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Monday, April 19, 2021
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निर्भया को न्याय: जेल में फांसी की तैयारियां पूरी, अंतिम ‘डमी-ट्रायल’ पूरा

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नई दिल्ली। निर्भया कांड के मुजरिमों को फांसी के फंदे से बचाने के लिए वकील-मुजरिमों के तीमारदारों द्वारा जहां अदालतों के बाहर हर संभव कोशिशें जारी हैं, वहीं दिल्ली की तिहाड़ जेल ने अपने स्तर पर फांसी पर मुजरिमों को चढ़ाने के तमाम बंदोबस्त पूरे कर लिए हैं। चारों मुजरिमों को फांसी के फंदे पर लटकाए जाने का डेथ-वारंट 20 मार्च (शुक्रवार) की सुबह पांच से 6 बजे के बीच का जारी हुआ है। हालांकि फांसी की प्रक्रिया से जुड़े तमाम संबंधित अफसरान को गुरुवार को लिखित आदेश जारी कर उन्हें शुक्रवार तड़के ही जेल में पहुंचने को कहा गया है। जबकि पवन जल्लाद को फांसी लगाने का काम पूरा होने के बाद ही जेल से कड़ी सुरक्षा में वापस मेरठ भेजा जाएगा।

फिलहाल खबर लिखे जाने से कुछ देर पहले ही तिहाड़ जेल में पहुंच चुके पवन जल्लाद ने फांसी पर लटकाए जाने के ‘डमी-ट्रायल’ को भी पूरा कर लिया है। हां, यह सब मगर अमल में शुक्रवार को तभी लाया जा सकेगा, जब मुजरिमों के वकील अदालत में अपने ‘मुवक्किलों’ को बचा पाने का आखिरी दांव भी हार जाएंगे। गुरुवार को दोपहर के वक्त जेल नंबर-3 में मौजूद फांसीघर में अंतिम डमी ट्रायल पूरा कर लिए जाने की पुष्टि दिल्ली जेल (तिहाड़ जेल) के अपर महानिरीक्षक राज कुमार ने आईएएनएस से की। उन्होंने कहा, अदालत से डेथ वारंट जेल को मिल चुका है। हम सभी तैयारियां उसी के हिसाब से कर रहे हैं। तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं।

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अब सिर्फ डेथ वारंट पर दर्ज/निर्धारित वक्त (20 मार्च, 2020 शुक्रवार तड़के 5-6 बजे) का इंतजार है। निर्भया के मुजरिमों को अब फांसी पर लटकाए जाने में महज चंद घंटे ही बाकी बचे हैं, ऐसे में जेल प्रशासन दवाब में होगा? पूछे जाने पर अपर जेल महानिरीक्षक ने कहा, नहीं, कोई दबाव नहीं है। दबाव तब होता, जब हमारी तैयारी में कहीं कोई कमी बची होती। अंतिम डमी ट्रायल भी अब से कुछ देर पहले पूरा हो चुका है। डेथ वारंट को अमल में लाए जाने के वक्त फांसीघर में कौन-कौन मौजूद रहेगा, यह सब भी तय हो चुका है।

वहीं, दूसरी ओर तिहाड़ जेल महानिदेशालय के सूत्रों ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर गुरुवार को दोपहर बाद करीब दो बजे बताया, जिन-जिन जेल सुरक्षाकर्मियों को शुक्रवार सुबह फांसी के वक्त मौजूद रहना है, उनके नाम भी तय कर लिए गए हैं। किस कैदी को कौन-सा सुरक्षाकर्मी उसकी कोठरी से निकालेगा और उसे किस रास्ते से फांसीघर तक लेकर पहुंचेगा, यह भी तय हो चुका है। यह सब फिलहाल तिहाड़ जेल नंबर-3 (जहां फांसीघर है, और इसी तीन नंबर जेल में अलग-अलग कोठरियों में चारों मुजरिम बंद हैं) के सुपरिंटेंडेंट डिप्टी सुपरिंटेंडेंट, जेल महानिदेशक संदीप गोयल के अलावा किसी को नहीं पता है।

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तिहाड़ जेल सूत्रों के मुताबिक, फांसी के बाद मौके पर मौजूद डॉक्टर द्वारा चारों को मृत घोषित किए जाते ही, उनके शव तिहाड़ जेल के पास ही स्थित दीन दयाल अस्पताल के शवगृह में भेजे जाएंगे। वहां इन चारों के शवों का पोस्टमॉर्टम करने वाले विधि विज्ञान विशेषज्ञों (फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट्स) के तीन या चार डॉक्टरों का पैनल पोस्टमॉट्र्म करेंगे। इसके बाद शवों को लेने के लिए परिवार वालों से कहा जाएगा। अगर किसी परिवार ने शव लेने से इनकार किया, उस स्थिति में जेल प्रशासन को क्या करना है? इसका भी इंतजाम करके रखा गया है।

दिल्ली जेल महानिदेशालय सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को अगर अदालत में मुजरिमों के वकीलों को राहत नहीं मिलती है तो शुक्रवार सुबह हर हाल में डेथ वारंट को अमल में लाया जाएगा। अगर डेथ वारंट शुक्रवार को अमल में लाया जाता है तो फांसीघर में कौन कौन मौजूद होगा? पूछे जाने पर तिहाड़ जेल के ही एक अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया, ये सब बातें बेहद संवेदनशील हैं। लिहाजा, खुलकर कुछ नहीं कहा जा सकता। हां, संबंधित जिले (जिस जिले में तिहाड़ जेल स्थित है) के डीसी (जिले के उपायुक्त प्रशासन, यूपी में जिलाधिकारी) को लिखित में सूचना दे दी गई है, ताकि वे फांसी की प्रक्रिया को अमल में लाए जाने के वक्त मौके पर अपनी उपस्थिति सुनिश्चित कर सकें।

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