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Friday, May 7, 2021
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रिपोर्टर डायरी

भारत से बहुत दूर चला गया नेपाल!

मैंने बचपन से ही नेपाल को कभी भी दूसरा देश महसूस ही नहीं किया क्योंकि इस पड़ोसी देश के लोगों को हम लोग अपने भारतीय लोगों की तरह ही मानते आए थे। हमारे सामाजिक व धार्मिक संबंध बहुत पुराने हैं

कोरोना, ज्योतिमर्य और धर्म ज्ञान

पिछले कुछ समय से जिस तेजी से मेरे परिचितो ने दुनिया छोड़ी है उसे देखकर मैं घबरा गया हूं और मैंने तय किया था कि अब निकट भविष्य में इस दुनिया को छोड़ कर जाने वाले किसी परिचित के बारे में अपनी पुरानी यादों को इस कॉलम में ताजा नहीं करूंगा

रहीम का मकबरा और उनकी बात

मैं बचपन से ही कबीर और रहीम को बहुत पसंद करता आया हूं क्योंकि ये दोनों कवि बड़ी-बड़ी शाब्दिक लफ्फाजी करने की जगह अपनी सफल व आम आदमी को आसानी से समझ में आ जाने वाली भाषा में जीवन के सत्य को वर्णित करते थे।

अवसाद का वक्त और बख्शीजी की याद

पहले मैंने ‘डिप्रेशन’ व ‘अवसाद’ शब्द ही सुने थे पर उनकी यह अनूभुति, यह महसूस नहीं हुआ कि जब आदमी इनसे गुजरता है तो क्या होता है। मगर मैं पिछले कुछ समय से मैं इससे गुजर रहा हूं।

भतीजा साबित होगा बरबादी का कारण?

मैं दशको से व्यासजी का यह शब्द पढ़ते-पढ़ते उनका कायल हो गया हूं कि हर सरकार अपनी बरबादी का कारण साथ लाती है। अब जब पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के खास सुवेंदु अधिकारी के टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल होने की खबर पढ़ी तो वह बात मेरे मन में कौंध गई।

किसान आंदोलन व शरद जोशी का न होना

देश में जबरदस्त किसान आंदोलन चल रहा है और इस दौरान जाने माने किसान नेता व उनके हितैषी शरद जोशी का नाम नहीं होने के कारण उनकी कमी बहुत खल रही है

आमोद कंठ की ‘खाकी इन डस्ट स्टॉर्म’ में बेबाकी

आमतौर पर हमें अपने देश की पुलिस व उसके अधिकारियों की छवि को लेकर बहुत अजीबो-गरीब स्थिति से गुजरना पड़ता है। हमें लगता है कि वे लोग तो समाज से पूरी तरह कटे हुए होते हैं।

अफसरों पर केंद्र व राज्य में ठनना

अपने पत्रकारिता के अनुभव में मैंने एक बहुत अच्छी चीज पाई। माना जाता है कि पत्रकारो व सरकारी अफसर कर्मचारियों को किसी पार्टी विशेष के प्रति दोष या लगाव रखने से ऊपर उठकर होना चाहिए। मगर मेरा मानना है कि ऐसा हो नहीं पाता है।

क्या राजनीति में रजनीकांत चलेगें?

नेताओं व अभिनेताओं का शुरु से गहरा संबंध रहा है। जब दक्षिण भारत की बात आती है तो पूछना ही क्या। पहले नेताओं का आम तौर पर प्रचार कर खबरों में आने वाले अभिनेता थे।

उफ! बांग्लादेश का रोहिग्या मुसलमानों से सलूक!

मेरा मानना है कि दुनिया में सबसे बुरा शब्द शरणार्थी है। अपने देश के आतंरिक हालातों से कोई नागरिक अपना देश छोड़कर पड़ोस के किसी और देश में शरण लेने के लिए मजबूर हो तो उस पड़ोसी देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया उसे गिरी हुई नजरो से देखती हैं।

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