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तीन प्रस्तावित बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली में बनेंगे दो स्टेशन

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली को बहुत जल्द तीन प्रस्तावित बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत दो स्टेशनों की सौगात मिल सकती है। दिल्ली से अमृतसर, अहमदाबाद और वाराणसी के लिए द्रुत गति वाले तीन रेल कॉरिडोर जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है। इसके तहत दिल्ली के विभिन्न इलाकों में दो हाई स्पीड रेल स्टेशन बनेंगे।

नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) की प्रवक्ता सुषमा गौड़ ने आईएएनएस को बताया कि दिल्ली में दो हाई स्पीड रेल स्टेशन बनाने के लिए एनएचएसआरसीएल सभी संभावनाओं पर विचार कर रहा है। उन्होंने बताया कि दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए एक स्टेशन सराय काले खां और निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के समीप होगा।

यहां से आउटर रिंग रोड के माध्यम से रोड कनेक्टिविटी, पिंक लाइन मेट्रो के माध्यम से मेट्रो कनेक्टिविटी, सराय काले खां आईएसबीटी के माध्यम से इंटर-स्टेट बस कनेक्टिविटी और आरआरटीएस सिस्टम के माध्यम से क्षेत्रीय रेल कनेक्टिविटी की सुविधा सहज ही सुलभ हो पाएगी। गौरतलब है कि एनएचएसआरसीएल ने 800 किमी लंबी दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए हवाई सर्वे का काम शुरू कर दिया है।

सुषमा गौड़ ने बताया कि दिल्ली-वाराणसी मार्ग के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के पहले प्रारूप को तैयार कर लिया गया है। डीपीआर तैयार करने के लिए जरूरी डेटा कलेक्शन और एरियल सर्वे सहित सभी कार्यो के लिए निविदा प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। एनएचएसआरसीएल ने इस वर्ष 10 जनवरी को दिल्ली-वाराणसी मार्ग के लिए ग्रेटर नोएडा से एरियल सर्वे का काम शुरू कर दिया था। इस काम के लिए प्रस्तावित मार्ग पर सर्वे से सम्बंधित आधुनिक तकनीकों से लैस हेलिकॉप्टर की मदद ली गई।

इस परियोजना से जुड़े एक अन्य अधिकारी ने बताया कि एक हाई-स्पीड रेल स्टेशन प्रस्तावित जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नजदीक, जबकि दूसरा नोएडा के 148 सेक्टर में बनेगा। बहरहाल, दिल्ली में दूसरे हाई स्पीड रेल के बारे में गौड़ ने बताया कि दिल्ली-अहमदाबाद और दिल्ली-अमृतसर हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए स्टेशन बनाने हेतु द्वारका मेट्रो स्टेशन सेक्टर-21 और बिजवासन रेलवे स्टेशन के समीप विभिन्न स्थलों की तलाश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि यहां स्टेशन बनने से एयरपोर्ट एक्सप्रेस मेट्रो लाइन के माध्यम से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (आईजीआई एयरपोर्ट) व सेंट्रल दिल्ली, ब्लू लाइन मेट्रो लाइन के माध्यम से वेस्ट दिल्ली, सेंट्रल दिल्ली, ईस्ट दिल्ली, नोएडा एवं सेक्टर 25 स्थित इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर और गुरुग्राम की कनेक्टिविटी सुगम हो जाएगी। दिल्ली-अमृतसर-चंडीगढ़ मार्ग 459 किमी लंबा हाई स्पीड रेल कॉरिडोर है, जबकि दिल्ली-अहमदाबाद 886 किमी लंबा हाई स्पीड रेल कॉरिडोर है।

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यह कैसा धर्मांतरण है ?

Conversion

उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते ने धर्मांतरण के एक बहुत ही घटिया षड़यंत्र को धर दबोचा है। ये षड़यंत्रकारी कई गरीब, अपंग, लाचार और मोहताज़ लोगों को मुसलमान बनाने का ठेका लिये हुए थे। इन मजहब के दो ठेकेदारों— उमर गौतम और जहांगीर आलम कासमी— को गिरफ्तार किए जाने के बाद पता चला है कि उन्होंने एक हजार लोगों को मुसलमान बनाया है।कैसे बनाया है ? उन्हें कुरान शरीफ के उत्तम उपदेशों को समझा कर नहीं, इस्लाम के क्रांतिकारी सिद्धांतों को समझाकर नहीं और पैगंबर मोहम्मद के जीवन के प्रेरणादायक प्रसंगों को बताकर नहीं, बल्कि लालच देकर, डरा-धमकाकर, हिंदू धर्म की बुराईयां करके। नोएडा के एक मूक-बधिर आवासी स्कूल के बच्चों को फुसलाकर योजनाबद्ध ढंग से उनका धर्मांतरण करवाया गया और उनकी शादी मुस्लिम लड़कियों से करवा दी गई।

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यह काम सिर्फ दिल्ली और नोएडा में ही नहीं हुआ, महाराष्ट्र, केरल, आंध्र, हरियाणा और उत्तरप्रदेश में भी इस षड़यंत्र के तार फैले हुए हैं। इस घटिया काम की जांच में यह पाया गया कि उन्हें भरपूर पैसा भी मिलता रहा। इस पैसे के स्त्रोत आईएसआईएस और कुछ अन्य विदेशी एजेन्सियां भी रही हैं। इस राष्ट्रविरोधी काम को अंजाम देने का खास जिम्मा उठा रखा था, उमर गौतम ने। इसका असली नाम श्यामप्रकाश सिंह गौतम था। इसने एक मुसलमान लड़की से शादी की और कुछ वर्ष पहले मुसलमान बनने पर धर्मांतरण का काम जोर-शोर से शुरु कर दिया।

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Religious Conversion For Five Lakh - मात्र पांच लाख रुपए के लिए हिंदू से बन  गया ईसाई | Patrika News

गौतम से कोई पूछे कि तुम खुद मुसलमानों क्यों बने थे? क्या इस्लाम की अच्छाइयों या पैगंबर के जीवन से प्रेरणा लेकर तुम मुसलमान बने थे ? जितने लोगों को तुमने मुसलमान बनाया है, क्या वे इस्लाम के सिद्धांतों को समझते हैं और क्या वे अपने जीवन में उनका पालन करते हैं ? यदि कोई व्यक्ति किसी मजहब के सिद्धांतों को समझ कर अपना धर्म-परिवर्तन करता है तो उसका यह अधिकार है। ऐसा करने से उसे कोई रोक नहीं सकता लेकिन जोर-जबर्दस्ती, लालच और वासना के कारण जो धर्मांतरण होता है, वह निकृष्ट कोटि का अधर्म है।

खुद कुरान शरीफ के अध्याय 2 और आयत 256 में कहा गया है कि ‘‘मजहब में जबर्दस्ती का कोई स्थान नहीं है।’’ जो धर्मांतरण गौतम और कासमी करते रहे हैं, क्या वह इस कसौटी पर खरा उतरता है? महर्षि दयानंद, स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी ने भी ईसाई पादरियों द्वारा किए जा रहे धर्म-परिवर्तन का कड़ा विरोध किया था। वास्तव में यह धर्मांतरण नहीं, धर्म का कलंकरण है। भारत के कई राज्यों ने ऐसे अनैतिक धर्मांतरण के विरुद्ध कठोर कानून बना रखे हैं।

ऐसे ही कानून के तहत उक्त लोगों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है। वास्तव में ऐसे धर्मांतरण में धर्म कम, राजनीति ज्यादा होती है। अंग्रेज ने अपनी राजनीतिक सत्ता मजबूत करने के लिए जैसे ईसाइयत को साधन बनाया था और तुर्कों व मुगलों ने इस्लाम का इस्तेमाल किया था, वैसे ही आजकल कई छुटभय्ये अपनी तुच्छ स्वार्थ-सिद्धि के लिए मजहब का इस्तेमाल करते रहते हैं।

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