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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- नाबालिग पति को नहीं कर सकते बालिग पत्नी के हवाले, ये अपराध है…

इलाहाबाद | हाईकोर्ट में एक याचिका पर सुनवाई करते हुए अहम फैसला लिया. हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पति नाबालिग हो तो भी वह भी बालिग पत्नी के साथ नहीं रह सकता. कोर्ट ने  कहा कि नाबालिग पति को उसकी बालिक पत्नी को सौपना पॉक्सो एक्ट के तहत एक अपराध माना जाना चाहिए. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक लड़का बालिक नहीं हो जाता तब तक वह आश्रय स्थल पर ही रहेगा. बता दें कि कोर्ट में यह निर्देश एक मां के द्वारा दायर की गई याचिका पर दिए हैं.

मां ने बेटे की कस्टडी के लिए दायर की थी याचिका

युवक की मां ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर उसकी रक्षा मांगी थी. लेकिन लड़के ने अपनी मां के साथ रहने से साफ इनकार कर दिया था. युवक का कहना था कि वह अपनी मां के साथ नहीं रहना चाहता और वह अपनी पत्नी के साथ ही रहना चाहता है. लड़के की उम्र अभी 16 साल है और वह 4 फरवरी 200 को 18 साल का होगा. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने दोनों की शादी को निरस्त करा कर दिया और कोर्ट ने कहा कि नाबालिग पति को बालिग पत्नी के हाथों नहीं सौंपा जा सकता यह गलत है.

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बालिग होने तक आश्रय स्थल में ही रहेगा युवक

बता दें पूरा मामला बालिग और एक नाबालिग के विवाह का है. इस मामले में स्थिति उल्टी है यहां लड़की बालिक बताई जा रही है और लड़का नाबालिग. यह पूरा मामला पुलिस और कोर्ट के संज्ञान में तब आया जब लड़की की मां ने लड़के को नाबालिग बताते हुए उसकी कस्टडी कोर्ट से मांगी. जांच में यह स्पष्ट हो गया कि लड़का अभी नाबालिग है लेकिन वह अपनी मां के साथ नहीं रहना चाहता. इसी को देखते हुए कोर्ट ने फैसला सुनाया कि लड़के को 18 साल होने तक आश्रय स्थल पर ही रखा जाए. इसके बाद वो अपनी इच्छा से कहीं भी रहने के लिए स्वतंत्र है.

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