President's pardon By Murli manohar : अपनी पत्नी को जिंदा दफन कर उसकी...
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अपनी पत्नी को जिंदा दफन कर उसकी कब्र पर पार्टी करने वाला अपराधी अब चाहता है ‘आजादी’, 27 सालों से जेल में है बंद

President's pardon By Murli manohar :

नई दिल्ली | President’s pardon By Murli manohar : 600 करोड़ के लालच में अपनी पत्नी को जिंदा दफन करने वाला स्वयंभू संत स्वामी श्रद्धानंद उर्फ मुरली मनोहर मिश्रा आजाद होना चाहता है. मध्यप्रदेश के भोपाल जिले में बंद 83 साल के हो चुके इस अपराधी ने राष्ट्रपति से अपने बाकी की सजा माफ करने की गुहार लगाई है. मुरली मनोहर ने संबंध में दलील देते हुए कहा है कि उसका बार-बार जेल में अच्छा रहा है. वह 27 सालों से अपने किए की सजा भोग रहा है. बताया जाता है कि जिस जगह पर उसने अपनी पत्नी को मारकर गाड़ा था वहीं बैठकर रोस शाम पार्टी करता था. बता दें कि श्रद्धानंद की पत्नी शकीरा मैसूर राजघराने के पूर्व दीवान की पोती थी. बता दें कि श्रद्धानंद पहले बेंगलुरु सेंट्रल जेल में बंद था उसके अनुरोध पर 2011 में से गृह राज्य लाया गया. अब मध्य प्रदेश के सागर सेंट्रल जेल में बंद है.

President's pardon By Murli manohar :

50 साल की उम्र में की थी शादी

President’s pardon By Murli manohar : बता दें कि एक समय में शकीरा नमाजी की मौत ने मीडिया में खूब सुर्खियां बटोरी थी. 1986 में उनका विवाह मुरली मनोहर से हुआ था. हालांकि उन्होंने यह शादी भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी अकबर खलीली को तलाक देने के बाद की थी. शादी के पहले उनकी 4 बेटियां भी थी लेकिन 50 साल की उम्र में उनकी दूसरी शादी से वे सभी खफा होकर अलग रहने लगी.

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अचानक लापता हो गई थी शकीरा

President’s pardon By Murli manohar : शादी के बाद अचानक 1991 के अप्रैल महीने शकीरा कहीं गायब हो गई. काफी खोजबीन के बाद भी जब शकीरा का कुछ पता नहीं चला तो बेटियों ने 10 जून 1991 को पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी. काफी लंबे समय तक खोजबीन करने के बाद भी नहीं शकीला का कुछ पता नहीं चला तो पुलिस ने भी केस बंद करने की सोची. बाद में पुलिस ने इस बात का खुलासा किया कि शकीरा को पहले जहर दिया गया और उसके बाद उसे बेंगलुरु के रिचमंड रोड स्थित महल के पिछवाड़े में जिंदा दफन कर दिया गया. इस पूरे अपराध का दोषी कोई और नहीं बल्कि श्रद्धानंद ही था. पिछले 27 सालों से श्रद्धानंद अपने उसी किए की सजा भोग रहा है.

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जेल में कोई नहीं आता मिलने

जेल के रजिस्टर के अनुसार उससे मिलने कोई नहीं पहुंचता. जेल अधीक्षक नागेंद्र चौधरी ने बताया कि आखिरी बार 2 साल पहले श्रद्धानंद का भाई उनसे मिलने आया था. उसके बाद से उनके पास मिलने के लिए कोई नहीं होता. अधीक्षक ने बताया कि उस्ताद आभार सामान्य है और ज्यादातर वक्त अध्यात्मिक प्रवचन देने में बीतता है. उन्होंने बताया कि वह ज्यादातर अध्यात्मिक किताबों और समाचार पत्रों की ही मांग करता है.

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