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शब्द फिरै चहुं धार

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डोनाल्ड ट्रंप है वक्त का सत्य!

डोनाल्ड ट्रंप एक सत्य है और इसकी धुरी पर दो सत्य भिड़े हैं। एक का नाम ‘पोस्ट ट्रूथ’ है और दूसरा मेरे हिसाब से ‘रियल ट्रूथ’ है। मतलब एक ‘उत्तर सत्य और दूसरा ‘खांटी-कच्चा सत्य’! दुनिया के तमाम बौद्धिकजन 19वीं, 20वीं सदी के विकास की छाया में, उससे बनी बौद्धिकता, विचार और पढ़ें....

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ट्रंप, मोदी, केजरी और सत्य!

ज्ञानी-ध्यानी अमेरिका के हों, यूरोप के हों या दिल्ली के, सब इन दिनों राग पकड़े हुए हैं कि वक्त झूठ को सत्य बना रहा है और जनता में सत्य अप्रासंगिक हुआ है। बहुत गहरी बात है यह। इसी की चिंता में इन दिनों दुनिया दुबली हो रही है। इस बात और पढ़ें....

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हम सवा सौ करोड़ लोग हैं चोर!

यह बात अधिकृत तौर पर भारत सरकार के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट 2017-18 के अपने भाषण में उदाहरण सहित प्रमाणित की। पता नहीं किसी और देश में ऐसा हुआ या नहीं, पर भारत में मोदी सरकार ने दुनिया के आगे भारत की यह हकीकत दर्ज कराई है कि और पढ़ें....

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बिना माफी का अच्छा बजट!

और ऐसा होना उन लोगों को भड़काने वाला है जो 4 फरवरी से 8 मार्च के बीच वोट देने वाले है। इसलिए कि इनका दिल नोटबंदी से धड़का हुआ है। ये भी मेरी तरह नोटबंदी की प्रतिछाया में बजट बनता बूझ रहे थे। ये इस इंतजार में थे कि जब और पढ़ें....

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आज आम बजट, नोट बंटेगे!

भारत फिलहाल निठल्ला है। आर्थिकी का उसका उत्स जहां नोटबंदी से हरण हुआ पड़ा है वही गरीब, पीड़ित, दलित, वंचित सहित सभी सवा सौ करोड़ लोग ठहरे, ठिठके इंतजारी के उस मोड़ पर हंै जिसमें खैरात, धर्मादा, हरामखोरी, मुफ्तखोरी इसलिए अपेक्षित है क्योंकि नोटबंदी के बदले कुछ तो मिलना चाहिए! और पढ़ें....

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गण सूखा, तंत्र भूखा!

कभी आप किसी भी पार्टी का ताजा चुनावी घोषणापत्र देखें या नेताओं के भाषण सुने हर कोई लंगरखाना खोलने का वायदा करता मिलेगा। देश के सवा सौ करोड़ नागरिकों को सूखा ऐसा मारा है, पैसे और कामधंधों का टोटा ऐसा भारी है कि नेताओं के पास भरोसा देने, सूखे नागरिकों और पढ़ें....

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भारत में विचार खत्म, बुद्धि मंद!

लाख टके का सवाल है कि मीडिया के कोठाकरण की वजह क्या है? पहली वजह अंग्रेजीदां, सेकुलर-लेफ्ट के तुर्रम खां मीडियाकर्मियों का बिना रीढ़ के निकलना। यह साबित हुआ कि ये भी कायरता-गुलामी के हिंदू डीएनए के पर्याय हैं। दूसरा रोल सोशल मीडिया का समझ आता है। नरेंद्र मोदी और और पढ़ें....

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2016: भारत मूर्खता का वर्ष!

इसलिए कि दौड़ती-फुदकती आर्थिकी को झटके में बैठा देना विश्व इतिहास के पैमाने में एक राष्ट्र-राज्य का अपने पांव कुल्हाड़ी मारना है। दुनिया हैरान है। बौद्धिकता और आर्थिकी के वैश्विक थिंक टैंक के पैमाने पर एक राष्ट्र-राज्य के इस तरह अपने पांवों पर कुल्हाड़ी मारने को न तो तर्कसंगत समझा और पढ़ें....

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नकदी क्या चरस है?

हां, यही भारत में सरकार ने आज करा दिया है! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ऐसा मानते हंै! उनके प्रधानमंत्री दफ्तर ने इनकम टैक्स, पुलिस और ईडी को नकदी पकड़ने के लिए वैसे ही कहा हुआ है जैसे नॉरोकेटिक्स विभाग चरस, अफीम, ड्रग पकड़ता है। नकदी 3 लाख रु की हो या और पढ़ें....

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मोदीः सत्ता ख़ुमारी से उपजा राज-हठ

पंकज शर्मा -- यह पहला मौक़ा है, जब किसी प्रधानमंत्री की ज़िद ने संसद के एक पूरे सत्र को इस तरह गर्द-टोकरी के हवाले किया हो। यह पहला मौक़ा है, जब किसी प्रधानमंत्री ने समूचे विपक्ष को इस तरह ठेंगे पर रखा हो। यह पहला मौक़ा है, जब पूरा मुल्क़ अपने और पढ़ें....

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