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वाल्मीकि अभयारण्य के आसपास बाघों से इंसानों को खतरा

पटना। बिहार (Bihar) के पश्चिम चंपारण जिले के बरवा गांव के मूल निवासी राम प्रसाद उरांव की 20 सितंबर को एक कृषि क्षेत्र में काम करने के दौरान एक बाघ (Tiger) के हमले में मौत हो गई। उरांव की मौत से ठीक 10 दिन पहले 40 वर्षीय गुलबदन देवी की धान के खेत में काम करने के दौरान एक बाघ के हमले में जान चली गई थी। 16 जुलाई को एक खेत में कुछ कपड़ों के साथ एक कंकाल मिला था। मरने वाले की पहचान धर्मराज काजी के रूप में हुई थी।

ये हमले पश्चिम चंपारण जिले में रॉयल बंगाल टाइगर (Royal Bengal Tiger) के प्राकृतिक आवास वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) से सटे इलाकों में हुए। इंसानों पर लगातार हो रहे हमलों से दो दर्जन से अधिक गांवों के निवासी लगातार दहशत और भय में जी रहे हैं। वीटीआर के अधिकारी यह भी स्वीकार करते हैं कि इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मानव-पशु संघर्ष हो रहे हैं।

पश्चिमी चंपारण रेंज के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) डॉ. नीरज नारायण (Dr. Neeraj Narayan) ने बताया कि वीटीआर में मानव-पशु संघर्ष हमेशा सामने आते हैं, क्योंकि यह क्षेत्र घनी मानव आबादी से घिरा हुआ है। वीटीआर से सटे कई गांव हैं और जंगली जानवर पानी और भोजन की तलाश में मानव आबादी की ओर भटक सकते हैं।

इस बीच, एक अन्य अधिकारी ने बताया कि उरांव की हत्या इस साल की पांचवीं ऐसी घटना है। 2018 की जनगणना के अनुसार, रिजर्व में कुल 40 बाघ थे। (आईएएनएस)

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