nayaindia Qutub Minar Controversy : कुतुब मीनार में पूजा की अनुमति देना संभव नहीं...
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने कहा- कुतुब मीनार में पूजा की अनुमति देना कानूनन संभव नहीं…

Qutub Minar Controversy :
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नई दिल्ली | Qutub Minar Controversy : पिछले कुछ समय से लगातार देश में विरासतों और ऐतिहासिक स्थलों पर विवाद कफी गर्माया हुआ है. ताजमहल का विवाज ठंडा पड़ने के बाद से अब कुतुब मीनार को लेकर लोग लगातार सोशल मीडिया में हंगामा कर रहे हैं. ऐसे में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने कुतुब मीनार परिसर में हिन्दू और जैन मंदिरों के पुनरुद्धार और उनमें पूजा की अनुमति दिये जाने की अर्ज़ी का विरोध किया है. ASI की ओर से इस बारे में कहा है कि मौलिक अधिकार के नाम पर उसके द्वारा संरक्षित पुरातात्विक महत्व के स्थल पर किसी तरह का उल्लंघन नहीं किया जा सकता. ASI ने हिन्दू पक्ष की ओर से दिल्ली की साकेत अदालत में दायर अर्ज़ी के जवाब में कहा है कि संरक्षित स्थल की पहचान बदली नहीं जा सकती.

बहुत सी मूर्तियां विद्यमान, लेकिन पूजा के अनुमति देना गलत…

Qutub Minar Controversy : ASI ने हलफ़नामे में कहा है कि अंतरिम आवेदन के दूसरे अनुच्छेद में कहा गया है कि इस तथ्य से इनकार नहीं किया जा सकता कि कुतुब मीनार परिसर में बहुत सी मूर्तियां विद्यमान हैं. लेकिन केंद्र की ओर से संरक्षित इस स्मारक में पूजा करने को मूल अधिकार बताते हुए प्रतिवादियों या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से किये गये दावे को स्वीकारना प्राचीन स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम, 1958 के प्रावधानों के विरुद्ध होगा. केंद्र सरकार की एजेंसी एएसआई ने कहा कि इस (संरक्षित) स्थल का उल्लंघन करके मूलभूत अधिकार प्राप्त नहीं किया जा सकता.

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अवशेष दिखाते हैं कि ये हिंदू स्थल…

Qutub Minar Controversy : ASI ने कहा कि कुतुब मीनार 1914 से संरक्षित स्मारक घोषित है और इसकी स्थिति नहीं बदली जा सकती और न ही उसमें पूजा की अनुमति दी जा सकती है. एजेंसी ने कहा कि इसको संरक्षित स्मारक घोषित किये जाने के समय से यहां कभी कोई पूजा नहीं की गयी है. बता दें कि याचिकाकर्ता हरिशंकर जैन ने अदालत में दायर अर्जी में कहा है कि कुतुब मीनार परिसर में करीब 27 मंदिरों के 100 से ज्यादा अवशेष बिखरे पड़े हैं. याचिकाकर्ता ने यह दावा भी किया है कि परिसर में श्री गणेश, विष्णु और यक्ष समेत कई हिन्दू देवताओं की आकृतियां स्पष्ट हैं और वहां मंदिर के कुओं के साथ कलश और पवित्र कमल के अवशेष भी हैं जो स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि यह परिसर मूलत: हिंदू स्थल है.

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