पार्षदी के लिए प्रतीक्षा की रात

कल नामांकन पत्र दाखिल करने की आखिरी तारीख है और प्रदेश के दोनों ही प्रमुख दलों भाजपा और कांग्रेस ने शहरों में पार्षद के प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं की है।

पंचायतों में प्रचार शुरू शहरों में टिकट की टकटकी

प्रदेश में होने जा रहे हैं त्रिस्तरीय पंचायती राज के चुनाव के लिए जहां नामांकन पत्र वापस लेने की आखिरी तारीख निकल जाने के बाद आज से प्रचार शुरू होगा।

पंचायती राज नगरीय निकाय चुनाव: उम्मीदों के उम्मीदवार

पंचायती राज चुनाव में जहां अगर पार्टी के चुनाव चिन्ह के होना है वहीं नगरीय निकाय के चुनाव पार्टियों के चिन्ह पर होने जा रहे हैं।

माहौल बनाने नड्डा ने दिए मंत्र

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार प्रदेश आए जेपी नड्डा ने राजधानी भोपाल से लेकर संस्कारधानी जबलपुर तक प्रदेश में पार्टी का माहौल बनाने कार्यकर्ताओं को साहित्य करने के नए-नए मंत्र दिए।

नगर निकाय चुनाव: नगर सरकार के लिए भी अगर मगर शुरू

प्रदेश में नगरी निकाय के चुनाव के लिए भी तारीखों का ऐलान हो गया है इसी के साथ ही टिकट के दावेदारों उन्हें पार्टी दफ्तरों में दस्तक देना शुरू कर दिया है

मप्र राज्यसभा चुनाव: समीकरणों की कविता-तन्खा तय तीसरा कौन

मध्यप्रदेश में राज्यसभा की 3 सीटों के लिए चुनाव हो रहे हैं जिनमें से दो भाजपा के खाते में जाएंगे और एक कांग्रेस के खाते में जाना है कल 31 मई को नामांकन पत्र दाखिल करने का आखरी दिन है

नहीं सुधरे तो सर्वे से कटेंगे टिकट

प्रदेश में 2023 में होने वाले विधानसभा के आम चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो गई है और त्रिस्तरीय पंचायती राज एवं नगरीय निकाय चुनाव को सेमीफाइनल माना जा रहा है

सामाजिक समरसता का मिसाल बना कन्या विवाह

संपूर्ण गीता का निचोड़ यही है कि किया हुआ व्यर्थ जाता नहीं और किए बिना कुछ मिलता नहीं। अच्छा करोगे तो अच्छा मिलेगा और बुरा करोगे तो बुरा मिलेगा।

पिछड़ों के आरक्षण पर विजेता की मुद्रा में भाजपा

भाजपा ने अंतिम प्रयास करके 14% आरक्षण के साथ चुनाव कराने की स्थिति बनवा ली और विजेता की मुद्रा में पार्टी उत्सव मना रही है

क्राइटेरिया तय करने के लिए कसरत

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर, ज्योतिरादित्य सिंधिया और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा विशेष रूप से उपस्थित थे।

बदलाव की बयार में कितना बदलेगा प्रदेश

देश की दो प्रमुख पार्टियां भाजपा और कांग्रेस मैं कहीं ना कहीं बदलाव की बयार चल रही है इसमें मिशन 2023 और 2024 की रणनीति समाई हुई है

मुश्किलों से निकलने उदयपुर से उत्तर की प्रतीक्षा में कांग्रेस

कभी देश की सबसे बड़ी पार्टी रही कांग्रेस इस समय सर्वाधिक मुश्किलों के दौर से गुजर रही है शुक्रवार से उदयपुर में कांग्रेस का चिंतन शिविर शुरू हुआ है।

जाति बनी जी का जंजाल

राजनीतिक दलों ने एक तरफ जहां ओबीसी के पक्ष में खड़े होने की रणनीति अपनाई है तो वहीं दूसरी ओर बगैर ओबीसी आरक्षण के ही होने वाले चुनाव की तैयारियां भी शुरू कर दी हैI

सनातन धर्म के उद्धारक आदि शंकराचार्य

प्राचीनकालीन देवी पूजा से जुड़ी शाक्त संप्रदाय पांच मकारों अर्थात मत्स्य, मांस, मद्य, मुद्रा (नृत्य) और मैथुन में विश्वास करता था।

उपलब्धियों को ऊंचाईयां और खामियों की खिलाफत का द्वार

भोपाल। प्रदेश में मिशन 2023 की तैयारियों में जुटे दोनों ही प्रमुख दल भाजपा और कांग्रेस ने अपने -अपने एजेंडे पर तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं। भाजपा ने जहां उपलब्धियों को ऊंचाइयां देने की कोशिश शुरू कर दी है वहीं कांग्रेस ने भी सरकार की खामियों की खिलाफत करने के लिए कमर कस ली है। दरअसल, चुनाव के लिए वैसे तो 15 महीने से ज्यादा है लेकिन दोनों दलों की चुनावी तैयारियों को लेकर बेताबी इतनी है कि अभी से मुद्दों को धार देना शुरू कर दिया है। लगातार सत्ता में रहते हुए भाजपा ने लगभग हर क्षेत्र मैं सामाजिक सरोकारों से जुड़ी योजनाओं का क्रियान्वयन किया और इसी का परिणाम है कि सरकार के खिलाफ निर्णायक एंटी इनकंबेंसी नहीं बन पाई 2003 के बाद केवल 2018 में महज कुछ सीटों से भाजपा सरकार बनाने से रह गई तब भी वोट प्रतिशत कांग्रेस से ज्यादा था। यही कारण है कि भाजपा अब नई योजनाओं को लागू करने की बजाय उन योजनाओं की रीलॉन्चिंग कर रही है जिनके कारण उसे सफलता मिलती रही है कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना को जोर – शोर से पुनः प्रारंभ करने के बाद अब भाजपा सरकार 8 मई को लाड़ली लक्ष्मी योजना… Continue reading उपलब्धियों को ऊंचाईयां और खामियों की खिलाफत का द्वार

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