ताजा पोस्ट सुर्खिया
  • कांग्रेस के 40 स्टार प्रचारक करेंगे यूपी में प्रचार
  • हैती में हैजा राहत के लिए भारत ने दिए एक लाख डॉलर
  • पटना : बेउर जेल में छापेमारी, आपत्तिजनक सामान बरामद
  • शेयर बाजार में तेजी का रुख
  • अमेरिकी सीनेट ने दी विदेश मंत्री के रूप में टिलरसन को मंजूरी
  • बाढ़ के बाद ताहिति हवाईअड्डा खुला
  • टीपीपी समझौते से हटा अमेरिका
  • साहित्य महोत्सव में तस्लीमा, मुस्लिम नाराज
  • सपा की तीसरी लिस्ट में अपर्णा यादव
  • डब्ल्यूएचओः बर्ड फ्लू को लेकर चिंता
  • केजरीवाल बोले, बनाए मुझे ब्रांड एंबेसडर
  • भैंसा दौड़ कराने के पक्ष में सिद्धरमैया
  • कोहरे से लंदन में 100 उड़ानें रद्द
  • सीरिया: तुर्की का हमला,65 आतंकी ढेर
  • मणिपुर: भाजपा की जारी उम्मीदवार लिस्ट

समाचार विश्लेषण

congress

पंजाब में कांग्रेस का भविष्य दांव पर

सबसे बड़ा दांव संभवतः कांग्रेस का है। 2012 के पहले पंजाब में हर पांच साल पर सत्ता बदलने की परंपरा थी। इसलिए पांच साल पहले अनुमान था कि इस बार कांग्रेस की बारी है। हालांकि कांग्रेस ने अपना वोट प्रतिशत कमोबेश बनाए रखा, लेकिन वह चुनाव नहीं जीत पाई। सिर्फ और पढ़ें....

INDIA-VOTE

पंजाब में कड़ा त्रिकोणीय मुकाबला

पंजाब में इस बार विधानसभा चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला है। राज्य के इतिहास में ऐसा पहली बार है, जब अकाली दल और कांग्रेस के अलावा कोई मजबूत ताकत मैदान में है। 2014 के लोक सभा चुनाव नतीजों को विधान सभा सीटों के हिसाब से देखें तो बढ़त की स्थिति निम्नलिखित और पढ़ें....

akhilesh

यादव परिवार का कैसा समाजवाद!

समाजवादी पार्टी का हालिया झगड़ा परिवार के अंदर की खींचतान और सत्ता के लिए कथित साजिशों का परिणाम बताया गया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में इसे मुलायम सिंह की छोटी बहू अपर्णा यादव की राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा और उसे स्वीकार करने में अखिलेश की अनिच्छा का परिणाम बताया गया है। तो और पढ़ें....

akhilesh

छलावा है अखिलेश के विकास का दावा?

ज्यां द्रेज और रितिका खेड़ा ने 2014 में पब्लिक इवैल्यूशन ऑफ इनटाइटलमेंट प्रोग्राम्स सर्वे रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसमें 10 राज्यों में पांच योजनाओं- आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, पीडीएस, मनरेगा और सामाजिक सुरक्षा पेंशन कार्यक्रम- पर अमल की स्थिति जायजा लिया गया। सर्वेक्षणकर्ता इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि उप्र उन राज्यों और पढ़ें....

akhilesh-yadav-1

कितना समाजवादी रहा अखिलेश का शासन

उत्तर प्रदेश के विधान सभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का भविष्य दांव पर है। मगर जानकारों की राय में वहां समाजवादी राजनीति भी कसौटी पर चढ़ी है। इस सिलसिले में यह सवाल भी उठा है कि समाजवादी पार्टी में आखिर “समाजवादी” क्या है? समाजवाद का एक खास अर्थ होता है। और पढ़ें....

Images of Indian farmers, agriculture, agricultural fields, vegetable farming, fruit, harvesting activity.

बीज और कृषि बाजार पर एकाधिकार

औद्योगिक कृषि को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ती जा रही है। जानकारों के मुताबिक इससे न सिर्फ जैव-विविधता, बल्कि कृषि-विविधता भी खतरे में है। एक शोध से पता चला है कि दुनिया भर में खाने की सप्लाई कुछ कंपनियों तक सीमित होती जा रही है। हाइनरिष ब्योल फाउंडेशन, रोजा-लक्जेमबर्ग और पढ़ें....

supreme-court

कठघरे में एसईजेड के भू-अधिग्रहण

सुप्रीम कोर्ट ने पिछल हफ्ते विशेष आर्थिक क्षेत्रों यानी एसईजेड योजना के तहत ली गई जमीनों के बारे में सात राज्यों से जवाब तलब किया। कोर्ट ने पूछा है कि उद्योग बसाने के लिए खरीदी गई जमीन बेकार क्यों पड़ी है। कोर्ट ने एसईजेड के फायदों पर उठते सवालों और और पढ़ें....

GOP 2016 Debate

रूस के पास है ट्रंप का कच्चा चिट्ठा?

निर्वाचित राष्ट्रपति के रूप में डोनल्ड ट्रंप की मीडिया से पहली मुलाकात ही विवादास्पद रही। इससे उनके शासनकाल में टकराव का माहौल बने रहने की आशंका गहरी हुई है। ट्रंप के सामने मुद्दा रूस की हैकिंग का था। लेकिन इसके लिए उन्होंने अपने देश की ही ख़ुफ़िया एजेंसियों को जिम्मेदार और पढ़ें....

finland

फिनलैंड में बेसिक सैलरी का अनोखा प्रयोग

फिनलैंड में एक महत्त्वपूर्ण प्रयोग हो रहा है, जिस पर दुनिया भर की निगाहें हैं। ये प्रयोग सबको बेसिक सैलरी- यानी हर महीने एक न्यूनतम रकम देने का है। इस प्रयोग की वजह अर्थव्यवस्था का नया स्वरूप है। इसमें डिजिटल होते उद्योग में लोगों की जगह मशीनों से ज्यादा काम और पढ़ें....

The Supreme Court of India in New Delhi on Sept 1, 2014. The government Monday told the Supreme Court that they stood by its verdict holding allocation of coal blocks since 1993 as illegal, and was ready to auction these blocks if they are cancelled but s

जाहिर हुआ दो दृष्टिकोणों का टकराव

सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले से मुद्दा यह उठा है कि क्या लोकतंत्र को समाज की वास्तविक संरचना और माहौल से अलग करके देखा जाना चाहिए? धारा 123 (3) के संबंधित अहम सवाल यह उठता है कि इसके जरिए संसद आखिर क्या हासिल करना चाहती थी? वह महज धर्म, और पढ़ें....

© 2016 nayaindia digital pvt.ltd.
Maintained by Netleon Technologies Pvt Ltd