सुर्खियों का प्रबंधन और नशा!

जनसंपर्क के गुरू एडवर्ड एल बार्नेस ने ठीक एक सौ साल पहले 1920 में यह सिद्धांत…

राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक बनाम नैतिकता!

राजनीति में मास्टरस्ट्रोक उस दांव को कहते हैं, जिसमें साम, दाम, दंड और भेद के चारों…

अब क्या होगा भाजपा का एजेंडा?

भारतीय जनता पार्टी अब आगे क्या करेगी? भारतीय जनसंघ के संस्थापकों ने जिस अनुच्छेद 370 को…

अयोध्या की बात, तब और अब!

एक समय था, जब अयोध्या की बात से लोगों के खून खौलने लगते थे। मारने-काटने की…

विचारधारा की रेखा धुंधली होने के फायदे

यह कहना जोखिम भरा है कि विचारधाराओं की विभाजक रेखा मिट रही है या धुंधली हो…

जनादेश तो भाजपा के विरूद्ध है!

महाराष्ट्र और हरियाणा दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार बन जाएगी। पर हकीकत यह है कि…

राज्यों में नए नेतृत्व के लिए जगह

यह विज्ञान का नियम है कि कोई भी जगह खाली नहीं रहती है। राजनीति में भी…

चैनलों को डोवाल की बात सुननी चाहिए

रा ष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल ने बहुत कायदे की बात कही है। उन्होंने कहा है…

सूचना कानून का सच यह नहीं है!

सूचना के अधिकार कानून का सच वह नहीं है, जो शनिवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित…

दुविधा में रहे तो डूब जाएंगे नीतीश!

नीतीश कुमार को दुविधा छोड़नी होगी। उन्हें दो टूक फैसला करना होगा। और जल्दी करना होगा।…

राहुल गांधी कितनी बार लांच होंगे?

किसी भी उत्पाद को एक बार लांच किया जाता है। फिर जरूरत पड़ने पर उसे रिलांच…