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नालंदा महाविहार का विश्व धरोहर का दर्जा खतरे में!

पटना। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने बिहार सरकार (Bihar government ) से कहा है कि वह नालंदा महाविहार के संरक्षण की अपनी योजना शीघ्र सौंपे ताकि प्राचीन शिक्षा केंद्र के अवशेषों को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया जा सके।

एएसआई, पटना सर्कल में अधीक्षण पुरातत्वविद् गौतमी भट्टाचार्य (Gautami Bhattacharya) ने बताया कि यदि एकीकृत मास्टर प्लान बनाने में अधिक समय लिया जाता है और इसकी अनुपालन रिपोर्ट पेरिस स्थित वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर (WHC) को निर्धारित समय के भीतर प्रस्तुत नहीं की जाती है तो नालंदा महाविहार को यूनेस्को की प्रतिष्ठित विश्व धरोहर सूची से हटाए जाने का जोखिम उत्पन्न हो सकता है।

डब्लूएचसी विश्व धरोहर से संबंधित सभी मामलों के लिए यूनेस्को के अधीन समन्वयक है। भट्टाचार्य ने कहा कि यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में इस साइट के शिलालेख के समय बनाए गए नालंदा महाविहार के संरक्षण और इसके लिए एकीकृत मास्टर प्लान प्रस्तुत करने की प्रतिबद्धता का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि हाल के महीनों में एएसआई द्वारा बार-बार याद दिलाने के बावजूद नालंदा जिला प्रशासन ने एएसआई को एकीकृत मास्टर प्लान जमा नहीं किया है।

नालंदा एक प्रशंसित महाविहार था जो बिहार में मगध के प्राचीन साम्राज्य में एक बड़ा बौद्ध मठ था। यह स्थल पटना से लगभग 95 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में स्थित है। यह पांचवीं शताब्दी सीई से 1200 सीई तक एक शैक्षणिक केंद्र था।

नालंदा के अवशेष को 2016 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में अंकित किया गया था। एएसआई अधिकारी ने कहा, समय सीमा के भीतर एकीकृत मास्टर प्लान को जमा नहीं करने से विश्व धरोहर समिति को नकारात्मक दृष्टिकोण लेने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। भट्टाचार्य ने कहा कि यदि डब्ल्यूएचसी किसी स्मारक के बारे में नकारात्मक दृष्टिकोण रखता है, तो उसे लुप्तप्राय सूची में रखा जाता है जिससे विश्व धरोहर का दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए बहुत शर्मनाक स्थिति होगी। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए मैं नालंदा के जिलाधिकारी को एकीकृत मास्टर प्लान जल्द से जल्द जमा करने के लिए लगातार पत्र लिखती रही हूं।

इस संबंध में डब्ल्यूएचसी की बैठक दिसंबर के पहले सप्ताह में होने की संभावना है। भट्टाचार्य ने कहा कि उन्होंने 17 अक्टूबर को जिलाधिकारी को आखिरी पत्र लिखा था। यही पत्र राज्य सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की सचिव और नगर विकास और आवास विभाग को भी भेजा गया है। बार-बार प्रयास करने के बावजूद नालंदा के जिलाधिकारी शशांक शुभंकर अपनी टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं हो सके। इस संबंध में कला, संस्कृति एवं युवा विभाग की सचिव बंदना प्रयाशी से भी बातचीत नहीं हो सकी। (भाषा)

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