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Taliban को मानते हैं कट्टर तो Islamic State Khorasan को क्या कहेेंगे…

Islamic State Taliban Afghanistan :

नई दिल्ली । Islamic State Taliban Afghanistan : आखिर 20 सालों तक तालिबान में रहने के बाद अमेरिकी सेना वापस चली गई. तय सीमा के पहले ही अमेरिका अपने सैनिकों को लेकर जाने में कामयाब हो गया. हालांकि एयरलिफ्ट के आखिरी के कुछ दिनों में अमेरिका के सैनिकों और नागरिकों को आतंकवादी हमलों से गुजरना पड़ा. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने स्पष्ट तौर पर कहा था कि पिछले रविवार काबुल एयरपोर्ट पर हमला करने वाले कोई और नहीं बल्कि इस्लामिक स्टेट खोरासन के आतंकवादी थे. इसी आतंकवादी संगठन ने हमले की पूरी जिम्मेदारी भी ली थी. ज्यादातर लोगों को यह समझ नहीं आ रहा होगा कि एक ही देश में दो तरह के आतंकवादी संगठन कैसे चल सकते हैं. क्या यह दोनों एक हैं या फिर दोनों की विचारधाराएं अलग हैं…

Islamic State Taliban Afghanistan :

ऐसे समझे ISI-K से कैसे अलग है तालिबान

Islamic State Taliban Afghanistan : 2015 में इस्लामिक स्टेट खोरासन पहली बार अस्तित्व में आया था. जबकि इसके पहले से तालिबान अफगानिस्तान पर हावी रहा है. तालिबान की मंशा साफ थी कि अफगानिस्तान को आजाद करा कर वहां राज करना. इसके पहले तालिबान ने अफगानिस्तान पर शासन भी किया है. हालांकि बहुत हद तक इस्लामिक स्टेट खुरासन का भी यही मकसद है. लेकिन तालिबान अफ़गानिस्तान पर शासन करने को लेकर सीमित है वहीं इस्लामिक स्टेट खोरासन के लड़ाके पूरे मध्य एशिया में राज करना चाहते हैं. दोनों के बीच मतभेद भी इसी बाद का है. यही कारण है कि जब अफगानिस्तान में अशरफ गनी की सरकार थी तो तालिबान को आतंकवादी संगठन माना जाता था. अब जब अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार है तो इस्लामिक स्टेट खोरासन को आतंकवादी संगठन के रूप में देखा जा रहा है.

Islamic State Taliban Afghanistan :

बहुत ज्यादा कट्टर है इस्लामिक स्टेट की विचाधारा

Islamic State Taliban Afghanistan : तालिबान के अफ़गानिस्तान में शासन करने के साथ ही कई ऐसी तस्वीरें वायरल हुई है जिससे लोग विचलित हो गए हैं. सोशल मीडिया में भी इन तस्वीरों को क्रूर कहा जा रहा है.  इससे कहीं ज्यादा क्रूर तो Islamic state Khorasan ke लड़ाके हैं. दोनों शरीयत के हिसाब से ही सरकार बनाना चाहते हैं लेकिन दोनों की सोच में जमीन आसमान का अंतर है. उदाहरण के लिए तालिबान की थ्योरी में दरगाह और फकीरों के लिए कुछ बहुत जगह है. लेकिन इस्लामिक स्टेट की विचारधारा में तो इन सब का होना ही नहीं चाहिए. इतना ही नहीं वे स्त्री शिक्षा के शख्त विरोधी हैं और उनका मानना है कि महिलाओं को घर के बाहर आने की इजाजत कभी नहीं होनी चाहिए.

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शिया और सुन्नी का नहीं है विवाद

Islamic State Taliban Afghanistan : दोनों आंतकी संगठन सुन्नी लेकिन इस्लामिक स्टेट सुन्नियों को मुसलमान माानने को तैयार नहीं है. उनका कहना है कि वो मुस्लिम नहीं है बल्कि काफिर हैं. दुनियाभर में शिया और सुन्नी पर आपसी मतभेद काफी आम है लेकिन यहां की तस्वीरें काफी अलग हैं. अफगानिस्तान में दोनों ही सुन्नी संगठन होने के बाद भी इनमें आपसी तालमेल ना के बराबर है और वे शरियत का भी अलग-अलग मतलब निकालते हैं.

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