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भारत से खरीद का आश्‍वासन चाहती हैं रूसी कंपनियां

मॉस्को। भारत को रूसी कंपनियों को यह भरोसा देना चाहिए कि वह उनके भारत में बने कलपुर्जे की खरीदारी करेगा और किसी तीसरे देश से सस्ते कलपुर्जे नहीं खरीदेगा।

एक रूसी अधिकारी ने कहा कि भारत को यह भरोसा दिलाना होगा कि वह रूस से महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों की खरीद में देरी की सैन्य बलों की शिकायतों को दूर करने के लिए तीसरे देश से खरीद नहीं करेगा।

रूस के रक्षा और उद्योग क्षेत्र के सरकारी समूह रोसटेक के निदेशक :अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं क्षेत्रीय नीति: विक्टर एन क्लादोव ने कहा कि रूस ने भारत में तकनीकी सेवा केंद्र बनाने की रणनीति बनाई है, जो विशेष उपकरणों पर केंद्रित है।

उन्होंने कहा कि भारत ने सोवियत संघ और रूस में बने रक्षा उपकरणों की बडी संख्या में खरीद की है। इनमें से ज्यादातर उपकरणों के आधुनिकीकरण, उन्नयन और मरम्मत की जरूरत है, जो भारत में किया जा सकता है।

क्लादोव ने कहा, इस समस्या का हल अपने भागीदारों के साथ सुविधाएं स्थापित कर किया जा सकता है। हमें भारतीय पक्ष से यह भी आश्‍वासन चाहिए कि उनके उत्पादों का इस्तेमाल अंतिम उपभोक्ता द्वारा किया जाएगा। भारतीय सैन्य बलों की लंबे समय से शिकायत रही है कि रूस से महत्वपूर्ण कलपुजरें और उपकरणों की आपूर्ति में लंबा समय लगता है, जिससे रखरखाव प्रभावित होता है। इसे एक जटिल मुद्दा बताते हुए क्लादोव ने कहा कि रोसटेक, भारतीय रक्षा मंत्रालय के साथ इस समस्या के हल के लिए सहयोग कर रही है।

 

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