शंकर शरण All Article

कांग्रेस महापुरुष टीपू सुलतान!

टीपू सुलतान का जन्मोत्सव मनाकर कर्नाटक के सत्ताधारी कांग्रेसी जान-बूझ कर सांप्रदायिक ध्रुवीकरण कर रहे हैं। ताकि कांग्रेस की मुस्लिम-परस्त छवि उभरे। और पढ़ें....

कब्र राष्ट्रीय पहचान नहीं होती!

योगी आदित्यनाथ या संगीत सोम को ताजमहल की अवमानना करने का दोषी बताना मूर्खता है। किसी देश में कोई कब्र राष्ट्रीय पहचान नहीं है। चाहे कब्र किसी पैगंबर की भी क्यों न हो। और पढ़ें....

भाजपा, कांग्रेस और पुराना दुहराव

लेव टॉल्सटॉय ने अपने महान उपन्यास ‘युद्ध और शांति’ में सन् 1812 में नेपोलियन और कुतुजोव की सेनाओं की लड़ाई का भी विस्तृत चित्रण किया है। उस में टॉल्सटॉय ने एक रोचक बात पाई कि दोनों तरफ सेनापतियों ने ऐसी रणनीतियाँ भी बनाई और पढ़ें....

राहुल गांधी पर न हंसे!

राहुल गाँधी पर हँसना असंख्य लोगों का शगल हो गया है। पर किसी पर ज्यादा हँसने से उसे सहानुभूति भी मिलती है। फिर, पिछले सौ साल से यहाँ राजनीति योग्यता से कम, किसी न किसी की कृपादृष्टि और खानदानी तरीके से अधिक चली है। और पढ़ें....

ट्यूनीसिया में सुधार

अरब देश ट्यूनीसिया में मुस्लिम स्त्रियों को गैर-मुस्लिमों से विवाह की अनुमति दे दी गई है। पहले इस के लिए गैर-मुस्लिम पुरुष को मुसलमान बनाना जरूरी होता था। लेकिन अब वहाँ मुस्लिम और गैर-मुस्लिम अपने-अपने धर्म में रहते हुए दंपति बन सकते हैं। और पढ़ें....

भाजपा की राजनीतिक विफलता

दलीय सफलता और सामाजिक-राजनीतिक सफलता में मौलिक अंतर है। इसे बड़े-बड़े भाजपा नेताओं की तुलना सैयद शहाबुद्दीन, मोहित सेन जैसे मामूली नेताओं से करके समझ सकते हैं।  और पढ़ें....

‘दल से बड़ा देश’ - सचमुच?

एक बार अटल बिहारी वाजपेई ने कहा था कि सत्ता में बने रहने की कला मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से सीखनी चाहिए। वरिष्ठतम राष्ट्रीय नेता होने से वे बखूबी जानते थे कि माकपा ने बंगाल की सत्ता कैसे बनाए रखी थी। और पढ़ें....

क्या भाजपा नेता असाधारण रहे हैं?

भाजपा द्वारा सरकारी धन से राजकीय संस्थानों, भवनों, सड़कों, स्टेडियम, योजनाओं, आदि पर अपने नेताओं के नाम थोपने की आलोचना से कुछ पाठक असहमत हैं। अतः यह कैफियत।  और पढ़ें....

कन्नड़ को किस से चोट पहुँची?

हाल में कर्नाटक में कुछ कन्नड़-प्रमियों ने हिन्दी में लिखे नाम मिटाकर अपना क्रोध दिखाया। यह ऐसा ही है, जैसे किसी को दफ्तर में अफसर से नाहक डाँट पड़े तो वह घर आकर अपने बच्चे की पिटाई कर दे। और पढ़ें....

आजाद भारत में गड़बड़ी कहां हुई?

भारतीय संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने 26 नवंबर 1949 को संविधान स्वीकार करने के अवसर पर दो पछतावे व्यक्त किए थे। कि सभा को दो कार्य करने चाहिए थे जो नहीं हो सके। और पढ़ें....

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