Chhattisgarh Court In Parking : जज साहब ने पार्किंग में सुनवाई कर सुनाया फैसला
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Salute : एक्सीडेंट के बाद लकवा मारने के कारण कोर्ट रूम के अंदर नही आ पा रहा था फरियादी, जज साहब ने पार्किंग में सुनवाई कर सुनाया फैसला…

Chhattisgarh Court In Parking :

कोरबा | Chhattisgarh Court In Parking : देश में अभी भी लोगों को भारत की न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है. कई बार देखा गया है कि न्याय में देरी के कारण लोगों का विश्वास डगमगाने लगता है. लेकिन अंतिम फैसले के बाद चेहरों पर मुस्कान जरूर आ जाती है क्योंकि देर से ही सही उन्हें न्याय मिल जाता है. ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की अदालत से सामने आया है. यहां अपना फैसला सुनाने के लिए जज साहब कोर्ट से बाहर निकल कर आ गए और पार्किंग में अपना फैसला सुनाया. जज द्वारा उठाया गया कदम अब सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बन गया है. लोग एक और जहां भारतीय न्याय व्यवस्था की सराहना कर रहे हैं तो दूसरी ओर जज की तारीफ में कसीदे पढ़े जा रहे हैं.

Chhattisgarh Court In Parking :

क्या है मामला

Chhattisgarh Court In Parking : जानकारी के अनुसार 2018 में एक्सीडेंट की वजह से द्वारिका प्रसाद नाम के व्यक्ति को गंभीर चोट आई थी. इस दुर्घटना के कारण है उनके शरीर में लकवा मार दिया था. अपनी मेडिकल कंडीशन के कारण वे कोर्ट के अंदर तक नहीं आ पर रहे थे. ऐसे में सेशन कोर्ट के जज बीपी वर्मा ने खुद बाहर आने का निर्णय लिया. बता दें कि जज बीपी वर्मा खुद डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विस अथॉरिटी के चेयरमैन भी हैं. ना सिर्फ वो खुद कोर्ट के बाहर निकले बल्कि उनके साथ ही वकीलों को भी बाहर आना पड़ा. क्योंकि उन्होंने कहा कि आगे की सुनवाई पार्किंग एरिया में होगी. इस बात की जानकारी दी गई थी कि दुर्घटना का शिकार हुआ व्यक्ति कोर्ट के अंदर प्रवेश नहीं कर पा रहा है और वह गाड़ी में ही पार्किंग पर लेटा हुआ है.

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इंश्योरेंस कंपनी को 20 लाख का मुआवजा देने का आदेश

Chhattisgarh Court In Parking : इस पूरे मामले में जज ने अपना फैसला सुनाते हैं इंश्योरेंस कंपनी को दुर्घटना में घायल हुए मिट्टी को ₹2000000 मुआवजा देने का आदेश दिया. जज साहब ने कहा कि एक आम व्यक्ति इंश्योरेंस इसीलिए लेता है ताकि विपरीत परिस्थिति में उसकी मदद हो सके. ऐसे में अब इंश्योरेंस कंपनी द्वारका प्रसाद से मुंह नहीं मोड़ सकती. बता दें कि द्वारका प्रसाद ने जब इंश्योरेंस कंपनी से मुआवजे की बात की तो उन्होंने लकवा मारने पर किसी भी प्रकार का मुआवजा देने से साफ इनकार कर दिया था. इसके बाद से लगातार 3 साल तक द्वारका प्रसाद में कोर्ट कचहरी के चक्कर लगाए और अंत में उसकी जीत हुई.

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