पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहे - Naya India
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पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर रहे

नई दिल्ली। पेट्रोल के दाम शनिवार को लगातार चौथे दिन स्थिर रहे जबकि डीजल की कीमत लगातार दो दिन घटने के बाद आज इनमें कोई बदलाव नहीं हुआ। देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल आज 71.94 रुपये प्रति लीटर पर टिका रहा। यह 13 सितंबर 2019 के बाद का निचला स्तर है।

यहाँ डीजल की कीमत भी 05 जुलाई के बाद के निचले स्तर 64.77 रुपये प्रति लीटर पर अपरिवर्तित रही। उल्लेखनीय है कि 05 जुलाई 2019 को बजट में पेट्रोल-डीजल पर दो-दो रुपया कर बढ़ाने से अगले दिन इनके दाम अचानक चढ़े थे। कोलकाता में पेट्रोल 74.58 रुपये, मुंबई में 77.60 रुपये और चेन्नई में 74.73 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर रहा। डीजल बिना किसी बदलाव के कोलकाता में 67.09 रुपये, मुंबई में 67.87 रुपये और चेन्नई में 68.40 रुपये प्रति लीटर बिका।

By हरिशंकर व्यास

भारत की हिंदी पत्रकारिता में मौलिक चिंतन, बेबाक-बेधड़क लेखन का इकलौता सशक्त नाम। मौलिक चिंतक-बेबाक लेखक-बहुप्रयोगी पत्रकार और संपादक। सन् 1977 से अब तक के पत्रकारीय सफर के सर्वाधिक अनुभवी और लगातार लिखने वाले संपादक।  ‘जनसत्ता’ में लेखन के साथ राजनीति की अंतरकथा, खुलासे वाले ‘गपशप’ कॉलम को 1983 में लिखना शुरू किया तो ‘जनसत्ता’, ‘पंजाब केसरी’, ‘द पॉयनियर’ आदि से ‘नया इंडिया’ में लगातार कोई चालीस साल से चला आ रहा कॉलम लेखन। नई सदी के पहले दशक में ईटीवी चैनल पर ‘सेंट्रल हॉल’ प्रोग्राम शुरू किया तो सप्ताह में पांच दिन के सिलसिले में कोई नौ साल चला! प्रोग्राम की लोकप्रियता-तटस्थ प्रतिष्ठा थी जो 2014 में चुनाव प्रचार के प्रारंभ में नरेंद्र मोदी का सर्वप्रथम इंटरव्यू सेंट्रल हॉल प्रोग्राम में था। आजाद भारत के 14 में से 11 प्रधानमंत्रियों की सरकारों को बारीकी-बेबाकी से कवर करते हुए हर सरकार के सच्चाई से खुलासे में हरिशंकर व्यास ने नियंताओं-सत्तावानों के इंटरव्यू, विश्लेषण और विचार लेखन के अलावा राष्ट्र, समाज, धर्म, आर्थिकी, यात्रा संस्मरण, कला, फिल्म, संगीत आदि पर जो लिखा है उनके संकलन में कई पुस्तकें जल्द प्रकाश्य। संवाद परिक्रमा फीचर एजेंसी, ‘जनसत्ता’, ‘कंप्यूटर संचार सूचना’, ‘राजनीति संवाद परिक्रमा’, ‘नया इंडिया’ समाचार पत्र-पत्रिकाओं में नींव से निर्माण में अहम भूमिका व लेखन-संपादन का चालीस साला कर्मयोग। इलेक्ट्रोनिक मीडिया में नब्बे के दशक की एटीएन, दूरदर्शन चैनलों पर ‘कारोबारनामा’, ढेरों डॉक्यूमेंटरी के बाद इंटरनेट पर हिंदी को स्थापित करने के लिए नब्बे के दशक में भारतीय भाषाओं के बहुभाषी ‘नेटजॉल.काम’ पोर्टल की परिकल्पना और लांच।

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