जीडीपी निगेटिव रहने का अनुमान

मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक, आरबीआई ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद, जीडीपी की विकास दर निगेटिव रहने के आसार हैं। दो महीने पर होने वाली मौद्रिक समीक्षा समिति की बैठक के बाद रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस में अंदेशा जताया कि अगर कोरोना महामारी का संक्रमण ज्यादा समय तक चलता रहा घरेलू अर्थव्यवस्था की हालत और खराब हो सकती है। इस महामारी और संक्रमण रोकने के लिए लागू लॉकडाउन की वजह से कारोबार पहले से ही बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति की बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि जुलाई में उपभोक्ताओं का आत्मविश्वास रिजर्व बैंक के पिछले सर्वे के समय से और भी कमजोर हुआ है।  समीक्षा में कहा गया है कि विदेशों से भी मांग अभी कमजोर बनी रहेगी। पूरी दुनिया मंदी में है और विश्व व्यापार घट रहा है। शक्तिकांत दास ने कहा- चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में अनुमान है कि वास्तविक जीडीपी संकुचन के दौर में रहेगी। पूरे वित्त वर्ष 2020-21 में वास्तविक जीडीपी के गिरने के आसार हैं।

उन्होंने कहा कि अगर महामारी का संक्रमण ज्यादा लंबा चलता है, मॉनसून सामान्य रहने का अनुमान सही न निकले और वैश्विक वित्तीय बाजार में उठापटक बढ़ी तो घरेलू अर्थव्यवस्था पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। दास ने कहा कि मौद्रिक समीक्षा समिति का आकलन है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था की स्थिति 2020 की पहली छमाही में कमजोर बनी रही और इसमें छंटनी का रुझान रहा। उन्होंने कहा कि जुलाई में बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में कोरोना संक्रमण में नई तेजी दिखी। इसका असर यह हुआ कि मई-जून में आर्थिक हालत में सुधार के जो संकेत दिखे थे वो खत्म हो गए।

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