तार-तार हुए रिश्ते: जानें, बाप की नौकरी को 'हां' और मां के शव को 'ना' कहने वाले निर्दयी बेटे की कहानी, बेटियों ने मां के शव को दिया कांधा और किया अंतिम संस्कार - Naya India
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तार-तार हुए रिश्ते: जानें, बाप की नौकरी को ‘हां’ और मां के शव को ‘ना’ कहने वाले निर्दयी बेटे की कहानी, बेटियों ने मां के शव को दिया कांधा और किया अंतिम संस्कार

Ranchi: कोरोना की दूसरी लहर के दौरान कई ऐसी अमानवीय खबरें सामने आई हैं जिससे मानवता शर्मसार हो गई है. ऐसा ही एक मामला झारखंड की राजधानी रांची से सामने आया है. एक निर्दई बेटे ने दरवाजे पर खड़ी एंबुलेंस को देखकर अपने घर के दरवाजे बंद कर दिए. जानकारी के अनुसार एंबुलेंस से बेटे की ही मां का पार्थिव शरीर घर पहुंचा था. लेकिन बेटे ने मां के शव को घर में लाने से साफ इनकार कर दिया और अपनी पत्नी के साथ अपने घर का दरवाजा बंद कर दिया. यहां यह स्पष्ट कर दें कि मृतक मां का वह इकलौता पुत्र था जिसने अपनी मां को घर के आंगन में अंतिम बार भी जगह नहीं दी.

बहने गिड़गिड़ाती रही मुंह फेर गया भाई

मां का पार्थिव शरीर जब एंबुलेंस से घर पहुंचा तो बेटे और बहू ने शव को घर में घुसाने से मना कर दिया. बेटी का कहना था कि उसकी मां की मृत्यु कोरोना संक्रमण के कारण हुई है ऐसे में यदि घर में मां के पार्थिव शरीर को लाया गया तो घर वालों के भी संक्रमित होने का डर है. जबकि बेटियों और अस्पताल प्रबंधन का कहना था कि उनकी मां को कोरोना नहीं था और ना ही कोरोना संक्रमण के कोई लक्षण ही थे. इसके बाद भी निर्दई बेटे ने मां के अंतिम संस्कार को किसी और गांव में जाकर पूरा करने को कह दिया. बेटियों का कहना था कि मां की एक नहीं तीन बार कोरोना की जांच कराई जा चुकी थी और हर बार कोरोना की टेस्ट नेगेटिव आई थी.

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बेटियों ने हीं दिया कांधा और किया अंतिम संस्कार

लाख समझाने के बाद भी जब निर्दई बेटा नहीं माना तो बहनों ने अपनी मां को कंधा दिया और इसके साथ ही अंतिम संस्कार की सारी रस्में पूरी की. बेटियों ने कहा कि हम दोनों शादीशुदा हैं इसके बाद भी मां की सेवा कर रहे हैं क्योंकि हमें पता है कि हमारी मां कोरोना से संक्रमित नहीं थी. बेटियों ने अपने भाई पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह अपनी पत्नी के बहकावे में यह सब कर रहा है हमें शर्म है कि हमारा भाई ऐसा है. यहां यह बताना जरूरी है कि मृतक महिला के पति सीसीएल में कार्यरत थे और उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे को पिता के स्थान पर नौकरी दी गई थी.

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