शंकर शरण All Article

संगठन को सुबुद्धि से जोड़ें

राजनीति में केवल नीयत से कुछ नहीं होता। महात्मा गाँधी की नीयत बहुत अच्छी थी! पर उन के कदमों से देश बँटा, लाखों निरीह लोग बेमौत मरे और एक स्थायी दुश्मन नया पड़ोसी देश बन गया। और पढ़ें....

हिन्दू जोड़ो या तोड़ो? (भाजपा का दिग्भ्रम)

‘देवालय से ज्यादा जरूरी शौचालय है’, ‘‘आर्थिक विकास सारी समस्याओं का समाधान है’’ जैसे गहन विचार तथा ‘कांग्रेस-मुक्त भारत’ जैसा लक्ष्य रखने वाले नेता अब इन बातों को नहीं दुहरा रहे। और पढ़ें....

लक्ष्मी-पूजन और सार्थक जीवन

लक्ष्मी को धन का पर्याय मान लिया जाता है। किन्तु धन से कुबेर भी जुड़ा है। कुबेर, अर्थात ‘कुत्सित शरीर वाला’, राक्षसराज रावण का भाई। धन का पर्याय होकर भी कुबेर पूजा भारतीय परंपरा में कहीं नहीं। और पढ़ें....

शक्ति और ज्ञान, दोनों की आराधना जरूरी

श्री अरविन्द ने सौ साल पहले ही कहा था कि भारत की सब से बड़ी समस्या विदेशी शासन नहीं है। गरीबी भी नहीं है। सब से बड़ी समस्या है – सोचने-समझने की शक्ति का ह्रास! इसे उन्होंने ‘चिंतन-फोबिया’ कहा था। और पढ़ें....

नेहरू के बाद फिर नेहरू ही!

सर वी. एस. नायपॉल को 2001 (साहित्य) में तथा अमर्त्य सेन को 1998 (अर्थशास्त्र) में नोबेल पुरस्कार मिला था। उस दौरान यहाँ वाजपेई नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी सरकार थी। सेन हिन्दू-विरोधी वामपंथी थे जबकि नायपॉल गहरे हिन्दू-समर्थक और स्वतंत्रचेता थे। और पढ़ें....

हिन्दू हाथ में इस्लाम की तलवार

बादशाह अकबर के समय मुहावरा शुरू हुआ: ‘हिन्दू हाथों में इस्लाम की तलवार’। तब जब अकबर ने राजपूतों से समझौता कर अपने साम्राज्य के बड़े पदों पर रखना शुरू किया। और पढ़ें....

पतित हिन्दुओं का क्या करें!

संत तुलसीदास ने लिखा है: ‘कीन्ह मोह बस द्रोह जद्दपि तेहि कर बध उचित।’ यह इन्द्र पुत्र जयंत के लिए था जिस ने एक बार कौए का वेश धर सीताजी के पैर में चोंच मार घायल कर दिया। और पढ़ें....

जनता को भी कुछ करना चाहिए!

रोहिंग्या जैसे विदेशी घुसपैठिए हजारों की संख्या में भारत में घुस जहाँ-तहाँ बस रहे हैं। अखबारों में उन की फोटो तथा गतिविधियों की खबरें आती रही है। उन से देश की आंतरिक सुरक्षा को खतरा है। और पढ़ें....

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शंकर शरण

शंकर शरण

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