सीजेआई आरटीआई के दायरे में या नहीं, फैसला 13 नवंबर को

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट बुधवार को इस बात का फैसला करेगा कि भारत के

मुख्य न्यायाधीश सूचना के अधिकार (आरटीआई)

के अंतर्गत आएंगे या नहीं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई)

न्यायामूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत

की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ इस मामले पर अपना फैसला सुनाएगी।

मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति एन.वी. रमना,  न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति

संजीव खन्ना वाली इस पीठ ने 4 अप्रैल को मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सीजेआई का कार्यालय सूचना के अधिकार अधिनियम के दायरे में आता है।

सुप्रीम कोर्ट के महासचिव द्वारा इस निर्णय के खिलाफ याचिका दायर की गई, जिस पर अब शीर्ष न्यायालय का फैसला बुधवार को आएगा।

सुप्रीम कोर्ट के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) का प्रतिनिधित्व कर रहे अटॉर्नी जनरल (एजी)

के.के. वेणुगोपाल ने कहा था कि सीजेआई के कार्यालय के अधीन आने वाले कॉलेजियम से जुड़ी जानकारी को साझा करना

न्यायाधीशों और सरकार को शर्मसार करेगा और न्यायिक स्वतंत्रता को नष्ट कर देगा।

अदालत से जुड़ी आरटीआई का जवाब देने का कार्य केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी का होता है।

आरटीआई कार्यकर्ता सुभाष चंदर अग्रवाल की ओर से गुरुवार को बात रखते हुए

वकील प्रशांत भूषण ने आग्रह किया कि पीठ कॉलेजियम प्रक्रिया को सार्वजनिक करे।

मामले में लिए जाने वाला निर्णय यह तय करेगा कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यालय आरटीआई अधिनियम के दायरे में आएगा या नहीं।

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