विवेक सक्सेना All Article

देंदा एक रब, सड़दे ने सब

तमाम अंग्रेजी अखबारों के अंदर के पृष्ठों पर एक ऐसी अहम खबर छपी जिसकी अनदेखी कतई नहीं की जा सकती। यह खबर दुनिया के तमाम देशों के खुशी सूचकांक या हैप्पीनैस इंडेक्स को ले कर है। इस खबर में यह खुलासा हुआ है कि भारत अपने पड़ोसी देशों की तुलना में खुशहाली के सूचकांक में भी काफी पिछड़ गया है। जब पिछले साल खुशहाली का सूचकांक जारी किया गया था तो 153 देशों की सूची और पढ़ें....

पाक में हर अदालत में करनन!

भारत में अकेले जस्टिस करनन ने लोकतंत्र के चारो स्तंभों को स्तब्ध कर रखा है। खुद न्यायाधीश होने के बाद भी वे अपने बनाए कानून पर चलते हैं। उन्हें सुप्रीम कोर्ट की अवमानना तक करने का डर नहीं हैं। वे अपने वरिष्ठ न्यायाधीश सहकर्मियों के खिलाफ पुलिस को मामले दर्ज करने के निर्देश जारी करते हैं और अपने खिलाफ जारी सुप्रीम कोर्ट के जमानती वारंट की धज्जियां उड़ा कर रख देते हैं। इस समय वे और पढ़ें....

भाग मछंदर, योगी आया!

उत्तर प्रदेश में एक कहावत है कि भाग मछंदर, गोरख आया। यह कहावत किवदंती से निकली है और उसको जानने के बाद उत्तर प्रदेश के नवनियुक्त मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को समझने में आसानी होगी। योगी आदित्यनाथ गोरखपुर स्थित गोरक्षनाथ मठ के महंत हैं जिसके नाम पर इस शहर का नाम गोरखपुर रखा गया था। गोरक्षनाथ मठ की स्थापना महंत गोरखनाथ के गुरू मत्स्येंद्रनाथ ने की थी जो इस देश के 84 सिद्ध पुरूषों में जाने और पढ़ें....

अब ध्रुविकरण के लिए नहीं जरूरी हिंसा

इस बात में बहुत बड़ा सत्य छिपा हुआ है कि ‘जहां काम आएं सुई, क्या करे तलवार’। पुरानी कहावतें जोकि हमें मुहावरो, दोहों आदि के जरिए दी जाती थी इतनी सही और सटीक साबित होगी, शायद इसकी खुद उनके रचयिताओं ने भी कल्पना नहीं की होगी। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद मुझे यह कहावत याद आ गई। अभी तक जो कुछ सुना व पढ़ा और देखा उसके बाद अपना भी यही और पढ़ें....

अरूसा आलम और कौमी तराना

इंडियन एक्सप्रेस खोला तो उसमें अंदर के पेज पर अरूसा आलम की तस्वीर थी। उसे देखकर थोड़ा चौकना स्वाभाविक था कि इस दौरान भी वे वहां मौजूद हैं। दरअसल अरूसा आलम पाकिस्तान की उन हस्तियों में शुमार है जिसकी भारतीय नेताओं से गहरी दोस्ती है। वे कैप्टन अमरेंद्र सिंह की काफी घनिष्ठ मित्र है। ठीक वैसी ही जैसे कि मेहर तरार, शशि थरूर की दोस्त हुआ करती थीं। संयोग से ये दोनों ही महिलाएं पत्रकार और पढ़ें....

कोउ नृप होय हमें क्या लाभ?

इन पांच राज्यों के चुनाव नतीजों को लेकर मैं भी देश के तमाम दूसरे नागरिकों की तरह बेहद उत्सुक था। जब नतीजे आए तो मैं अवाक रह गया। भाजपा की ऐसी सुनामी बनेगी, मुझे इसका जरा भी अनुमान नहीं था। सच कहूं तो मन में कभी यह इच्छा भी नहीं थी कि यह सुनामी बढ़े मगर जनता ने फैसला कर लिया तो मैंने भी उसे स्वीकार कर लिया। न भी करता तो भाजपा, जीतने वालों और पढ़ें....

राम नाम से बड़ी मोदी नाम आंधी !

भगवान राम यदि पृथ्वी पर आज आएं होते तो उत्तर प्रदेश के चुनाव नतीजे देखते हुए निश्चित ही दिल्ली के रामलीला मैदान में नरेंद्र मोदी का तिलक करने के लिए आतुर होते। इस देश में गुजरात के दो लोगों ने कमाल कर दिखाया है। पहले थे महात्मा गांधी जिन्होंने अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए मजबूर किया और उनके सम्मान में ये पंक्तियां लिखी गई कि दे दो हमें आजादी बिना खड़ग, बिना ढाल साबरमती और पढ़ें....

मोदीजी, यह तो जजिया जैसी वसूली

अंग्रेंजी की एक कहावत है कि ‘टू पे पॉल, रॉब पीटर’ मतलब यह कि अगर पॉल को कुछ पैसा देना है तो पीटर को लूटना होगा। यह कहावत वास्तव में जीवन का सत्व तत्व है। खासतौर से जब सरकार की बात आती है तो यह सौ फीसदी सही साबित होती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीरो बैंलेस वाले जनधन खाते खुलवा कर जो अपनी पीठ थप-थपाई थी उसकी कीमत आम सेविंग बैंक खाताधारकों को आगे और पढ़ें....

कहां गायब हो गए ज्योतिषी?

हर इंसान के कुछ शौक होते हैं। कुछ लोगों को अच्छे कपड़े, महंगी गाडियां, बढिया शराब पीने या फिर महंगे होटलों में जाने का शौक होता है तो कुछ लोग कुत्ते पालने, जुआ खेलने या फिल्में देखने के शौकीन होते हैं। अब अपने शौक बहुत सीमित हो गए हैं। इसकी एक वजह बढ़ती उम्र के साथ गिरता स्वास्थ्य है। कुछ शौको पर डाक्टरो ने पाबंदी लगा दी है। फिर भी जो शौक आज भी बचे और पढ़ें....

उफ! करण का ऐसे पिता बनना

करण जौहर के बारे में मैं बहुत ज्यादा नहीं जानता हूं। यदा-कदा उन्हें ‘कॉफी विद करण’ शो में देखा है। हालांकि उनके बारे में जो कुछ पढ़ रखा है उससे पता चलता है कि उनके शौक और कुछ पसंद जवानों वाले हैं। अपना मानना है कि इस देश में महात्मा गांधी के बाद वे दूसरे ऐसे सच बोलने वाले व्यक्ति है जिसने अपने यहां वर्जित मानी जाने वाली अपनी पसंद को उजागार किया है। उन्होंने और पढ़ें....

विवेक सक्सेना

विवेक सक्सेना

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Vivek Saxena is the Popular columnist of NAYA INDIA. He writes from Monday to Friday every week. He has 30 year experience of journalism. Prior to joining NAYA INDIA, he had a long stint at various hindi magazines. ….

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