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झारखंड के विधायकों को रोकने की चिंता

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस पार्टी के नेताओं की चिंता यह है कि किस तरह से विधायकों को रोके रखा जाए। मुख्यमंत्री की विधानसभा की सदस्यता का मामला हो या बहुमत साबित करने के लिए विधानसभा का सत्र बुलाने का मामला हो, ये दोनों मामले आपस में जुड़े हैं और जेएमएम व भाजपा के बीच चल रहे शह-मात के खेल का हिस्सा हैं। राज्यपाल फैसला नहीं कर रहे थे तो राज्य सरकार ने विधानसभा सत्र बुलाने का फैसला कर लिया ताकि मजूबरी में राज्यपाल फैसला करें। लेकिन असली खेल यह नहीं है। असली खेल विधायकों की एकजुटता का है। जेएमएम को कानूनी लड़ाई लड़ने में दिक्कत नहीं है। लेकिन अगर विधायक टूट गए तो क्या होगा? जेएमएम को अपने विधायकों की चिंता नहीं है लेकिन कांग्रेस को लेकर बड़ी आशंका है।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस के चार मंत्रियों में से तीन मंत्री और बचे हुए 14 विधायकों में से 12 विधायक यानी कांग्रेस के 18 में से कुल 15 विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक वरिष्ठ नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि इन विधायकों को इसी वजह से छत्तीसगढ़ भेजा गया क्योंकि कांग्रेस के एक दर्जन से ज्यादा विधायक किसी न किसी वजह से भाजपा के साथ प्रतिबद्ध हो गए हैं। इसका मतलब है कि कांग्रेस को टूटने से रोकना नाममुकिन सा काम हो गया है। तभी सरकार भी चुनाव की तैयारी शुरू कर चुकी है। उसी हिसाब से फैसले किए जा रहे हैं। भाजपा नेताओं का भी एक बड़ा तबका समय से पहले चुनाव की मांग कर रहा है। लेकिन ज्यादातर विधायक चुनाव के पक्ष में नहीं हैं। तभी अगर लगेगा कि सरकार चुनाव चाहती है तो कांग्रेस के विधायक भाजपा के साथ जाएंगे और अगर भाजपा चुनाव में जाने की तैयारी में दिखी तो कांग्रेस के विधायक नहीं टूटेंगे। अगला एक हफ्ता झारखंड की राजनीति के लिए बहुत अहम है।

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