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रविवार खास

मोदी-मोदी के बाद अब योगी-योगी!

उत्तर प्रदेश के शासनतंत्र को बुलेट ट्रेन से भी तेज गति देने के लिए मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जिस तरह से पिल पड़े हैं उसमें एक नए मुहावरे को जन्म दिया है- न सोऊंगा न सोने दूंगा। केंद्रीय सरकार की बागडोर संभालने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस प्रकार न खाऊंगा और पढ़ें....

फिलहाल तो दिन अच्छे नहीं हैं

दुनिया की नामी मार्केट रिसर्च कंपनी ‘न्यू वर्ल्ड वैल्थ’ की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि मुंबई में 28 अरबपति और 46 हजार करोड़पति हैं। महानगर की कुल संपदा 820 अरब डालर है यानी करीब 57 हजार अरब रुपए। अन्य महानगरों की खुशहाली भी इसके आसपास है। दिल्ली में और पढ़ें....

चुनौतियां कई मोर्चों पर

सिर पर मैला ढोने की कुप्रथा और खुले में शौच करने की परंपरा को खत्म करने के लिए मोदी सरकार ने घरों में शौचालय बनवाने के लिए जो व्यापक अभियान चलाया उसका सीमित असर ही सामने आया है। शहरों की स्लम बस्तियों और कस्बों में शौचालयों की कमी सबसे बड़ी और पढ़ें....

बुनियादी सुविधाओं का भी हाल बेहाल

बिजली, पानी, स्वास्थ्य व रोजगार जैसी बुनियादी सुविधाओं की तस्वीर भी ज्यादा उजली नहीं है। ताजे आंकड़े उपलब्ध कराने में सरकार ने कोई रूचि नहीं दिखाई है। 2011 में हुई जनगणना के आंकड़े ही बताते हैं कि 15 से 24 साल के बीस फीसद युवा बेरोजगार हैं। सबसे ज्यादा युवा और पढ़ें....

पाकिस्तान से ज्यादा बड़ा खतरा चीन!

पिछले महीने बीजिंग में हुई विदेश सचिव स्तर की बातचीत भी भारत-चीन रिश्तों में सुधार का कोई संकेत नहीं दे पाई। हालांकि सरकार का दावा है कि चीन से हुई ताजा रणनीतिक बातचीत रचनात्मक और सकारात्मक रही। दिक्कत यह है कि इस तरह की बातचीत में उन बिंदुओं पर ही और पढ़ें....

पचपन साल पुराना घाव

किसी सदमे या हादसे को भुलाने के लिए पचास साल का समय पर्याप्त माना जाना चाहिए। लेकिन 1962 में चीन ने छल करके भारत को जो घाव दिया था वह ऐसी पीड़ादायक और लगातार कटोचती रहने वाली मिसाल बन गई जिसे भुला पाना संभव नहीं है। उस युद्ध ने इतिहास और पढ़ें....

काश! पटेल की सलाह मान ली जाती

दो मौकों पर पटेल की सलाह को अनसुना किए जाने का ही यह नतीजा है कि कश्मीर समस्या नासूर बनी हुई है और भारत की 43 हजार वर्ग किलोमीटर से ज्यादा जमीन हड़पने के बाद भी चीन और भारतीय क्षेत्रों पर अपना हक जता कर लगातार आंखे तरेर रहा है। और पढ़ें....

वैदिक मान्यता में क्या मानव – सृष्टि काल?

संसार की सृष्टि और इस संसार में मानव सृष्टि की उत्पति के सम्बन्ध में जानने की उत्कंठा सृष्टि के प्रारम्भ से ही मनुष्य के मन में उठती रही है और आज भी यह हर मनुष्य के लिए कौतूहल और जिज्ञासा का विषय है। और प्रत्येक मनुष्य के मन में यह और पढ़ें....

जन्मस्थान पर राम मंदिर ही क्यों?

राजनाथ सिंह ‘सूर्य’ सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा रामजन्म भूमि विवाद को परस्पर मिल कर सुलझाने की सलाह दिए जाने के बाद जन्मभूमि मुक्ति समिति और बाबरी मस्जिद संघर्ष समिति तथा इस विवाद में स्पष्ट मत रखने वालों की जैसी प्रतिक्रिया हो रही है, उससे स्पष्ट है कि अदालत के और पढ़ें....

साफ-सुथरे चुनाव की चुनौती

चुनाव सुधार पुराना विषय है, लेकिन हाल के विधानसभा चुनावों के बाद इससे जुड़े कई नए सवाल उठे हैं। इस पर बीते 22 मार्च को राज्य सभा में विस्तृत बहस हुई। चुनाव किसी प्रातिनिधिक लोकतंत्र (representative democracy) का सर्व-प्रमुख पहलू है। प्रातिनिधिक लोकतंत्र में शासन निर्वाचित प्रतिनिधि चलाते हैं। उन्हें और पढ़ें....

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