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कोरोना अपडेट : 18 से वर्ष से अधिक लोग कोविन ऐप से करवा सकेंगे रजिस्ट्रेशन, पीएम ने कहा- कोरोना से लड़ाई में वैक्सीनेशन सबसे बड़ा हथियार

पूरे देश में कोरोना ने हाहाकार मचा रखी है। एक दिन में कोरोना के 3 लाख से अधिक मामले सामने आ रहे है। और 2 हजार लोग अपनी जान गवां रहे है। भारत में कोरोना का टीकाकरण चरम पर है। केंद्र और राज्य सरकार जनता से टीका लगवाने की अपील कर रही है। भारत में दो वैक्सीन का टीकाकरण किया जा रहा है। जो भारत में ही बनी है। 1 मई से वैक्सीनेशन के तीसरे चरण के तहत 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का वैक्सीनेशन शुरू हो रहा है। इसके लिए गुरुवार को घोषणा की गई है कि 18 से अधिक आयु का हर शख्स अब कोरोनावैक्सीन के लिए शनिवार से कोविन ऐप पर रजिस्ट्रेशन करवा सकेगा।

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पीएम मोदी ने की घोषणा

हाल ही में पीएम मोदी ने घोषणा की है कि 18 साल से अधिक उम्र के लोगों को वैक्सीन 1 मई से लगेगी। यह टीकाकरण का तीसरा चरण होगा। भारत में 16 जनवरी से कोरोना का टीका लगाया जा रहा है। इसी के साथ ही भारत में चिकित्सा सेवाओं की हालत खराब है। ऑक्सीजन की किल्ल्त पूरे देश में देखी जा रही है। कोरोना मरीजों को अस्पतालों में बैड नहीं मिल रहे है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना से लड़ाई में वैक्सीनेशन को सबसे बड़ा हथियार बताया। उन्होंने कहा कि पिछले साल इसी समय डॉक्टरों की कड़ी मेहनत और देश की रणनीति की वजह से कोरोना संक्रमण के लहर पर काबू पाया जा सकता था। हालांकि अब देश दूसरी लहर का सामना कर रहा है। ऐसे में सभी डॉक्टरों और फ्रंट लाइन पर तैनात कर्मी पूरी ताकत के साथ महामारी से मुकाबला कर रहे हैं और लाखों लोगों का जीवन बचा रहे हैं।

वैक्सीनेशन में तेजी के लिए राज्यों को दी पावर

तीसरे चरण में वैक्सीन की कमी ना हो इसलिए टीकों की खरीदारी के नियमों में ढील दी गई है। इसके अलावा राज्यों को अब सीधे वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों से अतिरिक्त खुराक लेने का अधिकार दे दिया गया है। इसके तहत वैक्सीन निर्माता कंपनी अब अपनी सप्लाई की कुल क्षमता के 50 प्रतिशत तक स्टॉक को पहले से घोषित कीमतों पर राज्य सरकारों और खुले बाजार में भेज सकेंगे।

कोरोना के इलाज के बारे में जागरूक हों लोग

पीएम मोदी ने सभी डॉक्टरों से कोविड-19 के इलाज और इससे बचाव के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाने और अफवाहों से बचाने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन मुश्किल परिस्थितियों में यह बहुत महत्वपूर्ण है कि लोग आतंक के शिकार ना हों और समय रहते उन्हें सही इलाज मिल सके। साथ ही उन्होंने डॉक्टरों को अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों के उपचार के लिए टेली-मेडिसीन का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया।

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यह कैसा धर्मांतरण है ?

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उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधक दस्ते ने धर्मांतरण के एक बहुत ही घटिया षड़यंत्र को धर दबोचा है। ये षड़यंत्रकारी कई गरीब, अपंग, लाचार और मोहताज़ लोगों को मुसलमान बनाने का ठेका लिये हुए थे। इन मजहब के दो ठेकेदारों— उमर गौतम और जहांगीर आलम कासमी— को गिरफ्तार किए जाने के बाद पता चला है कि उन्होंने एक हजार लोगों को मुसलमान बनाया है।कैसे बनाया है ? उन्हें कुरान शरीफ के उत्तम उपदेशों को समझा कर नहीं, इस्लाम के क्रांतिकारी सिद्धांतों को समझाकर नहीं और पैगंबर मोहम्मद के जीवन के प्रेरणादायक प्रसंगों को बताकर नहीं, बल्कि लालच देकर, डरा-धमकाकर, हिंदू धर्म की बुराईयां करके। नोएडा के एक मूक-बधिर आवासी स्कूल के बच्चों को फुसलाकर योजनाबद्ध ढंग से उनका धर्मांतरण करवाया गया और उनकी शादी मुस्लिम लड़कियों से करवा दी गई।

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यह काम सिर्फ दिल्ली और नोएडा में ही नहीं हुआ, महाराष्ट्र, केरल, आंध्र, हरियाणा और उत्तरप्रदेश में भी इस षड़यंत्र के तार फैले हुए हैं। इस घटिया काम की जांच में यह पाया गया कि उन्हें भरपूर पैसा भी मिलता रहा। इस पैसे के स्त्रोत आईएसआईएस और कुछ अन्य विदेशी एजेन्सियां भी रही हैं। इस राष्ट्रविरोधी काम को अंजाम देने का खास जिम्मा उठा रखा था, उमर गौतम ने। इसका असली नाम श्यामप्रकाश सिंह गौतम था। इसने एक मुसलमान लड़की से शादी की और कुछ वर्ष पहले मुसलमान बनने पर धर्मांतरण का काम जोर-शोर से शुरु कर दिया।

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Religious Conversion For Five Lakh - मात्र पांच लाख रुपए के लिए हिंदू से बन  गया ईसाई | Patrika News

गौतम से कोई पूछे कि तुम खुद मुसलमानों क्यों बने थे? क्या इस्लाम की अच्छाइयों या पैगंबर के जीवन से प्रेरणा लेकर तुम मुसलमान बने थे ? जितने लोगों को तुमने मुसलमान बनाया है, क्या वे इस्लाम के सिद्धांतों को समझते हैं और क्या वे अपने जीवन में उनका पालन करते हैं ? यदि कोई व्यक्ति किसी मजहब के सिद्धांतों को समझ कर अपना धर्म-परिवर्तन करता है तो उसका यह अधिकार है। ऐसा करने से उसे कोई रोक नहीं सकता लेकिन जोर-जबर्दस्ती, लालच और वासना के कारण जो धर्मांतरण होता है, वह निकृष्ट कोटि का अधर्म है।

खुद कुरान शरीफ के अध्याय 2 और आयत 256 में कहा गया है कि ‘‘मजहब में जबर्दस्ती का कोई स्थान नहीं है।’’ जो धर्मांतरण गौतम और कासमी करते रहे हैं, क्या वह इस कसौटी पर खरा उतरता है? महर्षि दयानंद, स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी ने भी ईसाई पादरियों द्वारा किए जा रहे धर्म-परिवर्तन का कड़ा विरोध किया था। वास्तव में यह धर्मांतरण नहीं, धर्म का कलंकरण है। भारत के कई राज्यों ने ऐसे अनैतिक धर्मांतरण के विरुद्ध कठोर कानून बना रखे हैं।

ऐसे ही कानून के तहत उक्त लोगों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है। वास्तव में ऐसे धर्मांतरण में धर्म कम, राजनीति ज्यादा होती है। अंग्रेज ने अपनी राजनीतिक सत्ता मजबूत करने के लिए जैसे ईसाइयत को साधन बनाया था और तुर्कों व मुगलों ने इस्लाम का इस्तेमाल किया था, वैसे ही आजकल कई छुटभय्ये अपनी तुच्छ स्वार्थ-सिद्धि के लिए मजहब का इस्तेमाल करते रहते हैं।

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