कांग्रेस को हरियाणा के अहिरवाल क्षेत्र में वापसी की उम्मीद

महेंद्रगढ़ (हरियाणा)। पिछले विधानसभा चुनाव में दक्षिण हरियाणा में साफ हो जाने के बाद कांग्रेस इस बार बेहतर करने की कोशिश में है। यहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में टिकटों के वितरण को लेकर पैदा हुए असंतोष और चौटाला परिवार में आई दरार के परिणामस्वरूप कांग्रेस इस क्षेत्र में वापसी की उम्मीद लगाए बैठी हुई है। प्रदेश की प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) दो धड़ों में बंटकर पहले ही कमजोर पड़ चुकी है।

इस पार्टी से एक और दल जननायक जनता पार्टी (जजपा) का जन्म हुआ है, जोकि जोरशोर से चुनावी मैदान में उतरी हुई है। दक्षिण हरियाणा के यादव बहुल अहिरवाल क्षेत्र में 11 सीटें हैं, जिनमें गुरुग्राम, नूंह, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ शामिल हैं। क्षेत्र की सभी सीटें भाजपा के पास हैं। यहां कुछ सीटों पर नवगठित जजपा कांग्रेस को कड़ी टक्कर दे रही है। यह क्षेत्र भाजपा के राव इंद्रजीत सिंह और कांग्रेस नेता कैप्टन अजय सिंह यादव का गढ़ है। राव इंद्रजीत सिंह पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार में मंत्री थे, लेकिन 2014 में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ मतभेदों के बाद वह भाजपा में शामिल हो गए थे।

कैप्टन अजय सिंह यादव कांग्रेस से लोकसभा चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। मौजूदा चुनाव में उनके बेटे चिरंजीव यादव रेवाड़ी से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। राव इंद्रजीत हालांकि रेवाड़ी से अपनी बेटी आरती सिंह के लिए टिकट का जुगाड़ नहीं कर सके। इसके बजाय भाजपा ने उनके सहयोगी सुनील मुसेपुर को टिकट दिया। रेवाड़ी के मौजूदा विधायक रणधीर कापड़ीवास टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। अन्य कई मौजूदा विधायक हैं, जो टिकट वितरण में अनदेखी किए जाने से नाराज हैं।

इनमें गुरुग्राम के विधायक उमेश अग्रवाल, पटौदी की विधायक बिमला चौधरी, बादशाहपुर के विधायक और मंत्री राव नरबीर सिंह शामिल हैं। महेंद्रगढ़ में भाजपा ने वरिष्ठ पार्टी नेता रामविलास शर्मा को फिर से मैदान में उतारा है। उनके सामने कांग्रेस के राव दान सिंह हैं। भले ही इस क्षेत्र में यादव समुदाय का वर्चस्व है। मगर इसके बावजूद शर्मा ने पिछले चुनाव में महेंद्रगढ़ सीट पर मोदी लहर पर सवार होकर जीत हासिल की थी। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में किसानों को कर्ज माफी, महिलाओं को नौकरी में आरक्षण, शिक्षित बेरोजगार युवाओं को नकद प्रोत्साहन, हिंसक भीड़ (मॉब लिचिग) को रोकने के लिए एक मजबूत कानून, बिजली के बिलों में कटौती जैसे कई बड़े वादे किए हैं।

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