दिखाया। ऐसा मजेदार और अहिंसक दृश्य अब से पहले किसी विधानसभा या अपनी संसद में भी कभी देखने को नहीं मिला। राज्यपाल राम नाइक अपना औपचारिक भाषण पढ़ रहे हैं और उन पर समाजवादी पार्टी के विधायक कागज के गोले बना-बनाकर फेंक रहे हैं। कागज के गोलों से कहीं राज्यपालजी को चोट नहीं लग जाए, इसीलिए सदन और पढ़ें....

भारत-चीनः हम राष्ट्रवादी या धृतराष्ट्रवादी?

चीन में ‘वन बेल्ट वन रोड’ (ओबोर) सम्मेलन शुरु हो गया है। भारत उसमें भाग नहीं ले रहा है। मैं चाहता था कि भारत उसमें भाग ले और अपना पक्ष डटकर रखे। भारत को मनाने-पटाने की बजाय चीन की गुस्ताखी देखिए कि उसके सरकारी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ में भारत के विरुद्ध बहुत ही गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी निकली है। उसमें कहा गया है कि यदि अब भारत ‘ओबोर’ में शामिल होगा तो उसे बहुत छोटी भूमिका मिल और पढ़ें....

फिर निर्भयाः कानून बने तो ऐसा!

आज सुबह जैसे ही मैंने अखबार खोले, मेरा खून खौल उठा। फिर निर्भया ! अभी एक हफ्ता ही हुआ है, निर्भया के बलात्कारियों को मृत्युदंड की घोषणा को और रोहतक के इन नर-पशुओं की इतनी हिम्मत पड़ गई ! क्यों पड़ गई, इतनी हिम्मत इनकी ? क्या इसलिए नहीं कि सर्वोच्च न्यायालय की उस सजा का उन पर या किसी भी दरिंदे पर कोई असर नहीं हुआ ? निर्भया के बलात्कार और हत्या ने सारे देश और पढ़ें....

धर्मग्रंथ बड़ा है कि राष्ट्रग्रंथ ?

तीन तलाक के बारे में हमारे सर्वोच्च न्यायालय ने अभी जो शुरुआती विचार रखा है, उसी पर देश के विचारकों को खुली बहस चलाने की जरुरत है। अदालत ने कहा है कि वह सिर्फ तीन तलाक के मुद्दे पर विचार करेगी और यह देखेगी कि कुरान में उसका समर्थन है क्या? यदि कुरान तीन तलाक को ठीक मानती है और यदि मुसलमानों का यह धार्मिक मौलिक अधिकार है तो उसमें वह हस्तक्षेप नहीं करेगी। यहां बड़ा और पढ़ें....

डा. वेद प्रताप वैदिक

डा. वेद प्रताप वैदिक

dr.vaidik@gmail.com

Dr. Ved Pratap Vaidik, a renowned Journalist of his era, wears a hat of Scholar, Political Analyst, Orator and Columnist. As an expert on international affairs, Dr Vaidik is a Contributing Writer at NAYA INDIA, writing extensively on national and international affairs. Dr. Vaidik started his career with Press Trust of India and served a decade as the Founder-Editor of its Hindi News Agency “BHASHA”. He also had a long stint as the Editor (views) of Nav Bharat Times. Currently, he is the Chairman Council for Indian Foreign Policy and Bhartiya Bhasha Sammelan. Dr Vaidik has a long association with Afghanistan and has known Afghanistan as a Journalist and Peace activist. He has done extensive field work there and has been playing an active role in the Afghan Affairs by helping the contending parties to negotiate peace. He has been an active political activist; a widely travelled scholar-journalist; and has been a member of several Advisory Committees of Govt of India. An avid reader and excellent orator, he appears regularly on all mainline television channels and has several award winning research publications to his credit. He has a Ph.D degree in International Affairs from Jawaharlal Nehru university and is fluent in several languages- Russina, Persian, English Hindi, and Sanskrit

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