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छोटे तेल, गैस क्षेत्रों की नीलामी के दूसरे दौर की शुरुआत

नयी दिल्ली। भारत ने आज खोज किये जा चुके 25 तेल एवं गैस फील्ड को नीलामी के लिये रखा। इसमें एक लाख करोड़ रुपये का संसाधन होने का अनुमान है। इस कदम से उन क्षेत्रों से उत्पादन में तेजी की उम्मीद है जो वर्षों से निष्क्रिय पड़ा रहा है। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने खोजे गये छोटे फील्डों (डीएसएफ) के दूसरे दौर की नीलामी की शुरूआत करते हुए कहा कि सरकार इन फील्डों से उनके जीवनकाल में रायल्टी, कर और पेट्रोलियम लाभ के रूप में 45,000 करोड़ रुपये की उम्मीद कर रही है।

कुल 59 खोज को 25 अनुबंध क्षेत्रों में रखा गया गया है। ये 3,042 वर्ग किलोमीटर और आठ अवसादी बेसिन क्षेत्रों में फैले है। बोली की आखिरी तारीख 18 दिसंबर है और इसे जनवरी 2019 में आबंटित किये जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘‘डीएसएफ-1 दौर में 34,600 करोड़ रुपये के संसाधन के लिये बोलियां मंगायी गयी। डीएसएफ दो में जिन फील्डों की पेशकश की गयी है, उसमें एक लाख करोड़ रुपये का संसाधन है।’’ 

खोजे गये इन छोटे फील्ड के लिये पिछले साल पहले दौर की नीलामी में रखे गये कुल 46 ब्लाक में से 34 ब्लाक के लिये 134 बोलियां प्राप्त हुई थी। प्रधान ने कहा कि सरकार डीएसएफ-1 में बोली के लिये रखे गये फील्डों से 9,000 करोड़ रुपये के राजस्व की उम्मीद कर रही है। इनसे तेल 2020 में मिलने की उम्मीद है। डीएसएफ-2 85,000 रोजगार भी सृजित करेगा।

सरकार की 26 अनुबंध क्षेत्रों में रखे गये कुल 60 खोजे गये क्षेत्रों के लिये बोली आमंत्रित करने की योजना थी लेकिन इसे बाद में घटाकर 25 अनुबंध क्षेत्रों में रखे गये 59 क्षेत्र किया गया। हालांकि इसका कोई कारण नहीं बताया गया। ये क्षेत्र राजस्थान, गुजरात, कच्छ और कैम्बे के उथले जल क्षेत्र, मुंबई अपतटीय, असम और त्रिपुरा तथा महानदी उथले जल क्षेत्र, आंध्र प्रदेश तथा केजी बेसिन में स्थित है।

हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय के महानिदेशक वी पी जॉय ने कहा कि डीएसएफ-दो में परंपरागत और गैर-परंपरागत हाइड्रोकार्बन के लिये एकल लाइसेंस, तकनीकी अनुभव की पूर्व शर्त को हटाना, पूर्ण कीमत तथा विपणन की आजादी जैसी मुख्य विशेषताएं हैं। साथ ही डीएसएफ-1 के मुकाबले अपतटीय रायल्टी दर 10 प्रतिशत से घटाकर 7.5 प्रतिशत किया गया है। सरकार 2016 में नई डीएसएफ पालिसी लायी थी। इसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र की आयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन (ओएनजीसी) तथा आयल इंडिया लि. (ओआईएल) के निष्क्रिय पड़े छोटे खोजे गये फील्डों की नीलामी उदार शर्तों पर की जा रही हैं।

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