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लोन किस्त भरने से मिली छूट खत्म

मुबंई। भारतीय रिजर्व बैंक, आरबीआई ने दो महीने पर होने वाली अपनी मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद गुरुवार को कई बड़ी घोषणाएं कीं। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। उसे चार फीसदी पर ही रखा गया है। माना जा रहा है कि महंगाई की चिंता में केंद्रीय बैंक ने यह फैसला किया। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा भी कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में यानी जुलाई से सितंबर के बीच महंगाई की दर ऊंची रह सकती है।

रिजर्व बैंक ने कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से लोगों को लोन की किस्तें भरने से छूट दी थी। उसे 31 अगस्त से आगे नहीं बढ़ाया गया है। इसका मतलब है कि सितंबर से हर आदमी को अपने हर लोन पर किस्त चुकानी होगी। ऐसा नहीं करने पर क्रेडिट स्कोर प्रभावित हो सकता है। हालांकि, आरबीआई ने साथ ही बैंकों को लोन के पुनर्गठन की अनुमति दे दी है। यानी अगर बैंक चाहें तो अपने ग्राहकों को कर्ज चुकाने के लिए किस्तों को दोबारा से शिड्यूल कर सकते हैं,  कर्ज चुकाने की अवधि बढ़ा सकते हैं और भुगतान में कुछ समय की छूट भी दे सकते हैं।

बहरहाल, कर्ज की किस्तें चुकाने से मिली छूट खत्म होने के बाद अब कर्ज भुगतान की मार्च से पहले वाली व्यवस्था लागू हो जाएगी। गौरतलब है कि आरबीआई ने एक मार्च 2020 से 31 मई 2020 तक सभी लोन की किस्तों के ऊपर मोराटोरियम की घोषणा की थी, जिसे बाद में बढ़ा कर 31 अगस्त तक कर दिया गया था। इसके तहत लोगों को यह सुविधा मिली थी कि किस्त नहीं भरने पर उनका क्रेडिट स्कोर प्रभावित नहीं होगा। बाकी इस सुविधा का लाभ लेने के लिए उन्हें कर्ज पर भारी भरकम ब्याज भरना होगा।

गुरुवार को जारी मौद्रिक नीति में इसे बढ़ाने की कोई घोषणा नहीं की गई है। इसका मतलब है कि मोराटोरियम अवधि खत्म हो गई है। सो, अब लोगों को सितंबर से अपने आवास, वाहन और पर्सनल लोन पर मार्च से पहले की तरह किस्त चुकानी होगी। यदि नहीं चुकाते हैं तो क्रेडिट स्कोर प्रभावित होगा।

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