India's Economic Condition Worsens : सरकार कर रही है व्यापार....
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भूखमरी के कगार पर पहुंचा देश, लेकिन भारत सरकार को शराब बनाने वाली कंपनियों की चिंता !

India's Economic Condition Worsens :

नई दिल्ली | India’s Economic Condition Worsens : भारत की आर्थिक स्थिति दिन पर दिन खराब होती जा रही है. लेकिन क्या आपको पता है कि भुखमरी के सूचकांक में भारत अब 117 देशों में 94वें पायदान पर पहुंच चुका है. यदि नहीं तो यह आपको जानकर आश्चर्य होगा कि पाकिस्तान, बांग्लादेश ,नेपाल और श्रीलंका भी सूची में हम से ऊपर है. इन सबके बाद भी भारत सरकार को देश के गरीबों और भूखी की पड़ी नहीं है. आपको इस बात का अंदाजा भारत सरकार के एक नीतिगत फैसले से लग सकता है. कोरोना काल में PM मोदी ने देश के लोगों के लिए फ्री राशन की तो घोषणा कर दी थी. लेकिन क्या आपको यह पता है कि मोदी सरकार ने गरीबों के हिस्से का 78000 टन चावल किसे और कितने में बेचा है. यदि नहीं पता तो यह जानकारी आपके आंखें खोल सकती है.

India's Economic Condition Worsens :

शराब बनाने वाली कम्पनियों को बेच दिए चावल

India’s Economic Condition Worsens : हाल में एक नीतिगत फैसले में 78000 टन चावल ₹2000 प्रति क्विंटल की दर से शराब बनाने वाली कंपनियों को देने का फैसला लिया गया है. यहां यह स्पष्ट कर दें कि राज्य सरकारों को जो केंद्र से चावल की आवश्यकता होती है तो उन्हें भी कम से कम 2200 रुपए प्रति क्विंटल का दाम देना होता है. ऐसे में आप खुद ही समझ सकते हैं कि शराब कंपनियों को इतनी कम कीमत पर चावल क्यों दिया जा रहा है. आपको एक और फैक्ट बताते हैं आज से करीब 20 साल पहले 1991 में भारत में प्रति व्यक्ति चावल की उपलब्धता 81 किलो थी. 2019 में अब ये आंकड़ा घटकर मात्र 70 किलो रह गया है.

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सरकार कर रही है व्यापार

भारतीय जनता पार्टी के शासन में आते हीं के निजीकरण को लेकर विवाद शुरू हो गया था. देश के एयरपोर्ट से लेकर रेलवे स्टेशन और बैंकों तक का निजी करण शुरू हो गया. लेकिन क्या कोरोना काल में शराब बनाने वाली कंपनियों को चावल बेचने उचित था ? क्या विपक्ष के ये आरोप सही हैं कि मौजूदा केंद्र सरकार व्यापार कर रही है ? फिलहाल इन सवालों का जवाब मिल पाना तो मुश्किल है लेकिन इतना स्पष्ट है कि गरीबों के हित का दावा करने वाली यह सरकार कहीं ना कहीं गलत तो है.

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