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तीर्थयात्रियों ने किया तर्पण कर्मकांड

PRAYAGRAJ, SEP 25 (UNI):- Pilgrims perform 'Tarpan' rituals for their ancestors on the last day of 'Pitra Paksha' and Amashwashya festival on the river bank of Ganga in Prayagraj on Sunday. UNI PHOTO-34U

गया। गयाजी में चल रहे विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला-2022 महासंगम के अंतिम दिन तीर्थ यात्रियों ने फल्गु नदी के जल से तर्पण कर्मकांड किया। अमावस्या के दिन पितरों को मोक्षदायिनी फल्गु नदी के जल से तर्पण कर्मकांड किया जाता है। अहले सुबह से ही हजारों की संख्या में पिंडदानियों का जनसैलाब फल्गु नदी स्थित देवघाट (Devghat) पर उमड़ पड़ा, जहां पूरे धार्मिक विधि-विधान से फल्गु नदी में स्नान कर तीर्थ यात्रियों ने पितरों को तर्पण किया।

इस मौके पर स्थानीय पंडा ऋषिकेश गुर्दा ने बताया कि सर्व पितृ अमावस्या (Sarva Pitru Amavasya) है। आश्विन माह में चल रहे 17 दिनों के त्रिपक्षीय श्राद्ध का अंतिम दिन है। उन्होंने बताया कि अंतिम दिन ‘सुख सैंयादान’ और पिंडदान कर पितरों को विदाई दी जाती है। यह वटवृक्ष की महत्ता है। ऐसी पौराणिक मान्यता है कि जो लोग 17 दिनों तक पिंडदान नहीं कर पाते हैं, वे आज के दिन फल्गु नदी के पवित्र जल से स्नान कर सभी पितरों के नाम से तर्पण एवं ‘जलदान’ करते हैं, जिससे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इस दिन अक्षयवट वृक्ष के नीचे सुफल करने से पितरों की आत्मा तृप्त हो जाती है। ऐसे में दूर-दराज से आए पिंडदानी पितरों की आत्मा की शांति हेतु तर्पण कर्मकांड कर रहे हैं। (वार्ता)

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