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एयरटेल, वोडाफोन एजीआर बकाया का खुलासा करे

नई दिल्ली। भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया लि. द्वारा समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) के बकाये का आकलन दूरसंचार विभाग के अनुमान से आधा भी नहीं है।

ऐसे में एक विश्लेषक की रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों दूरसंचार कंपनियों को यह बताना चाहिए कि उनकी इस गणना का तरीका क्या है। अल्पांश शेयरधारकों को एजीआर बकाया के अंतर की वजह जानने का अधिकार है।

उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल अक्टूबर में व्यवस्था दी थी कि स्पेक्ट्रम शुल्क और लाइसेंस शुल्क की गणना में गैर दूरसंचार राजस्व को भी शामिल किया जाना चाहिए। इस आधार पर दूरसंचार विभाग ने भारती एयरटेल से 35,000 करोड़ रुपये का एजीआर बकाया चुकाने को कहा है। वहीं एयरटेल ने एजीआर बकाये का खुद जो आकलन किया है उसके हिसाब से यह राशि 13,004 करोड़ रुपये बैठती है। इसी तरह वोडाफोन आइडिया के मामले में दूरसंचार विभाग ने 53,000 करोड़ रुपये का बकाया बनाया है।

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वहीं कंपनी के खुद के आकलन के अनुसार उस पर 21,533 करोड़ रुपये का बकाया है। कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज की 9 मार्च को जारी रिपोर्ट में कहा गया है, यह मामला अभी न्यायालय में है। हमारा मानना है कि एक बार कानूनी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद एयरटेल और वोडाफोन आइडिया दोनों को स्व आकलन का तरीका बताना चाहिए। उन्हें यह खुलासा करना चाहिए कि किन चीजों की वजह से उनके और दूरसंचार विभाग के आकलन में इतना भारी अंतर आया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यह खुलासा सांविधिक रूप से करना अनिवार्य नहीं है, लेकिन हमारा मत है कि अल्पांश शेयरधारकों को इसके बारे में जानने का अधिकार है। वोडाफोन आइडिया ने अब तक स्व आकलन के आधार पर निकाले गए बकाये में 3,500 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। वहीं भारती एयरटेल अब तक सरकार को 13,004 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुकी है।

इसके अलावा उसने मिलान में अंतर की भरपाई के लिए तदर्थ रूप से 5,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया है। इसी तरह टाटा टेलीसर्विसेज ने 2,197 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। किसी तरह के अंतर को पूरा करने के लिए कंपनी ने 2,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त जमा कराए हैं। वहीं दूरसंचार विभाग द्वारा कंपनी पर 14,000 करोड़ रुपये की देनदारी बनाई गई है।

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