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Wednesday, April 14, 2021
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नब्ज पर हाथ

अदालत के कंधे पर आस्था का भार!

अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर का आंदोलन जब चरम पर था तब भाजपा के सर्वोच्च नेता लालकृष्ण आडवाणी और विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख अशोक सिंघल कहा करते थे कि यह आस्था का मामला है, इसमें अदालत की कोई...

कोरोना की दूसरी लहर से बचें!

लोगों को सरकारों के फैलाए झूठ में नहीं फंसना चाहिए और न नेताओं के आचरण का अनुसरण करना चाहिए। वे चुनाव लड़ रहे हैं, प्रचार कर रहे हैं तो उनको सत्ता मिलनी है। वे मास्क नहीं लगा रहे हैं...

प्रशांत किशोर की बातों के भरोसे भाजपा!

भारतीय जनता पार्टी की आईटी सेल ने चाय की प्याली में तूफान उठाया हुआ है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कुछ पत्रकारों के साथ एक सोशल मीडिया साइट पर हुई बातचीत के कुछ...

24 जवानों का खून किसके सिर?

साजिश थ्योरी की बात करने वालों की इन बातों को छोड़ें कि आखिर ऐसा कैसे होता है कि हर चुनाव के बीच में या उससे पहले सुरक्षा बलों पर नक्सलियों का या आतंकवादियों का हमला हो जाता है और...

क्या भारत झेल सकेगा यह लहर?

देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर चल रही है। दुनिया के जिस भी देश में दूसरी या तीसरी लहर आई वह पहले से ज्यादा तीव्र रही। हालांकि तीव्रता सिर्फ संक्रमण की रफ्तार में बढ़ती है। जैसे जैसे नई...

चुनाव प्रचार ज्यादा अहम या संसद?

देश की संसद ज्यादा अहम है या राज्यों के विधानसभा चुनाव का प्रचार? संसदीय राजनीति और उस पर आधारित शासन प्रणाली में भरोसा करने वाले किसी भी समझदार व्यक्ति का जवाब यही होगा कि संसद ज्यादा अहम है, संसदीय कामकाज ज्यादा अहम हैं।

बहुत कठिन है भाजपा की डगर

भाजपा के दावे अपनी जगह हैं और जमीनी हकीकत, बंगाल का चुनावी इतिहास, क्षेत्रीय पार्टियों से लड़ने में भाजपा की कमजोरी, पार्टी का अंदरूनी विवाद और राज्य की जनसंख्या संरचना की वास्तविकता अपनी जगह है। अगर इन सारी कसौटियों पर देखें तो लगेगा कि भाजपा की डगर बहुत मुश्किल है।

जीत के ऐलान की जल्दी क्यों?

पश्चिम बंगाल में पहले चरण की 30 सीटों के लिए 27 मार्च को मतदान हुआ। उस दिन शाम छह बजे तक ईवीएम का आखिरी बटन दबा भी नहीं होगा कि भाजपा ने जीत का ऐलान कर दिया।

नीतीश गंवा रहे हैं अपनी पुण्यता

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ऐसा लग रहा है कि बिहार को पुलिस राज में तब्दील करने की ठान ली। पिछले साल हुए बिहार विधानसभा के चुनाव में तीसरे नंबर की पार्टी बन कर रह जाने के बावजूद...

मुश्किल नहीं है एमएसपी की कानूनी गारंटी

केंद्र सरकार के बनाए तीन कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमा पर चल रहा किसान आंदोलन 116 दिन का हो गया। आंदोलन कर रहे किसानों की दो मांगें हैं। पहली, केंद्र के बनाए तीन कानून रद्द किए जाएं और दूसरी, सभी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी दी जाए

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कोरोना: चार में से एक मरीज भारतीय, अगले हफ्ते इसमें इजाफा संभव!

नई दिल्ली। पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के जितने भी नए मामले आ रहे हैं उनमें से करीब एक...