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उत्तराखंड में भाजपा का मास्टर स्ट्रोक, रावत हिट विकेट

New Delhi: उत्तराखंड (Uttarakhand)  के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत(Trivendra Singh Rawat) ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया. जानकारों की मानें तो पिछले कुछ दिनों सियासत( Politics) में हो रही उलट फेर से ये स्पष्ट था कि ऐसा होने वाला है. वहीं कुछ लोगों को मानना है कि भाजपा( BJP) ये बहुत अच्छे से समझ गयी थी कि आने वाले समय में भाजपा को रावत के चेहरे से नुकसान हो सकता है. इसी कारण भाजपा ने अपना ये मास्टर स्ट्रोक( Master Stroke)  खेला है. बता दें कि अभी कुछ दिनों पहले ही भाजपा पार्टी ने दो पर्यवेक्षकों को राज्य में भेजा था. इसके बाद सीएम ने खुद दिल्ली जाकर पार्टी के सीनियर नेताओं से मुलाकात भी की थी. लेकिन इन सबके बाद भी रावत आला कमान का विश्वास पाने में सफल नहीं हो सके. हालांकि भाजपा भी उत्तराखंड में सीएम को बदलने में काफी जल्दबादी में नजर आयी. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि अभी एक साल के बाद ही उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव थे.

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70 में से 57 सीटों के साथ मिली थी प्रचंड जीत

18 मार्च 2017 को भापजा को यूपी(UP) और उत्तराखंड में प्रचंड जीत मिली थी. जिसमें उत्तराखंड में रावत के नेतृत्व में भाजपा ने 70 में से 57 सीटों में जीत दर्ज की थी. इसके बाद काफी ऊंचे आत्मविश्वास के साथ रावत सीएम के पद पर काबिज हुए थे. हालांकि इसके अगले ही दिन यूपी में योगी आदित्यनाथ ने भी में सीएम की कुर्सी संभाली. यहां बता दें कि योगी आदित्यनाथ( Yogi Aaditynath)) रावत के घर जनपद पौड़ी से ही आते हैं.

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आम लोगों में सीएम के खिलाफ थी नाराज़गी

ऐसा माना जा रहा है कि लॉकडाउन ( Lockdown)और कोरोना काल में परेशानियों का सामना करने के बाद से राज्य के लोगों में सीएम(CM)  के खिलाफ काफी आक्रोश था. माना जा रहा है कि यहां के लोगों की नाराजगी का कारण पीएम मोदी या फिर भाजपा से नहीं थी बल्कि लोग सीएम के व्यवहार और काम करने के तरीके से परेशान थे. इसको भाजपा ने अच्छे से भांप लिया था. ऐसे में पार्टी आलाकमानों को चिंता था कि कहीं इस नाराजगी का असर अगले साल होने वाले चुनाव में ना हो जाए. बता देें कि हाल ही में गैरसैंण कमिश्नरी का ऐलान के बाद से लगभग उनके खिलाफ सबसे ज्यादा माहौल बन गया. सूत्रों की मानें तो उनके कैबिनेट सहयोगियों को भी ये फैसला बगावत की हद तक नाराज कर गया.

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Ashok Gehlot के समर्थन में उतरे विधायकों की सियासी दांव खेलने की तैयारी! कल बुलाई बैठक
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Ashok Gehlot के समर्थन में उतरे विधायकों की सियासी दांव खेलने की तैयारी! कल बुलाई बैठक

Rajasthan Political Drama

जयपुर | Rajasthan Political Drama : राजस्थान में चल रहा सियासी खेला अब अपने चरम पर आने लगा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) और सचिन पायलट (Sachin Pilot) के बीच वर्चस्व की लड़ाई अब और तेज हो गई है। गहलोत और पायलट खेमा अब आमने-सामने होता नजर आ रहा है। ऐसे में गहलोत समर्थक विधायकों का गुट कल बुधवार को जयपुर  में बैठक करने जा रहा है।

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सियासी दांव खेलने की तैयारी! (Rajasthan Political Drama)
इसी के साथ राजस्थान में गहलोत और पायलट की वर्चस्व की लड़ाई में निर्दलीय विधायकों और बीएसपी विधायक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। कांग्रेस में आए इन विधायकों ने कल बुधवार को एक बैठक आयोजित की है जिसमें वो अपनी आगे की रणनीति बनाने वाले हैं। इस खेमे में 13 निर्दलीय विधायक है और बीएसपी से कांग्रेस में आए 6 विधायक हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि राजस्थान में गरमाई राजनीति के बीच विधायकों का यह खेमा भी अपने सियासी दांव खेलने वाला है और कांग्रेस आलाकमान से गहलोत सरकार में अपनी भागीदारी की मांग उठा सकता है।

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निर्दलीय विधायक ने भी पायलट पर किए तीखें प्रहार
गहलोत-पायलट के बीच की जंग में अब निर्दलीय विधायक रामकेश मीणा भी कूद पड़े हैं। उन्होंने सीएम गहलोत का पक्ष लेते हुए सचिन पायलट पर कड़ा प्रहार किया है। रामकेश मीणा ने कहा कि सचिन पायलट जितने दिन राजस्थान में रहेंगे उतना ही कांग्रेस पार्टी को नुकसान होगा। कांग्रेस के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है जब कांग्रेस के अध्यक्ष ने ही अपनी सरकार गिराने के प्रयास किए हो। पायलट मुख्यमंत्री बनने की सोच रहे हैं लेकिन कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान पायलट नहीं ही पहुंचाया है

पायलट समर्थकों ने खोलो मोर्चा, कहा ‘पायलट आ रहा है’
राजस्थान की राजनीति अब पूरी तरह से गरमा गई है। सचिन पायलट के बगावती तेवरों को देखते हुए, सियासी गलियारों में कुछ भी हो सकता है। सचिन पायलट समर्थकों ने आज मंगलवार को सोषल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है। पायलट के समर्थक ट्विटर पर ‘पायलट आ रहा है’ (Pilot Aa Raha Hai) हैशटेग ट्रेंड करा रहे हैं। लोगों से इसे पूरा समर्थन मिल रहा है। ऐसे में गहलोत खेमे में अब खलबली मचने लगी है।

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