तमांग की अयोग्यता मामले में केंद्र और चुनाव आयोग को नोटिस

नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार दिए गए और सजा मुकर्रर किए गए सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग के लिए अयोग्यता की अवधि छह साल से घटा कर महज 13 महीने करने के चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देने वाली एक याचिका पर मंगलवार को केंद्र और आयोग से जवाब मांगा। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 24 दिसंबर तय की।

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चीफ जस्टिस डी एन पटेल और न्यायमूर्ति सी. हरिशंकर की पीठ ने राज्य सरकार और तमांग को भी नोटिस जारी कर उनसे इस अर्जी पर जवाब मांगा। अर्जी में चुनाव आयोग को अयोग्यता अवधि (चुनाव लड़ने पर लगी रोक की अवधि) हटाने या घटाने का अधिकार देने वाले जन प्रतिनिधित्व कानून के संबंधित प्रावधान को चुनौती दी गयी है।

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तमांग के सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा ने अप्रैल में विधानसभा चुनाव जीता था और उन्होंने 27 मई को मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। लेकिन वह अयोग्य ठहराये जाने के कारण चुनाव लड़ नहीं सके थे। उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहने के लिए छह महीने के अंदर विधानसभा चुनाव लड़ने की जरूरत है। उन्हें 26 दिसंबर, 2016 को भ्रष्टाचार रोकथाम कानून के तहत अपराधों को लेकर दोषी ठहराया गया था और एक साल की कैद की सजा सुनायी गयी थी। उन्होंने 10 अक्टूबर, 2018 को एक साल की कैद की सजा पूरी कर ली थी।

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सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के महासचिव डेक बहादुर कतवाल ने याचिका दायर कर कहा है कि जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 11 असंवैधानिक है क्योंकि यह चुनाव आयोग को अयोग्यता अवधि हटाने या घटाने का अनियंत्रित एवं मनमानापूर्ण अधिकार देती है। कतवाल ने नामांकन भरने के आखिरी दिन से एक दिन पहले 29 सितंबर को चुनाव आयोग द्वारा जारी आदेश को भी चुनौती दी है जिसके मार्फत तमांग की छह साल की अयोग्यता अवधि में चार साल 11 महीने की कमी कर दी गयी।

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सुदर्शन गोयल, सिद्धार्थ शर्मा और श्रुति अरोड़ा ने याचिका दायर कर कहा है कि जन प्रतिनिधित्व कानून की धारा 11 इस कानून के लक्ष्य एवं उद्देश्य के विरूद्ध है क्योंकि यह कानून दोषी ठहराये गये व्यक्तियों को भारत में छह साल तक चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने के लिए बनाया गया है।

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