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बिहार में 18 हजार किलोमीटर की मानव शृंखला!

पटना।  समाज सुधार की अपनी योजनाओं को लेकर जुनून की हद तक आशक्ति रखने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में लगातार तीसरे साल मानव शृंखला बनवाई है। उनका दावा है कि यह मानव शृंखला ऐतिहासिक रही। हालांकि विपक्षी पार्टियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पर सवाल उठाए है। अनेक जगहों पर कड़ाके की ठंड़ में स्कूली बच्चों को नंगे पैर खड़े रहना पड़ा है। मानव शृंखला के दौरान एक स्कूल शिक्षक की मौत भी हो गई। और एक जगह दुर्घटना में कुछ लोग घायल हुए।

बहरहाल, यह मानव शृंखला जल-जीवन-हरियाली के समर्थन और शराब और दहेज प्रथा के खिलाफ बनाई गई। रविवार को बनाई गई इस मानव शृंखला के बारे में दावा किया जा रहा है कि यह 18 हजार किलोमीटर लंबी थी। इस इवेंट को 15 से ज्यादा हेलीकॉप्टरों के जरिए कवर किया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे ऐतिहासिक बताया और कहा कि इसमें लोगों का पूरा समर्थन मिला। दूसरी ओर विपक्षी पार्टी राजद ने इस आयोजन को पैसे की बरबादी कहा।

राजद के नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि जब बिहार में बाढ़ आई थी, तब यह हेलीकॉप्टर नजर नहीं आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मानव शृंखला में बच्चों को जबरन नंगे पैर खड़ा किया गया। दूसरी ओर नीतीश कुमार ने ट्विट कर बताया कि 5.16 करोड़ लोग मानव शृंखला में शामिल हुए। उन्होंने कहा- मानव शृंखला के जरिए पूरी दुनिया ने बिहार के मत को देखा है। पर्यावरण संरक्षण के लिए हमने जो काम किया है, उसे लोगों का पूरा साथ मिला। पर्यावरण को हो रहे नुकसान को लेकर अगर हम नहीं जागे तो आने वाली पीढ़ी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ेगा।

मानव शृंखला का मुख्य कार्यक्रम पटना के गांधी मैदान में हुआ। मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, आरा, छपरा जैसे शहरों से लेकर गांव-गांव तक लोग सड़क पर खड़े होकर मानव शृंखला का हिस्सा बने। मुजफ्फरपुर के दरधा घाट पर तो लोग नाव पर ही एक-दूसरे का हाथ थामे खड़े नजर आए। हालांकि, दरभंगा में मानव शृंखला के दौरान ही दिल का दौरा पड़ने से एक शिक्षक की मौत हो गई।

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