आरबीआई ने फिर कम की ब्याज दर

मुंबई। कोरोना वायरस का संकट शुरू होने के बाद भारतीय रिजर्व बैंक, आरबीआई ने दूसरी बार नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की। इस बार केंद्रीय बैंक ने 0.40 फीसदी की कटौती की है। इससे पहले रिजर्व बैंक ने 0.75 फीसदी की कटौती की थी। इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने कर्ज की किस्तें जमा कराने के लिए कुछ और समय देने का भी फैसला किया साथ ही कारपोरेट को ज्यादा कर्ज देने के लिए बैंकों को निर्देश देने का भी फैसला किया गया। आरबीआई ने यह भी कहा कि चालू वित्त वर्ष 2020-21 में आर्थिक विकास दर नकारात्मक रह सकती है।

आरबीआई ने प्रमुख नीतिगत दर यानी रेपो रेट को 0.40 फीसदी घटा कर चार फीसदी कर दिया है। मौद्रिक नीति समिति, एमपीसी की अचानक हुई बैठक में विकास दर को बढ़ावा देने के लिए रेपो दर में कटौती का फैसला आम सहमति से किया गया। इस कटौती के बाद रेपो दर घट कर चार प्रतिशत रह गई है, जबकि रिवर्स रेपो दर 3.35 फीसदी रह गई है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली एमपीसी ने पिछली बार 27 मार्च को रेपो दर में 0.75 फीसदी की कमी करते हुए इसे 4.40 प्रतिशत कर दिया था। रेपो रेट वह दर है, जिस पर आरबीआई दूसरे कारोबारी बैंकों को कर्ज देता है।

शक्तिकांत दास ने कहा कि कोरोना वायरस संकट के कारण कर्ज अदायगी पर स्थगन को तीन और महीने यानी अगस्त तक बढ़ा दिया गया है, ताकि कर्जदारों को राहत मिल सके। इससे पहले मार्च में केंद्रीय बैंक ने एक मार्च 2020 से 31 मई 2020 के बीच सभी कर्ज की किस्तों के भुगतान पर तीन महीनों की मोहलत दी थी। हालांकि बैंक ने न तो ब्याज दर में छूट दी है और न ब्याज माफ किया है। इसका मतलब है कि कर्जदारों को बाद में अतिरिक्त ब्याज के साथ कर्ज की किस्तें अदा करनी होंगी।

आरबीआई ने कहा कि कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था मंदी की ओर बढ़ रही है और मुद्रास्फीति के अनुमान बेहद अनिश्चित हैं। उन्होंने कहा- दो महीनों के लॉकडाउन से घरेलू आर्थिक गतिविधि बुरी तरह प्रभावित हुई है। साथ ही उन्होंने जोड़ा कि शीर्ष छह औद्योगिक राज्य, जिनका भारत के औद्योगिक उत्पादन में 60 फीसदी योगदान है, वे मोटे तौर पर रेड या ऑरेंज जोन में हैं। उन्होंने कहा कि मांग में गिरावट के संकेत मिल रहे हैं और बिजली व पेट्रोलियम उत्पादों की मांग घटी है।

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि सबसे अधिक झटका निजी खपत में लगा है, जिसकी घरेलू मांग में 60 फीसदी हिस्सेदारी है। दास ने कहा कि मांग में कमी और आपूर्ति में व्यवधान के चलते चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होंगी। उन्होंने कहा कि 2020-21 की दूसरी छमाही में आर्थिक गतिविधियों में कुछ सुधार की उम्मीद है।

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