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Saturday, April 17, 2021
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सरसों की फसल में चेपा कीट का प्रकोप

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हिसार। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को बदलते मौसम में सरसों की फसल में आने वाले कीटों से सुरक्षा के लिए सुझाव दिए हैं।

कृषि वैज्ञानिकों ने आज यहां बताया कि किसान समय रहते कीटों की पहचान करके आसानी से इसकी रोकथाम कर सकते हैं। एचएयू के कृषि महाविद्यालय मेें तिलहन अनुभाग के अध्यक्ष डॉ. रामअवतार व उनकी टीम ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान क्षेत्र का दौरा कर फसल का जायजा लिया और बताया कि इस समय सरसों की फसल में चेपा कीट का प्रकोप दिखाई दे रहा है।

डॉ. रामअवतार के अनुसार इस समय सरसों की जिस फसल में फूल हैं, उसमें चेपा कीट का आक्रमण देखने को मिला है। इसलिए किसान समय रहते इनकी पहचान कर रोकथाम कर सकते हैं और सरसों की फसल की अच्छी पैदावार ले सकते हैं। किसान इन कीटों की रोकथाम के उपाय नहीं करेंगे तो फसल की पैदावार कम होने की संभावना है। इसलिए किसान कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सिफारिश किए जाने वाले कीट नाशकों का प्रयोग कर इनका समय रहते उचित प्रबंध कर सकते हैं।

उन्होंने किसानों को कीटनाशकों का प्रयोग सांयकाल तीन बजे के बाद करने की सलाह दी है ताकि मधुमक्खियों को नुकसान न हो जो परागण द्वारा उपज बढ़ाने में मदद करती हैं। सरसों की फसल मुख्यत: हरियाणा प्रदेश के रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, सिरसा, हिसार, भिवानी व मेवात जिलों में उगाई जाती है और रबी के मौसम में बोई जाती है।

तिलहन अनुभाग के कीट विशेषज्ञ डॉ. दलीप कुमार के अनुसार हल्के हरे-पीले रंग का यह कीट छोटे-छोटे समूहों में रहकर पौधे के विभिन्न भागों विशेषत:कलियों, फूलों, फलियों व टहनियों पर रहकर रस चूसता है। इसका आक्रमण जनवरी के प्रथम पखवाड़े से शुरू होता है, जब औसत तापमान 10 से 20 डिग्री सेल्सियस और आद्र्रता 75 प्रतिशत तक होती है। रस चूसे जाने के कारण पौधे की बढ़वार रूक जाती है, फलियां कम हो जाती हैं और दानों की संख्या में भी कमी आ जाती है। इसकी रोकथाम के लिए खेत में जब 10 प्रतिशत पुष्पित पौधों पर 9 से 19 या औसतन 13 कीट प्रति पौधा होने पर 250 से 400 मिली लीटर डाइमेथोएट(रोगोर) 30 ई.सी. को 250 से 400 लीटर पानी में मिलकार प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। साग के लिए उगाई गई फसल पर 250 से 400 मिली लीटर मैलाथियान 50 ई.सी. को 250 से 400 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। यदि आवश्यकता हो तो दूसरा छिड़काव 7 से 10 दिन के उपरांत करें।

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