शंकर शरण All Article

अरूण शौरी का मोर्चा

कहते हैं राजा को किसी ब्राह्मण का अपमान नहीं करना चाहिए। एक बार जब पाटलिपुत्र के शासक घनानन्द ने विद्वान विष्णुगुप्त का अपमान किया तो विष्णुगुप्त ने घनानंद को सत्ता से हटाने का प्रण कर लिया। और पढ़ें....

न्यायालय में कुरान

इधर आस्ट्रिया की संसद ने अपने देश में कुरान का वितरण प्रतिबंधित कर दिया है। स्विट्जरलैंड में भी इस पर विचार हो रहा है। चीन में बच्चों के नाम कुरान, इस्लाम, जिहाद, आदि रखने पर पाबंदी है। निस्संदेह, इस देशों की सतर्कता का कोई उचित कारण होगा। इस के विपरीत यहाँ और पढ़ें....

मुस्लिम सोचे-4ः मशाल खान की हत्या

पाकिस्तान के अब्दुल वली खान विश्वविद्यालय, मरदान में पत्रकारिता के एक छात्र मशाल खान को अन्य छात्रों ने इसलिए मार डाला, क्योंकि उस पर ‘सेक्यूलर’ और ‘लिबरल’ होने का संदेह था। क्योंकि वह शुक्रवार को मस्जिद जाकर नमाज नहीं पढ़ता था। बस, इस संदेह और अपराध में दर्जनों मुस्लिम छात्रों और पढ़ें....

सच्चे सपूत की देश में जीरो कद्र!

दिल्ली में 9 सितंबर 2006 को एक पुस्तक विमोचन में मैंने पहली बार कँवरपाल सिंह गिल को सुना था। कार्यक्रम रोचक होना था, क्योंकि पुस्तक, उस के विमोचक और कार्यक्रम के अध्यक्ष तीनों के प्रति तब आम बौद्धिक आकर्षण था। पुस्तक थी कृष्ण काक और राधा राजन की ‘एनजीओज, एक्टिविस्ट्स और पढ़ें....

मुस्लिम सोचे-3- आदर्श क्या पाकिस्तान, सऊदी अरब हैं?

अभी-अभी पाकिस्तान से छुड़ा कर लाई गई युवती उज्मा अहमद ने भारत पहुँचते ही यहाँ की मिट्टी को माथे से लगाया और कहा कि पाकिस्तान ‘मौत का कुँआ’ है। यह वही पाकिस्तान है, जिसे यहाँ के इस्लामी विद्वान अपना आदर्श बताते थे। कहते थे कि यहाँ के मुसलमान पाकिस्तान की और पढ़ें....

बी. बी. कुमार पर यह बौद्धिक दुराग्रह

हाल में डॉ. बी. बी. कुमार को भारतीय सामाजिक विज्ञान शोध परिषद (आई.सी.एस.एस.आर.) का अध्यक्ष बनाया गया। डॉ. कुमार पूर्वोत्तर भारत के मामलों के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने दो दशक से भी अधिक समय नागालैंड में कॉलेज अध्यापन किया है। पूर्वोत्तर भारत की चालीस भाषाओं के हिन्दी-अंग्रेजी कोश प्रकाशित किए हैं। और पढ़ें....

मुस्लिम सोचे-2ः धर्म की आलोचना

अभी तसलीमा नसरीन ने कहा कि “जब गैर-मुस्लिम अपने धर्म की आलोचना करते हैं तो उन्हें बुद्धिजीवी कहा जाता है। जब मुस्लिम अपने धर्म की आलोचना करते हैं तो उन्हें इस्लाम का दुश्मन, यहूदी, रॉ का एजेंट सहित जाने क्या-क्या कहा जाता है।” क्या इस पर मुसलमानों को सोचना नहीं चाहिए? और पढ़ें....

मुस्लिम सोचे-1 - स्त्रियों का संघर्ष

सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक व हलाला की वैधानिकता पर सुनवाई शुरू कर दी है। कुछ इस्लामी नेता इस बहाने मुसलमानों को हिन्दू राष्ट्र के भूत से बरगला रहे हैं। जबकि तीन तलाक जैसे रिवाज के रहने या जाने से हिन्दू हितों का कोई लेना-देना नहीं है। ये रिवाज केवल और पढ़ें....

हिंदू-मुस्लिम फर्क पर टैगोर

पिछले बीस वर्षों में भारतीय राजनीति में कुछ परिवर्तन आया है। उस से कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर की एक सीख का स्मरण होता है। टैगोर राजनीति से दूर थे, इसीलिए ऐसी सच्चाइयों को व्यक्त करने में समर्थ थे जो राजनीतिज्ञ नहीं करते। 1920-21 के खलीफत आंदोलन के समय महात्मा गाँधी ने एक और पढ़ें....

बात-चीत से अयोध्या समाधान?

1990 की गर्मियों की घटना है। दिल्ली के हिमाचल भवन में दो पुस्तकों का विमोचन थाः ‘रामजन्म-भूमि वर्सेस बाबरी मस्जिदः ए केस स्टडी ऑफ हिन्दू-मुस्लिम कन्फ्लिक्ट’ (कोएनराड एल्स्ट) तथा ‘हिन्दू टेम्पल्सः ह्वाट हैपेन्ड टु देम’(सीताराम गोयल)। इस विषय पर हिन्दू पक्ष की यह पहली व्यवस्थित प्रस्तुति थी। तब तक मार्क्सवादी और पढ़ें....

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शंकर शरण

शंकर शरण

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