कर्जदारों को नहीं मिली राहत! - Naya India
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कर्जदारों को नहीं मिली राहत!

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की महामारी के बीच कर्ज की किस्तें चुकाने पर लगी रोक यानी लोन मोराटोरियम मामले में आम लोगों को सुप्रीम कोर्ट से भी कई खास राहत नहीं मिली है। सर्वोच्च अदालत ने उलटे केंद्र सरकार को बड़ी राहत देते हुए कहा कि सरकार की नीति को लेकर उसे निर्देश नहीं दे सकते हैं। अदालत ने केंद्र और बैंकों को राहत देते हुए मोराटोरियम की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया। आम लोगों को सिर्फ इतनी राहत मिली कि उन्हें ब्याज के ऊपर ब्याज नहीं चुकाना होगा। हालांकि यह बात केंद्र सरकार बहुत पहले ही सुप्रीम कोर्ट में कह चुकी थी वह ब्याज के ऊपर ब्याज माफ करने जा रही है। आम लोगों को बड़ी राहत तब होती, जब मोराटोरियम की अवधि का ब्याज माफ हो जाता।

बहरहाल, सर्वोच्च अदालत ने मंगलवार को फैसला सुनाते हुए कहा कि मोराटोरियम की अवधि 31 अगस्त से ज्यादा नहीं बढ़ाई जा सकती और न ही मोराटोरियम अवधि के दौरान ब्याज पर ब्याज दिया जाएगा। अदालत ने कहा कि अगर किसी बैंक ने ब्याज पर ब्याज वसूला है, तो वह लौटाना होगा। सरकार को राहत देते हुए अदालत ने कहा- सरकार को आर्थिक फैसले लेने का अधिकार है, क्योंकि महामारी के चलते सरकार को भी भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। हम सरकार को पॉलिसी पर निर्देश नहीं दे सकते।

जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने यह फैसला सुनाया। गौरतलब है कि पिछले साल भारतीय रिजर्व बैंक, आरबीआई ने लोगों और कई श्रेणी की कंपनियों को एक मार्च से 31 मई तक यानी तीन महीने तक कर्ज कि किस्तें चुकाने से छूट दी थी। कहा गया था कि लोग बाद में किस्त चुकाना चाहते हैं तो वे इस छूट का फायदा ले सकते हैं। आरबीआई ने कहा था कि इस दौरान कर्ज की किस्तें नहीं चुकाने वालों के खाते एनपीए नहीं किए जाएंगे। बाद में इस छूट को 31 अगस्त तक बढ़ा दिया गया था।

जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली बेंच ने बैंकों को भी बड़ी राहत दी है। अब बैंक किस्तें नहीं चुकाने वाले खातों को एनपीए घोषित कर सकते हैं। पिछले साल सुनवाई के दौरान अदालत ने इस पर रोक लगा दी थी। बहरहाल, पिछले ही साल केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बता दिया था कि दो करोड़ रुपए तक के कर्ज के लिए बकाया किस्तों के लिए ब्याज पर ब्याज नहीं लगाया जाएगा। सरकार के इस प्रस्ताव में दो करोड़ रुपए तक के एमएसएमई लोन, शिक्षा और आवास लोन, क्रेडिट कार्ड बकाया, वाहन लोन और पर्सनल लोन शामिल हैं। इसका पूरा भार सरकार के ऊपर आएगा, जिसके लिए सरकार ने कहा था कि उसे करीब छह से सात हजार करोड़ रुपए खर्च करने होंगे।

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