nayaindia Advertisement Court Meat : मांस के विज्ञापनों पर नहीं लग सकता
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कोर्ट मे साफ किया- मांस के विज्ञापनों पर नहीं लग सकती रोक, नापसंद हो तो ना देखें…

Advertisement Court Meat :
Image Source : Time Food

मुंबई | Advertisement Court Meat : भारत में लंबे समय से शाकाहार और मांसाहार को लेकर बहस चलती रहती है. दोनों पक्षों के लोग इस मामले को अपने-अपने हिसाब से रखते हैं और दोनों के तर्क काफी अलग होते हैं. हालांकि इस बार बंबई उच्च न्यायालय ने टेलीविजन और समाचार पत्रों में मांसाहारी भोजन के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने की मांग से इनकार कर दिया है. इसके साथ ही इस मांग वाली याचिका खारिज कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति माधव जामदार ने सोमवार को जैन धर्मार्थ ट्रस्टों की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि अदालत तभी हस्तक्षेप कर सकती है जब नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन हो. यह देखते हुए कि इन विज्ञापनों को देखना है या नहीं, यह पसंद का मामला था.

Advertisement Court Meat : अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे दूसरों के अधिकारों का अतिक्रमण नहीं कर सकते हैं. श्री आत्मा कमल लब्धिसूरीश्वरजी जैन ज्ञानानंदिर ट्रस्ट, शेठ मोतीशा धार्मिक और धर्मार्थ ट्रस्ट, श्री वर्धमान परिवार और व्यवसायी ज्योतिंद्र रमणिकलाल शाह द्वारा चायिका दायर की गई थी. उन्होंने अदालत से महाराष्ट्र सरकार को प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मांस और मांस उत्पादों के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी करने का निर्देश देने का अनुरोध किया था.

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Advertisement Court Meat : याचिकाकर्ताओं का कहना था कि वे मांस की खपत को चुनौती देने की कोशिश नहीं कर रहे हैं. उनका कहना था कि हमारे देश में हर तरह के लोग रहते हैं इनमें से बड़ी संख्या शाकाहारी लोगों की हैं. ऐसे में टीवी या फिर अखबारों और सोशल मीडिया में आने वाले विज्ञापनों के कारण हमरा मन खराब होता है. उनका कहना था कि भारत में हर तरह के लोगों की भावना का सम्मान होना चाहिए इसलिए इन विज्ञापनों को बंद कर दिया जाना चाहिए. हालांकि कोर्ट ने तर्कों को आधारहीन बताया. कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि विज्ञापन आम लोगों के लिए होते हैं इसमें मतभेद नहीं किया जा सकता है. हां इतना जरूर है कि लोग अपनी इच्छा के अनुसार इन्हें देखने ना देखने पर निर्णय ले सकते हैं.

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