विवेक सक्सेना All Article

खौफजदा होते मुसलमान

देश के दो प्रमुख अल्पसंख्यक समुदायों से मेरे बहुत पुराने व घनिष्ठ संबंध रहे हैं। मैंने पंजाब के आतंकवाद को कवर किया और फिर 1984 के दंगों की रिपोर्टिंग की। मैं यह बात पूरे गर्व के साथ कह सकता हूं कि उस दौरान जनसत्ता की जो भूमिका रही थी व सिखों ने जितना इस अखबार पर विश्वास किया उसका मुझे रिपोर्टिंग करने में पूरा लाभ मिला। यह भरोसा इस हद तक रहा कि जब भी और पढ़ें....

पहनावा और भिड़ने का बहाना

हमारे देश की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां के लोग असली मुद्दों को छोड़कर हर उस मुद्दे पर उलझने के लिए तैयार रहते है जिनकी आसानी से अनदेखी की जा सकती है। कभी हम लोग इस बात पर उलझ पड़ते है कि कौन क्या खाए तो कभी इस बात पर सिर फुटैव्वल के लिए तैयार हो जाते हैं कि कौन किसके साथ घूम सकता है। लडके-लडकी मोटरसाईकिल पर साथ घूम सकते है या और पढ़ें....

क्या राष्ट्रपति प्रणाली का आता वक्त?

हमारे देश की एक खासियत यह है कि यहां जब भी कोई नेता काफी मजबूत बन कर उभरता है तो उसके मन में यह भावना पैदा होते देर नहीं लगती है कि इस देश की जनता उसके नाम पर वोट देती है। इंदिरा गांधी को भी यह भ्रम पैदा हुआ था और उनके करीबियो ने भी देश में राष्ट्रपति प्रणाली की व्यवस्था की संभावनाओं पर चर्चा शुरू कर दी थी। हालांकि बाद में हालात ऐसे और पढ़ें....

सरकार मतलब छुट्टियां ही छुट्टियां

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक अच्छे कदम का इरादा जाहिर किया है। उन्होने महापुरूषों की जयंती पर होने वाली छुट्टियां खत्म करके उस दिन स्कूलों में उन महापुरूषों के बारे में बच्चों को जानकारी देने की बात कही है। इस तरह से उन्होंने प्रदेश में पटरी से उतर चुके शिक्षा सत्र को सुचारू रूप से चलाने की दिशा में सोचा है। आमतौर पर तमाम राज्यों में सरकारे महापुरूषों की महानता की जगह और पढ़ें....

मौसम का लेना चाहिए मजा

लगता है उम्र और मौसम से सीधा रिश्ता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है वैसे-वैसे मौसम सताने लगता है। हालांकि उम्र बढ़ने के बाद भी मुझे कभी सुर्दियां बुरी नहीं लगी। न ही कभी ज्यादा सर्दी लगती है। मैंने अपने जीवन में शायद ही कभी मफलर पहना हो या टोपी लगाई हो। ओवर कोट या गर्म इनर पहनने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता है। शायद इसकी एक वजह यह भी हो सकती है कि और पढ़ें....

जिन्ना का घर, फिर चर्चा में

पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना को दुनिया छोड़कर गए करीब 70 साल हो चुके हैं मगर वे जो संपत्ति भारत में छोड़कर गए थे उसका विवाद अभी भी समाप्त नहीं हो पाया है। हाल ही में मुंबई के सबसे महंगे व पॉश इलाके में स्थित उनके ऐतिहासिक बंगले को जमीदोज करने की मांग की गई। महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा के विधायक प्रभात मंगल लोढा ने इसे गिराए जाने की जो दलील दी है वह और पढ़ें....

काश! मानी होती गैरी की सलाह

कुलभूषण जाधव के साथ पाकिस्तान ने जो कुछ किया है उसके बाद एक बार फिर यह सवाल उठने लगा है कि हम उसे उसकी ही भाषा में जवाब क्यों नहीं देते हैं? बहुत कम लोग इस सच से परिचित है कि इस देश में एक ऐसा अधिकारी था जिसने उसे उसकी समझ में आने वाली भाषा में ही जवाब दिया था और वह अंदर तक हिल उठा था। अगर उस अधिकारी की बात मान ली और पढ़ें....

केजरीवाल पुन भूषकः भव?

पूरे देश की नजरें दिल्ली की राजौरी गार्डन सीट पर लगी हुई थी। इस एक विधानसभा सीट से कांग्रेंस या भाजपा की जीत को कोई विशेष असर राजधानी में सत्तारूढ़ आप पर नहीं होने वाला था। इसकी वजह यह थी कि जिस पार्टी को महज दो साल पहले विधानसभा की 70 में से 67 सीटों पर जबरदस्त जीत हासिल हुई हो वह अगर एक सीट न भी जीतती तो क्या फर्क पड़ने वाला था। मगर और पढ़ें....

जब संकट मोचक बनती है सरकार!

चंद दिन पहले राम नवमी थी और फिर हनुमान जयंती। मैंने अपनी सोसायटी में एक मंदिर बनवाया हुआ है। नवरात्रि के दिन पूजा हवन आदि का आयोजन था। सुबह पुजारीजी ने फोन करके मुझे बुलाया। सारी तैयारी हो चुकी थी। फल-फूल मेवा से लेकर दो पुजारी तक मौजूद थे मगर पूजा में बैठने वाले भक्त नदारद थे। कुछ देर तक इंतजार करने के बाद अकेला मैं पूजा में बैठा। लगभग आधे घंटे बाद चंद और और पढ़ें....

जासूसों को नहीं मिला करता न्याय!

इस देश के लोग साल पहले पाकिस्तान की जेल में बेरहम पिटाई से मारे गए कथित जासूस सरबजीत सिंह की कहानी भूला भी नहीं पाए थे कि अब कुलभूषण जाधव का मामला गरमा गया है। उन्हे पिछले साल पाकिस्तान ने बलोचिस्तान में गडबड करने, जासूसी करने के आरोप में पकड़ने का आरोप लगाया था। उन्हें अब वहां की सैनिक अदालन ने फांसी की सजा सुना दी है। कमांडर कुलभूषण सुधीर जाधव उर्फ हुसैन मुबारक पटेल और पढ़ें....

विवेक सक्सेना

विवेक सक्सेना

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Vivek Saxena is the Popular columnist of NAYA INDIA. He writes from Monday to Friday every week. He has 30 year experience of journalism. Prior to joining NAYA INDIA, he had a long stint at various hindi magazines. ….

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