congress party political crisis
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कांग्रेसः गांधी से गांधी तक

Congress party political crisis

भारत की वयोवृद्ध कांग्रेस पार्टी पिछले सात सालो से राजनीति की गहन चिकित्सा इकाई आईसीयू में अंतिम सांस की बाट जो रही है और इस इंतजार में वह इतनी परेशान हो गई है कि अब उसने आत्महत्या के प्रयास शुरू कर दिए हैं, इसकी गैर अनुभवी अशिक्षित चिकित्सक उसे बचा नहीं पा रहे हैं और धीरे-धीरे इसके समर्पित सेवक भी इसे अपने हाल पर छोड़कर पलायन करने लगे हैं। congress party political crisis

करीब डेढ़ सौ साल पुरानी कांग्रेस पार्टी का बड़ा स्वर्णिम इतिहास रहा है, जैसे देश को अंग्रेजों से मुक्त करवाने का तमगा भी मिला हुआ है, किंतु इसका यह दुर्भाग्य है कि इस उम्र में ऐसे कई गंभीर बीमारियों ने घेर लिया है और इसके मौजूदा योग्य चिकित्सक इसका इलाज नहीं कर पा रहे हैं और यह न दिनों दिन शनै-शनै हैं अपनी इतिश्री की ओर अग्रसर हो रही है और आगामी कुछ ही वर्षों में यह इतिहास बन जाएगी।

यदि हम कांग्रेस का इतिहास उठाकर देखें तो यह वही एकमात्र राजनीति की दल है जिसने छह दशक से भी अधिक आजादी की लड़ाई लड़ी और अंततः 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों के शिकंजे से देश को मुक्त कराया था जिसकी अगुवाई अहिंसक आंदोलन के माध्यम से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने की थी, जिस कांग्रेस ने एक गांधी के नेतृत्व में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल कर पूरे देश का दिल जीत लिया था और उसी कांग्रेस को एक गांधी परिवार ने ही उसे आत्महत्या के कगार पर खड़े होने को मजबूर कर दिया है, जबकि आज के राजनीतिक परिवेश में एक सशक्त प्रति पक्षी दल की देश को आवश्यकता है आज वैसे ही देश सशक्त विरोधी के अभाव में निरंकुशता की ओर बढ़ रहा है और ऐसे में इसे रोक पाने की क्षमता किसी भी राजनीति की दल में शेष नहीं रह गई है ।

आज देश के केवल तीन चार राज्यों में ही कांग्रेस का वजूद बचा पाया है और इन राज्यों की भी हालत यह है कि इन राज्यों के तथाकथित पार्टी संरक्षण नेता अपनी महत्वाकांक्षा पूरी नहीं हो पाने के कारण पार्टी का वजूद खत्म करने पर तुले हैं। जिसका ताजा उदाहरण पंजाब है  जो पार्टी आलाकमान के गुनाहों का शिकार हो गया है गैर अनुभवी और सर्वथा अयोग्य आलाकमान ने एक ऐसे कथित राष्ट्र विरोधी अवसरवादी सरदार नेता को प्रश्रय दिया जिसने पार्टी के प्रति समर्पित मुख्यमंत्री के खिलाफ साजिशें रच कर उन्हें पद ही नहीं पार्टी छोड़ने को भी मजबूर कर दिया, इस प्रदेश में मात्र 5 महीने बाद विधानसभा चुनाव होना है कोमा तब यहां कांग्रेसका भविष्य क्या होगा? यह किसी से भी छुपा हुआ नहीं है, इसी परीक्षित से देश पर राज कर रही भाजपा बहुत खुश है।

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राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस की ही सरकार है किंतु इन राज्यों में भी सत्तारूढ़ पार्टी आप ही स्वार्थ के संघर्ष में कोई भी हुई है और आगे पीछे इन राज्यों में भी मध्यप्रदेश में पंजाब की पुनरावृति अभी से नजर आने लगी है। लगभग 34 महीनों पहले हुए विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश में भी कांग्रेस को भी बहुमत मिला था, किंतु एक अनुभवी मुख्यमंत्री की भी सरकार को गिरने से बचा नहीं पाए और आपकी व्यक्तिगत प्रतिद्वंदिता सरकार को ले डूबी और यहां भाजपा की सरकार बन गई, लगभग यही स्थिति कभी मध्यप्रदेश का हिस्सा रहे छत्तीसगढ़ राज्य की सरकार की निर्मित होती जा रही है और पद की लालसा पार्टी के सभी बंधनों को तोड़कर उसे गर्त में अब आने की तैयारी कर रही है, यही स्थिति राजस्थान सरकार की है, जहां मध्यप्रदेश की तरह ही स्थानीय प्रभावी युवा नेता की उपेक्षा की जा रही है और बूढ़े नेतृत्व को प्रश्रय दिया जा रहा है, जो कभी भी राजनीति विस्फोट को जन्म दे सकता है।

Rahul gandhi

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स्वर्णिम इतिहास पर कालिख पोतने की तैयारी

इस प्रकार कुल मिलाकर कांग्रेस की राज्य सरकारों की स्थिति भी पार्टी जैसी ही है कमा लो कभी भी अंतिम सांस ले सकती है पार्टी और इसकी सरकारों की इस दयनीय स्थिति के लिए और कोई नहीं सिर्फ और सिर्फ इसके आयोग के वह गैर अनुभवी वे लोग हैं जिन्हें यह पार्टी वसीयत में प्राप्त हुई और यह अपनी वसीयत की रक्षा करने और उसे नया जीवन दान देने की अपेक्षा उसकी अंतिम यात्रा निकालने वह दफनाने की तैयारी में है।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि आज से साढ़े सात साल पहले जब नरेंद्र भाई मोदी प्रधानमंत्री पद पर आसीन हुए थे तब उन्होंने प्रचार के दौरान ही कांग्रेस को नेस्तनाबूद करने की घोषणा की थी, किंतु इसके लिए मान्यवर मोदी जी को कोई विशेष प्रयास नहीं करने पड़े और इस पार्टी के नियंताओं ने ही मोदी जी की भावना को मूर्त रूप देने के प्रयास शुरू कर दिए। अब देश की सबसे बड़ी चिंता ही यह है कि देश पर राज कर रही सरकार सत्तारूढ़ दल और शासक नेताओं पर सशक्त प्रतिपक्ष के अभाव में सतत निगरानी कौन रखेगा और इसके अभाव में सरकार में पनप रही निरंकुशता को कौन रोकेगा? और 26 माह बाद होने वाले लोकसभा चुनाव के समय देश के सामने भाजपा का विकल्प कौन होगा? congress party political crisis

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