• अहंकारी ट्रम्प और अवसरवादी वेंस की जोड़ी

    आठ साल पहले तक जेडी वेंस को डोनाल्ड ट्रम्प जरा भी नहीं भाते थे। वेंस ने सार्वजनिक मंच से ट्रम्प को 'इडियट' बताया था और कहा था कि वे एक 'कलंक' हैं। निजी चर्चाओं में वे ट्रम्प की तुलना हिटलर से करते थे। और आज ट्रम्प ने उन्हें रिपब्लिकन पार्टी का उप राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। वे ट्रम्प के 'रनिंग मेट' होंगे। सन् 2016 में एक इंटरव्यू में वेंस ने कहा था, "मैं कभी ट्रम्प समर्थक नहीं रहा हूं। मुझे वे कभी पसंद नहीं आए"। उस समय, वेंस की निगाहों में ट्रम्प राष्ट्रपति पद के बहुत घटिया उम्मीदवार...

  • हमले से ट्रम्प की हकीकत नहीं बदली है

    ट्रम्प के साथ जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है, गलत है और उसकी जितनी निंदा की जाए, उतनी कम है। उनसे हम सबको सहानुभूति है। मगर क्या इससे वे राष्ट्रपति पद के सर्वोत्तम उम्मीदवार बन जाते हैं? इस प्रश्न का जो उत्तर आपका होगा, वही मेरा भी है। ट्रम्प पर कातिलाना हमले के पहले वे दुनिया के सबसे बड़े और सबसे महत्वपूर्ण मकान- व्हाइट हाउस– का किरायेदार बनने के लिए जितने अनुपयुक्त थे, हमले के बाद भी उतने ही अनुपयुक्त हैं। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि राष्ट्रपति बनने पर वे क्या कहर बरपा करेंगे तो पिछले 24 घंटे...

  • अमेरिकी लोकतंत्र में फैलता जहर

    हर तरफ जहर ही जहर है। पूरे तंत्र में, उसकी जड़ों तक जहर फैल गया है। वह सर्वव्यापी है। आप और मैं इस जहर से परेशान और क्षुब्ध हैं मगर इससे अछूते नहीं, बल्कि कुछ भी उससे अछूता नहीं है- व्यवसाय, समाज, संस्कृति, काम करने के तरीके, राजनीति सब कुछ बहुत टॉक्सिक हो गए हैं। शनिवार की शाम डोनाल्ड ट्रंप भी इसी जहर के शिकार हुए। बटलर काउंटी, पेन्सिलवेनिया में एक रैली में बोलते समय उन पर गोली चलाई गई, जो उनके कान को छूती हुई निकली और उनके पास खड़े एक व्यक्ति को लगी। हमलावर को मौके पर ढेर...

  • सूडान पर ध्यान देने की जरुरत

    सूडानवासी दुनिया के सबसे बड़े विस्थापन संकट की पीड़ा झेल रहे हैं। लेकिन किसी को उनकी फिक्र नहीं है। और हो भी क्यों? क्या सूडान हमेशा से उथल-पुथल और उत्पातों के लिए जाना नहीं जाता रहा है? क्या अकारण टकरावों में उलझे रहना ही इस अफ्रीकी देश की किस्मत नहीं है? सूडान पश्चिमी ताकतों की प्राथमिकता की सूची में हमेशा से बहुत नीचे रहा है। शक्तिशाली पश्चिमी नेताओं की इस देश में न के बराबर रूचि है। वे या तो प्रतिबंध लगाकर उसे दुनिया से अलग-थलग कर देते हैं, या फिर, जैसा कि उन्होंने क्रांति के बाद किया, जल्दबाजी में...

  • चीन की चिंता में मोदी की मॉस्को यात्रा

    क्या दृश्य था.! अस्त होने के ठीक पहले का नर्म सूरज पेड़ों के पीछे से झांक रहा था। उसकी रोशनी दो प्रसन्नचित्त पक्के दोस्तों पर पड़ रही थी जो पांच साल के बाद मिले थे। इस मुलाकात से वे दोनों कितने रोमांचित थे, यह उनके गर्मजोशी से गले मिलने से जाहिर था। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिन की यात्रा पर मास्को पहुंचे। वे कूटनीतिक उलझनों को कम करने और संबंधों और मजबूत बनाने के लिए बातचीत करने आए थे। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने निवास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोरदार स्वागत किया और रूस आने के लिए...

  • चिंता के साये में नाटो की 75वीं सालगिरह

    सोमवार को रूस ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। जिस समय व्लादिमीर पुतिन, प्रधानमंत्री मोदी से गलबहियां कर रहे थे और दोनों नेता कूटनीतिक ठहाके लगा रहे थे, उसी समय बहुत सारी मिसाइलें यूक्रेन के बच्चों के सबसे बड़े अस्पताल से टकराईं। ओखमाद्यित यूक्रेन का बच्चों का सबसे बड़ा अस्पताल है और कैंसर के इलाज के लिए विख्यात है। वहां बहुत से बच्चे कई महीनों से रह रहे थे। हमले में यह अस्पताल मलबे के ढेर में तब्दील हो गया और 36 लोग मौत के मुंह में समा गए। कीव का ओखमाद्यित अस्पताल काफी समय से यूक्रेन के...

  • Pall of gloom and concern over NATO’s 75th anniversary

    As leaders gather in Washington, uncertainties and confusion follows them. The shadow of ‘“For how long?” looming. On Monday afternoon Russia went full throttle savage. As Vladmir Putin was shaking hands with Prime Minister Modi, embracing and sharing diplomatic laughs, a barrage of missiles was dropped on Ukraine’s largest children’s hospital. Okhmatdyt, Ukraine’s largest paediatric clinic, renowned for its cancer treatment and a place many of the children had called home for months, was reduced to rubbles killing 36 people.  Okhmatdyt hospital in Kyiv for long has been a critical lifeline for Ukraine’s most severely ill children with complex diseases....

  • फ्रांस में गठबंधन का नया दौर

    केवल एक हफ्ते में फ्रांस में जनमत का पेंडुलम अति दक्षिणपंथ से वामपंथ की ओर खिसक गया है। यह बदलाव चौंकाने वाला और अनापेक्षित है। संसदीय चुनाव का अंतिम दौर रविवार को खत्म हुआ और ऐसा लगता है कि जोनिक मिनोशों के वर्चस्व वाला वामपंथी न्यू पॉपुलर फ्रंट यानी एनएफपी संसद में सबसे बड़ा गठबंधन बनने की ओर बढ़ रहा है। फ्रांस, यूरोप और सारा विश्व, जनता के मूड में आए इस अचानक बदलाव से चकित है। पिछले हफ्ते तक यह तय माना जा रहा था कि मरिन ले पेन सत्ता हासिल कर लेंगीं। जनमत संग्रहों से ऐसा अनुमान लगाया...

  • उदार लोकतंत्र के लिए ब्रिटेन से आशा की किरण

    करीब 14 साल तक लगातार सत्ता में रहने के बाद इंग्लैंड की जनता ने कंजरवेटिव पार्टी को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। यह नतीजा अवश्यंभावी और अपेक्षित था। लेकिन कंजरवेटिव पार्टी की इतनी बुरी गत होगी, यह किसी ने नहीं सोचा था। कंजरवेटिव पार्टी संभवतः दुनिया का सफलतम राजनीतिक दल है। सन 1945 के बाद से वह जितने समय सत्ता से बाहर रहा है, उसके दोगुने समय तक सत्ता में रहा है। लेकिन अब वह विपक्ष में है। ब्रेक्जिट, महामारी और राजनीतिक उथल पुथल, जिसके चलते एक साल में तीन प्रधानमंत्री बदले, का मिलाजुला प्रभाव यह हुआ कि कंजरवेटिव...

  • UK Election: Labour goes ‘400 paar’ in a historic win

    Yet, despite the overwhelming majority of Labour, the elections also revealed a divided, uncertain nation. And the rise of ‘alternatives’.  After 14 years in power, the Conservatives in the United Kingdom have been toppled. The result inevitable, it was expected. What was not evitable in the inevitable was the decisive rout. The world’s most successful political party—which since 1945 has been in power twice as long as it’s been out of it—has been shunted back into opposition. In a combination of disruption caused by Brexit, followed by a pandemic, leading to astonishing period of political and financial turbulence that ushered...

  • बाइडन ही है ट्रंप की काट!

    जो बाइडन चुनाव मैदान में डटे रहेंगे। उन्होंने साफ़-साफ़ कह दिया है कि वे राष्ट्रपति पद की दौड़ से हटने वाले नहीं हैं। वे रणभूमि से पलायन करने के मूड में कतई नहीं हैं। वे अड़े हुए हैं। और उन्हें पूरा विश्वास है कि वे और केवल वे ही ट्रंप को धूल चटा सकते हैं। लेकिन डेमोक्रेट, उदारवादी, डेमोक्रेटों को धन उपलब्ध करवाने वाले धन्नासेठ और सिलिकन वैली के शहंशाह घबराए हुए हैं, परेशानहाल हैं। वे चाहते हैं कि बाइडन किसी भी तरह राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी छोड़ दें। आईये एक क्षण के लिए मान लेते हैं कि जो बाइडन...

  • Determined Biden vs Divided Democrats

    Trump will use the infighting within Democrats to rally support and acceptability, while disenchanted Democratic supporters would further get disengaged, leading to a potential Trump victory. As Joe Biden remains stubborn to step down, the democrats have become divided resulting the 2024 elections to be interesting with High Stakes  Joe Biden isn’t going anywhere. He has declared that he will not drop out of the presidential race. He is affirmative. He is stubborn. And sure that only he and him alone can stop Trump becoming the President. However, many Democrats, liberals, pro-Democrat sponsors, and Silicon Valley tycoons are rattled and...

  • ईरान में चुनाव और लोग उदास!

    इंग्लैंड और फ्रांस के साथ-साथ ईरान में भी चुनाव हो रहे हैं। हालांकि वहां जनता के पास चुनने के लिए कुछ ख़ास है नहीं। खबरों के मुताबिक इस बार वहा चुनावी रंग और भी फीका है। हताशा और निराशा का माहौल है। पहली वजह तो यह है कि ईरानी जनता अभी तक राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की 19 मई को हेलीकाप्टर दुर्घटना में हुई रहस्यमय मौत के झटके से उबर नहीं सकी है। दूसरी बात यह है कि उन्हें जिन उम्मीदवारों में से अपने पसंदीदा व्यक्ति को चुनना है, वे सभी राजनीति के विपरीत ध्रुवों पर विराजमान हैं।बहरहाल,जैसा न्यूयार्क टाईम्स ने...

  • Elections in Iran: Grim and Farcical

    Discontent, Low Turnout, and a Grim Choice Between Reformist and Ultraconservative Candidates Iran is also in election mode, but elections are hardly democratic. This time, the mood is particularly grim, forlorn. Iranians are still reeling from the mysterious death of President Ebrahim Raisi in a helicopter crash on May 19th. Additionally, they are facing a choice between candidates from opposite ends of the political spectrum – a choice described by the New York Times as between bad and worse. Iranians, thus feel disengaged from the election process, viewing it as a mere formality. In a country which is dictatorial to...

  • सुनक हारेंगे, बुरी तरह?

    कल ब्रिटेन में नई सरकार, नए प्रधानमंत्री और उम्मीदों में लोग वोट डालेंगे। जैसा कि 22 मई को ऋषि सुनक ने कहा था, "ब्रिटेन के लिए अपना भविष्य चुनने का क्षण आ गया है"।   ऋषि सुनक ने भी पड़ोसी देश फ्रांस के इमैनुएल मैक्रों की तरह, जल्दबाजी में समय से पहले चुनाव का फैसला किया है। साढ़े पांच हफ्ते पहले, वसंत की ठंडी और बेरहम बारिश के बीच, सुनक ने अचानक घोषणा की थी कि देश में 4 जुलाई को चुनाव होगा।  ब्रिटेन की राजनैतिक प्रणाली ऐसी है कि उसमें सत्ताधारी सरकार को अधिकार होता है कि वह पांच साल...

  • फ्रांस में भी लिबरल आउट?

    फ्रांस 'विकल्प' के तलाश में दक्षिणपंथी लोक-लुभावनवाद के चंगुल में फंसने की कगार पर है।  तीन हफ्ते पहले इमैनुएल मैक्रों ने संसद भंग कर मध्यावधि चुनाव का जुंआ खेला था। वजह यूरोपीय संघ के चुनाव में उनकी नेशनल रैली (आरएन) पार्टी की बुरी हार थी। उन्होंने चुनाव के कदम को यह कहते हुए सही ठहराया कि इससे मतदाताओं को "अपनी पसंद जाहिर करने का मौका' मिलेगा। लोग साफ़ कर सकेंगे कि वे मरीन लु पेन की आरएन पार्टी के बढ़ते प्रभाव के मद्देनजर देश पर आखिर किसका राज चाहते हैं?  मैक्रों का यह भी तर्क था कि 2022 में नेशनल असेम्बली...

  • पर बाइड़न की हिम्मत कायम!

    जो बाइडन के लिए वह एक बुरी शाम थी।वह अमेरिका और उसके लोकतंत्र के लिए भी बुरी शाम थी।27 जून की शाम टीवी पर जो डिबेट हुई, वह अपनी तरह की अनोखी थी। वह दो बुजुर्गों में मुकाबला था। दो बुजुर्ग लड़ रहे थे। मगर चिंगारियां नहीं फूट रहीं थीं, आग नहीं निकल रही थी।  और इसमें जो बात दुखी करने वाली मगर साथ ही हिम्मत बंधाने वाली थी वह यह थी कि एक नेकनीयत बुजुर्ग पूरी ताकत से एक दुष्ट, आतातायी व्यक्ति का मुकाबला कर रहा था। ऐसा दुष्ट जो अब तक लगातार, बेधड़क, बेतहाशा झूठ बोलता आ रहा...

  • पुतिन, किम और शी तीनों भाई-भाई !

    दुनिया बदल रही है, पलट रही है और युद्धों में उलझ रही है। वही वह प्रजातंत्र और उसकी भाषा से दूर खिसक रही है। नतीजतन 'राईट' (दक्षिणपंथ) को 'राईट' (सही) साबित करने पर आमादा है। पुराने दोस्त, दोस्ती का लबादा ओढ़े जहां दुश्मनी निभा रहे हैं तो पुराने दुश्मनों में गलबहियां हो रही हैं। दुनिया के लिए, हम सबके लिए, खतरनाक लोग एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। उनकी सोच और इरादे एक से हैं इसलिए वे दोस्त बन नए गठबंधन बना रहे हैं।  बुधवार की सुबह आप सब अपने मोबाइल की स्क्रीन पर देख सकेंगे कि एक से डीलडौल...

  • जागों, गर्मी हमलावर है !

    आसमान धधक रहा है। नीले, हरे, सफेद, भूरे- प्रकृति के सभी हसंते-खिलखिलाते विविध रंग रूआंसे हैं। अल सुबह 6 बजे ही मुझे घर के पर्दे खींचने पड़ते हैं क्योंकि उस समय भी सूरज के तेवर दोपहर जितने तीखे हो जाते हैं। हवा को जैसे बुखार चढ़ा हुआ है और मुझे महसूस होता है मानों मुझे बुखार हो। जहां एयर कंडीशनर ठंडक नहीं दे पा रहे हैं वही पंखे झुलसाने वाली गर्म हवा फेंक रहे हैं। हर कोने से, हर दिशा से गर्मी हमलावर है। घर के अंदर भी ऐसा महसूस हो रहा है कि मानों हम खुले में हैं। साथ...

  • अनजान चेहरों का ‘वारिस पंजाब दे’ बनना!

    लगता है 35 साल बाद भी पंजाब में पुराने घाव जस के तस है। कुछ भी नहीं बदला है। या शायद सब कुछ बदल गया है। राज्य एक बार फिर गुस्से, अवज्ञा, विद्रोह, सिक्ख पहचान को कायम रखने, सिक्ख अस्मिता की लहर में डूबता जा रहा है। जनादेश और भावनाओं की भांप-2 चुनाव 2024 के नतीजों में सुर्खियां बटोरने वाले अमृतपाल सिंह और सरबजीत सिंह खालसा भी है। दोनों ने बतौर निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में चुनाव लड़ा है। जहां अमृतपालसिंह ने कांग्रेस के उम्मीदवार कुलदीप सिंह जीरा को 1,97,120 वोटों से हराया वहीं सरबजीत सिंह खालसा ने आम आदमी...

और लोड करें