Corona Crisis: जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से यहां की सरकार को आया पसीना ,कहा- ऐसे हालातों में हड़ताल सही नहीं

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Bhopal: देशभर में कोरोना अपना कहर बरसा रहा है. देश में कोरोना की दूसरी लहर से हर तरफ हाहकार मचा हुआ है. ऐसे हालातों में अब मध्य प्रदेश से डराने वाली खबर आई है. मध्य प्रदेश के जूनियर डॉक्टर अब हड़ताल पर चले गये हैं. कोरोना के प्रकोप के बीच जूनियर डॉक्टरों के इस फैसले ने राज्य सरकार की  परेशानियों को भी बढ़ा दिया है.  जूनियर डॉक्टरों की मुख्य मांग है कि उन्हें  बेहतर कोविड-19 उपचार एवं एक साल की फीस माफी मिले. इसके साथ ही जूनियर डॉक्टर और भी अपनी कई मांगों के साथ ही हड़ताल परप चले गये हैं. जानकारी के अनुसार फिलहाल मध्य प्रदेश के 6 सरकारी मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टर (जूडा) आज सुबह से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये हैं.

राज्य सरकार को करना पड़ सकता है परेशानियों का सामना

कोरोना से बिगड़ते हालातों को देखते हए अचानक से जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर चले जाने से मध्य प्रदेश की सरकार को कईज्ञ तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. कोरोना वायरस संक्रमण के नये मामलों में आ रही तेजी के चलते इससे निपटने के लिए चिकित्सकों, चिकित्सीय ऑक्सीजन, रेमडेसिविर इंजेक्शनों एवं अन्य चीजों की सरकार को आवश्यक्ता है. ऐसे में से जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने से मध्य प्रदेश सरकार पर  मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा है.

क्या कहना है सरकार का

जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने की खबर के बाद  मध्य प्रदेश सरकार ने कहा है कि हम इस गतिरोध को खत्म करने के लिए अपनी ओर से भरसक प्रयास कर रहे हैं.  उन्होंने कहा कि देशभर में जहां कोरोना कहर बरसा रहा है ऐसे हालातों में डॉक्टरों के हड़ताल पर जाना किसी भी लिहाजे से सही नहीं ठहराया जा सकता है.  मध्य प्रदेश जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. अरविंद मीणा ने कहा कि यदि राज्य सरकार ने आज शाम तक हमारी मांगों को पूरा करने के लिए हमें लिखित में आश्वासन नहीं दिया, तो कोविड-19 मरीजों की उपचार में लगे जूनियर डॉक्टर भी आज शाम के बाद काम बंद कर हमारे हड़ताल में शामिल हो जाएंगे.

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कोरोना काल में ऐसे कदम उठाने के पक्ष में नहीं थे हम

मीणा ने बताया कि वर्तमान में 2500 से 3000 तक जूनियर डॉक्टर हैं और इनमें से 15 से 20 प्रतिशत डॉक्टरों की ड्यूटी कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों का उपचार करने में लगाई गई है.उन्होंने कहा कि हम इस महामारी के दौर में इस तरह से कठोर कदम उठाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन हमारे पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है.  मीणा ने बताया कि पिछले छह महीनों से हम अपनी समस्याओं के बारे में राज्य सरकार का ध्यान आकर्षण कर रहे थे.  तीन मई को मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने आश्वस्त किया था कि हमारी मांगे पूरी कर ली जाएंगी, लेकिन अब तक एक भी मांग पूरी नहीं की गई

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साभार - ऐसे भी जानें सत्य

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