Bengal Politics Mamta Banerjee :  चुनाव आयोग नहीं लेना चाहता विवादित फैसला
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Bengal Politics Mamta Banerjee : ना चाहते हुए भी ममता बनर्जी की कुर्सी बचाने में मदद करेगी BJP !

Bengal Politics Mamta Banerjee :

नई दिल्ली । Bengal Politics Mamta Banerjee :  बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले और बाद भी ममता बनर्जी के केंद्र के साथ कैसे रिश्ते हैं ये तो जगजाहिर है. ममता बनर्जी नंदीग्राम से विधानसभा चुनाव हार गई थी. इसके बाद भी वह बंगाल की मुख्यमंत्री बनी. ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री तो बन गई लेकिन 4 नवंबर के पहले तक होने विधानसभा का सदस्य होना ही होगा. यदि ऐसा नहीं होता है तो ममता बनर्जी को इस्तीफा देना पड़ सकता है. यहां यह बता दें कि ममता बनर्जी ने अपने लिए सीट खाली करवा ली है, लेकिन अभी भी उन्हें उपचुनाव का इंतजार है. यह बात तो सही है कि ममता बनर्जी के लिए मुश्किल है, लेकिन भाजपा भी इस मुश्किल में उनका फायदा नहीं उठा सकती. या दूसरे भाषा में कहें तो भाजपा भी कहीं ना कहीं किसी समस्या से जूझ रही है.

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कोरोना के कारण चुनाव पर रोक

Bengal Politics Mamta Banerjee : कोरोना की दूसरी लहर के दौरान चुनाव कराने पर चुनाव आयोग पर कई सवाल उठे थे. यही कारण है कि अब चुनाव आयोग कोई भी विवादित फैसला नहीं लेना चाहता. कोरोना काल में चुनाव करवाने के कारण कई राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग पर जान से खेलने तक का आरोप लगा दिया था. इसके साथ ही कई राज्यों के हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने चुनाव आयोग को संदेह की दृष्टि से देखा था. इन्हीं कारणों की वजह से चुनाव आयोग ने फिलहाल चुनावों पर रोक लगा रखी है. अब अगर यह रोक नवंबर तक चुनाव आयोग बढ़ा देता है तो इसका सीधा असर ममता बनर्जी को पड़ने वाला है.

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भाजपा को भी है चुनाव टलने का डर

बता दें कि चुनाव के टलने का करवाती है जनता पार्टी को भी उतना ही है जितना ममता बनर्जी को है. ना चाहते हुए भी केंद्र सरकार को अप्रत्यक्ष रूप से ममता बनर्जी की कुर्सी बचाने के लिए मदद करनी ही पड़ेगी. इसके पीछे का कारण उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत हैं. बता देंगी तीरथ सिंह रावत को अभी कुछ दिनों पहले ही उत्तराखंड का मुख्यमंत्री बनाया गया है. तीरथ सिंह रावत को भी आगामी 10 सितंबर तक विधानसभा का सदस्य बन जाना है. यदि वह ऐसा करने में कामयाब नहीं होते तो उन्हें भी अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ेगी. कुछ हद तक जो परिस्थितियां ममता बनर्जी के सामने हैं वहीं परिस्थितियां तीरथ सिंह रावत के साथ भी है. ऐसे में उम्मीद की जा सकती है कि भारतीय जनता पार्टी किसी तरह से चुनाव आयोग को रोक हटाने के लिए तैयार कर लेगा.

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