शंकर शरण All Article

2003 व 2018 की भाजपाः समानता व फर्क

पिछली बार केंद्र की राजग सरकार के अंतिम वर्ष में भाजपा समर्थक बौद्धिकों में दो समूह आपस में वाद-विवाद कर रहे थे। कुछ लोग निराश थे कि राष्ट्रीय, हिन्दू हित संबंधी जो आशाएं की गई थीं, वे पूरी न हुईं। और पढ़ें....

सब गाँधी क्यों बनना चाहते हैं?

वरिष्ठ पत्रकार दीनानाथ मिश्र कहते थे कि बड़े-बड़े हिन्दू राष्ट्रवादियों को पता नहीं कि इस्लाम क्या है? मगर वे ‘सभी धर्म समान हैं’, धर्म-ग्रंथ कहलाती सभी किताबों में एक ही बात है, आदि दुहराते रहते हैं। और पढ़ें....

पतन बाद तो सोचो वामपंथियों!

त्रिपुरा में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की हार एक अर्थ में वक्त की मार है। बंगाल और केरल में माकपा के माथे बड़े-बड़े पाप हैं, जो त्रिपुरा में नगण्य था। और पढ़ें....

सऊदी हवा में बदलाव

जिन्होंने प्रसिद्ध फिल्म ‘साउंड ऑफ म्यूजिक’ (1965) देखी हो, वे जूली एन्ड्रयूज की भूमिका भूल नहीं सकते। बंद कान्वेंट में रहने वाली युवा नन को संयोगवश एक परिवार के बच्चों के साथ रहने का अवसर मिलता है। और पढ़ें....

गाय और राजनीति

अभी जब डॉ. सुब्रहमण्यम स्वामी ने देश में गोहत्या बन्द कराने के लिए कानून बनाने का प्रस्ताव संसद में रखा, तो दिल्ली के एक बड़े अंग्रेजी अखबार ने कार्टून छापा। उस में मजाक था कि ‘हार्वर्ड विश्वविद्यालय से प्रशिक्षित डॉ. स्वामी ने गोरक्षा का बिल विचार के लिए और पढ़ें....

सोचें, अरुण शौरी की चिन्ता में क्या गलत?

अरुण शौरी की बातें अब बहुतेरे राष्ट्रवादियों, हिन्दूवादियों को पसंद नहीं आ रही। कारण दलीय पक्षधरता और राष्ट्रीय हितों का घाल-मेल हो जाना है। अन्यथा, भारतीय दर्शन तो ‘निन्दक नियरे राखिए ...’ को हितकारी बताता है। और पढ़ें....

सोचे जरा सांस्कृतिक गरीबी पर

ईरानी राष्ट्रपति हसन रुहानी के अनुसार पूरी दुनिया में हिंसा, आतंक और हत्याओं की 84 प्रतिशत घटनाएं मुस्लिम समाजों में हो रही है। उन्होंने नोट किया कि आज दुनिया में इस्लाम हत्या, हिंसा, कोड़े, अपहरण-फिरौती और अन्याय का प्रतीक बन गया है। और पढ़ें....

गंगा की चिन्ता कैसे और क्या अर्थ ?

नेता लोग चुनाव जीतने के लिए कटिबद्धता से हर उपाय करते हैं। उसी तरह अफसर पोस्टिंग या तरक्की के लिए हर बाधा दूर करने का मार्ग खोजते हैं। अधिक से अधिक टैक्स वसूलने, खजाना बढ़ाने के लिए सरकार एक से एक तरीके निकालती है। और पढ़ें....

टैगोर नहीं, तैमूर

हाल में फिल्म एक्टर सैफ अली खान के बेटे तैमूर की पहली सालगिरह थी। कई हस्तियो ने ‘तैमूर’ को बधाई दी। जब यह नामकरण हुआ था, तो भारत, पाकिस्तान, बंगलादेश में चर्चित हुआ। और पढ़ें....

गालिब, श्रद्धानन्द, हनुमान प्रसाद पोद्दार...

गालिब ने लिखा था: गालिबे-खस्ता के बगैर कौन से काम बन्द हैं ; रोइए जार-जार क्यों... ! उन्होंने इसे प्रश्न रूप में नहीं, किंचित दार्शनिक, स्थिति-स्वीकार भाव से लिखा था। और पढ़ें....

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