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आप मैदान में तो भाजपा-कांग्रेस इंतज़ार में

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भाजपा का गढ़ रहे राजेंद्र नगर विधानसभा का अगले महीने होने वाला उप- चुनाव भाजपा जीत पाएगी या फिर बाज़ी फिर आप के ही हाथ लगती है इसका तो इंतज़ार बाक़ी है। पर यह ज़रूर है कि भाजपा की जीत हार का फ़ैसला उसका उम्मीदवार करेगा। अभी जबकि भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार को लेकर लोगों को इंतज़ार है वहीं आप पार्टी उम्मीदवार दुर्गेश पाठक चुनावी मैदान में हैं और साथ है पार्टी की एक मज़बूत टीम। जीत हार का फ़ैसला भले भाजपा और आप पार्टी के बीच ही होना है पर यह भी कि कांग्रेस से उतारा गया मज़बूत उम्मीदवार इन्हें टक्कर भी दे सकेगा । विधानसभा उपचुनाव के बाद दिल्ली में निगम के चुनाव होने हैं सो इस चुनाव का असर निगम चुनाव पर पड़ना ज़ाहिर है।

यही बजह है कि कांग्रेस के आधा दर्जन अधकचरा नेताओं ने निगम की टिकट को लेकर कांग्रेस छोड़कर आप का दामन थामा है लेकिन नेताओं को यह भी समझना होगा कि पहले तो निगम चुनाव में अभी समय काफ़ी है और दूसरे केजरीवाल कोई कमजोर कड़ी भी नहीं कि पार्टी बदलते ही इन्हें निगम चुनाव का टिकट थमा दे। भाजपा से इस उप – चुनाव के लिए दिल्ली अध्यक्ष आदेश गुप्ता के अलावा राजेश भाटिया, आर पी सिंह , राजन तिवारी सहित आधा दर्जन दावेदारी कर रहे हैं। हांललकि आर पी सिंह पूर्व विधायक हैं लेकिन वे चुनाव लड़ने की मंशा नहीं रखते बताए जा रहे हैं। आदेश दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष भले हों पर इस विधानसभा में कोई ख़ास अहमियत भी नहीं रखते,रही बात राजन तिवारी की सो वे राजनीति के चले हुए कारतूस माने जाते हैं। पर भाजपा के अपने कराए गए सर्वे में अब्बू है तय नहीं।

रही बात राजेश भाटिया की ,सो वे दिल्ली भाजपा के महासचिव रहने के साथ ही इसी क्षेत्र से निगम पार्षद भी रहे हैं। इलाक़े के लोगों को भाटिया मज़बूत उम्मीदवार दिखते हैं। तभी इलाक़े के नुक्कड़ों पर होती चुनावी गपशप में लोग कह भी लेते हैं कि जीतेगा तो ‘भाटिया’। तक़रीबन 1,77000 वोटर्स वाली इस विधानसभा में पंजाबियों और पूर्वांचलियों की खासी संख्या के साथ ही सिख वोटर भी बड़ी संख्या में हैं।पर जीत हार मे पंजाबी और पूर्वाचलं के वोटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। अब भाजपा किसे उम्मीदवार बनाती है ,उसकी जीत हार भी इसी पर निर्भर रहनी है। हालाँकि भाजपा के ही कई नेता इस चुनाव को रंग देने के लिए यह चर्चा भी चला रहे हैं कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष रहे मनजिंदर सिंह सिरसा को पार्टी उम्मीदवार बनाएगी। पर क्षेत्र के लोग नहीं मानते कि सिरसा आप पार्टी से यह सीट निकाल कर भाजपा को दे पाएँगे। ज़ाहिर है कि सिरसा गुरुद्वारा कमेटी चुनाव के अलावा विधानसभा भी हार चुके हैं और भाजपा को संकटमोचन मान कुछ समय पहले अकाली दल बादल को छोड़ भाजपा में शामिल हुए हैं। हाँ यह ज़रूर है कि सिरसा के चुनाव लड़ने के साथ ही यह चुनाव काफ़ी मंहगा ज़रूर हो जाना है । और तब उम्मीदवार कम और पैसा ज़्यादा चुनाव लड़ेगा।

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