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Corona Update: राज्यों को पहले की ही तरह केंद्र मुफ्त में देती रहेगी कोरोना की वैक्सीन

New Delhi: देश में लगातार बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच अब स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से लोगों को राहत दी गई है.  बता दें कि भारत सरकार ने घोषणा की थी कि 1 मई से 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों को कोरोना वैक्सीन दिया जाना है. इस बाबत स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से आज जानकारी दी गई है कि कोरोना वैक्सीन खरीदने के लिए भारत सरकार को 150 रुपए प्रति वैक्सीन देनी है. इस संबंध में मंत्रालय ने कहा है कि भारत सरकार द्वारा खरीदी गई वैक्सीन की डोज राज्यों को पहले की तरह मुफ्त में ही दी जाएगी. बता दें कि देश में अभी वैक्सीनेशन के दौरान को कोविशिल्ड और कोरोना वैक्सीन की खुराक दी जा रही है.  इसके साथ ही अब स्पूतनिक v की खुराक भी देश में जल्द ही दी जाने लगी.

तेजी से किया जा रहा है वैक्सीनेशन

भारत में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए वैक्सीनेशन मैं भी काफी तेजी लाई गई है.  स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में 30 लाख के करीब लोगों को कोरोना का टीका दिया जा चुका है. भारत सरकार भी कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए काफी एक्टिव नजर आ रही है.  इसीलिए सरकार लगातार वैक्सीनेशन में तेजी लाने का प्रयास कर रही है. जनवरी में शुरू किये गये  टिकाकरण अभियान में अब लोग भी बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे हैं.

 

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पिछले 24 घंटे में सामने आए 3. 50 के करीब लाख नए मामले

देश में कोरोना एक विकराल रूप लेता जा रहा है 1 दिन में अब 3. 50 लाख के करीब मामले सामने आ रहे हैं. देश में पिछले 24 घंटों में 346746 ने मामले सामने आए हैं जिसके बाद कोरोना संक्रमित ओं की संख्या  16610481 हो गई है. संक्रमित ओं की संख्या के साथ ही देश में कोरोना से होने वाली मौतें भी लगातार बढ़ रही है देश में पिछले चौबीस घंटों में 2624 लोगों की कोरोना से मौत हो गई है.

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राजनीति

इस बार लेफ्ट रहेगा दूसरे मोर्चे में

left parties

आजाद भारत के इतिहास में वामपंथी पार्टियां हमेशा तीसरे मोर्चे की राजनीति का केंद्र रही हैं। जब कांग्रेस की सरकार होती थी और दूसरी धुरी भारतीय जनसंघ या स्वतंत्र पार्टी जैसी पार्टियां होती थीं तब तीसरा मोर्चा कम्युनिस्टों का होता था। समाजवादी पार्टियों के साथ टकराव के बावजूद कम्युनिस्ट हमेशा तीसरा मोर्चा बनाते रहे, जिसमें समाजवादी पार्टियां भी शामिल होती रहीं। इसके एकाध अपवाद रहे हैं। लेकिन इस बार कम्युनिस्ट पार्टियां तीसरे मोर्चे से बाहर हैं। ममता बनर्जी, शरद पवार, वाईएस जगन मोहन रेड्डी या के चंद्रशेखर राव जैसा कोई नेता वामपंथियों को नहीं पूछ रहा है। ऊपर से वामपंथी पार्टियों ने केरल में आमने-सामने की लड़ाई के बावजूद अपनी किस्मत कांग्रेस के साथ जोड़ ली है।

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ध्यान रहे इस समय कम्युनिस्ट पार्टियां दो राज्यों में कांग्रेस के साथ मिल कर सरकार का समर्थन कर रही हैं। बिहार और तमिलनाडु में कांग्रेस और कम्युनिस्ट एक साथ सत्तारूढ़ पक्ष में हैं और पश्चिम बंगाल में दोनों कई सालों से मिल कर चुनाव लड़ रहे हैं। सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और सीपीआई के सबसे बड़े नेता डी राजा के साथ राहुल के निजी संबंध बहुत अच्छे हैं। येचुरी और राजा बिना शर्त राहुल का समर्थन कर रहे हैं। इसलिए चुनिंदा प्रादेशिक पार्टियों के साथ मिल कर अगर राहुल गांधी दूसरा मोर्चा बनाते हैं या नया यूपीए बनाते हैं तो उसमें कम्युनिस्ट पार्टियां रहेंगी।

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यह अनायास नहीं है कि जिन दो प्रादेशिक नेताओं- एमके स्टालिन और तेजस्वी यादव से राहुल के संबंध अच्छे हैं, उनके साथ कम्युनिस्ट पार्टियों भी बहुत सहज भाव से जुड़ी हैं। इसलिए यह तय है कि अगले चुनाव में भाजपा के विरोध में जो मजबूत दूसरा मोर्चा बनेगा उसमें कई बड़े प्रादेशिक क्षत्रपों के साथ कम्युनिस्ट पार्टियां भी शामिल होंगी। यह तीसरा मोर्चा बना रहे नेताओं पर निर्भर करेगा कि वे तीसरा मोर्चा बना कर भाजपा विरोधी वोट का बंटवारा करा कर भाजपा की जीत का रास्ता बनाते हैं या दूसरे मोर्चे को मजबूत करते हैं।

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